नवांशहर को जिला बने हुए 26 साल:26 साल पहले आज ही के दिन नवांशहर बना था जिला, तब सड़कें कम चौड़ी व ट्रैफिक कम था

नवांशहर22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बाईपास-सचिवालय-फोरलेन हाईवे बने, मगर पुलिस लाइन और गढ़शंकर को नवांशहर में मिलाने के सपने अब भी अधूरे

नवांशहर को जिले का दर्जा मिले 26 साल पूरे हो गए है। बीते 26 सालों की बात करें, तो सन 1995 में शहर की सभी सड़कें सिंगल थीं (कम चौड़ी थीं), लेकिन ये सड़कें लोगों को न डराती थीं और न ही तंग लगती थी। क्योंकि न ट्रैफिक इतना था और न ही इतनी रफ्तार से चलता था। आज सड़कें तब के मुकाबले दो गुणा अधिक चौड़ी हैं। अधिकतर बड़ी सड़कें फोरलेन हैं, लेकिन घर से निकलते ही डर सा लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।

सन 1807 के आसपास नवांशहर को मिला महत्व

नवांशहर के इतिहास को देखे इसका असल में विकास सन 1807 में ही शुरू हुआ। नजदीकी कस्बा राहों उस समय तक डल्लेवालिया मिसल के सरदार तारा सिंह गैबा की राजधानी था। तारा सिंह गैबा की 1807 में मौत के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने इस मिसल को अपने राज में मिला लिया। रंजीत सिंह ने राहों की बजाए नवांशहर में प्रशासनिक ढंाचे को मजबूत करने का निर्णय लिया और शहर में बारादरी पार्क का निर्माण करवाते हुए वहां पर फौज की टुकड़ी भी बिठा दी। कपूरथला के दीवान बन्नामल ने शिवालय मंदिर बनाया। ये दोनों इमारतें 19वीं सदी के दौरान शहर की पहचान बनीं। इसके बाद शहर में सन 1914 में रेलवे लाइन बिछी। इसके बाद सन 1951 में जालंधर से चंडीगढ़ के लिए बनने वाली सड़क को नवांशहर में से गुजारने का प्लान बना तो नवांशहर में विकास की नई इबारत लिखी गई। पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री दिलबाग सिंह नवांशहर से छह बार विधायक बने। सरकार में उनका अपना रूतबा व हैसियत थी और उन्होंने ही 7 नवंबर 1995 को तत्तकालिन मुख्यमंत्री हरचरन सिंह बराड़ से नवांशहर को जिला घोषित करवाया।

खबरें और भी हैं...