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प्रधानगी पर डेडलॉक बरकरार:प्रधान और उप-प्रधान के नाम पर नहीं बन सकी सहमति अगली बैठक की तारीख तय नहीं, 15 पार्षदों ने ली शपथ

बंगा सिटी17 दिन पहले
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बैठक की अध्यक्षता करते एसडीएम दीपक रुहेला, साथ हैं डीएसपी गुरविंदर पाल सिंह व बैठक में मौजूद पार्षद। - Dainik Bhaskar
बैठक की अध्यक्षता करते एसडीएम दीपक रुहेला, साथ हैं डीएसपी गुरविंदर पाल सिंह व बैठक में मौजूद पार्षद।
  • कैंडिडेट पर सहमति न बनने पर पार्षदों ने शपथ ग्रहण करने के बाद बैठक का किया बायकॉट

नगर कौंसिल बंगा के चुनाव को हुए पांच महीने के बाद भी प्रधानगी को लेकर डेडलॉक बरकरार है। बीडीपीओ कार्यालय में नगर कौंसिल कौंसिल की बुधवार को 11 बजे हुई बैठक के पहले एजेंडे के मुताबिक मेंबरों ने बतौर पार्षद शपथ तो ग्रहण की लेकिन इसके बाद सभी ने एक सुर में चुनाव से संबंधित एजेंडे पर अपनी राय न देते हुए बायकॉट कर दिया। जिससे कौंसिल के प्रधान व वाइस प्रधान का चुनाव फिर से टल गया है। लेकिन शपथ दिलाए जाने से अब पार्षद बतौर पार्षद काम कर सकेंगे और लोगों के कागजात भी अटेस्ट कर पाएंगे। एसडीएम दीपक रुहेला की अगुआई में हुई बैठक में बंगा विधायक डॉ. एसके सुक्खी, डीएसपी गुरविंदर पाल सिंह मौजूद रहे।

एसडीएम दीपक रूहेला ने शहर के सभी 15 पार्षदों को शपथ दिलवाई और प्रधान पद के लिए मेंबरों से नाम मांगे। आप ने पहले एक पार्षद का नाम लिया। कांग्रेस के पार्षदों ने प्रधानगी पर सहमति न होने के कारण बैठक के अगले एजेंडों के बायकॉट की बात कही। आप पार्षद भी इस बात पर सहमत हो गए और प्रधान कैंडीडेट का नाम वापस लेते हुए बैठक का बायकॉट कर दिया। दीपक रुहेला ने कहा कि प्रधान व उप-प्रधान के नाम पर पार्षदों की सहमति नहीं बन पाई, इसलिए बैठक स्थगित कर दी गई है। प्रधान पद के चुनाव के लिए अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं की गई है। विचार करने के बाद जो तारीख निर्धारित की जाएगी, उसकी जानकारी पार्षदों को दे दी जाएगी। बैठक में ईओ राजीव ओबरॉय, जितेंद्र पाल, राजिंदर कौर, जसवंत, आरजू गुप्ता मौजूद रहे।

दो विपरीत गुटों को आना होगा एक साथ

फरवरी 2021 में हुए कौंसिल चुनावों में आम आदमी पार्टी के 5 उम्मीदवार, कांग्रेस के 5, अकाली दल (बादल) के 3, भाजपा का 1 और 1 आजाद उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी, जबकि एक वोट अकाली विधायक डॉ. एसके सुक्खी का भी है। प्रधान बनाने के लिए 9 मेंबरों की जरूरत है, जबकि आठ-अाठ वोट होने पर टॉस की नौबत आ सकती है। तीनों पार्टियों में से किसी के भी पास बहुमत नहीं है। अब या तो दो विरोधी गुटों को एक साथ आना होगा या फिर अंदर खाते चल रहीं तोड़ फोड़ की कोशिशों को कामयाब करना होगा। जिसका परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।

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