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इम्युनिटी बूस्टर:जड़ी-बूटियों की मांग 50% बढ़ी, डेढ़ से दोगुना हुए रेट

नवांशहर10 महीने पहले
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  • आयुर्वेदिक दवाएं बनीं लोगों की पहली पसंद, जड़ी-बूटियों का प्रयोग इम्युनिटी के लिए वरदान
  • तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा व दालचीनी का सेवन काफी फायदेमंद
  • तुलसी का काली मिर्च के साथ काढ़े के रूप में प्रयोग को बताया जा रहा लाभकारी

कोरोना की दवा अभी तक भले नहीं आ सकी पर उसके विकल्प के रूप में आयुर्वेद लोगों की पहली पसंद बन गया है। आजकल हर किसी की जुबान पर इम्युनिटी बूस्ट (मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले) की चर्चा है।

आयुर्वेदिक दवाओं के कारोबार से जुड़े लोगों का दावा है कि इम्युनिटी बूस्ट में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की मांग पिछले डेढ़-दो-महीने से 50 फीसदी तक बढ़ गई है। इसके चलते इसके रेट भी दो से ढाई गुना बढ़ गए हैं।

आयुर्वेदिक दवाओं में डील करने वाली फर्म नाज इंडिया के संचालक देवराज कहते हैं कि कोरोना महामारी में लोगों का विश्वास आयुर्वेदिक के प्रति बढ़ गया है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और दालचीनी की मांग में इजाफा हुआ है।

पहले 70 से 80 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाली तुलसी की पत्तियों के रेट 180 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। गिलोय जो पहले 30-35 रुपए प्रति किलो में मिल जाती थी और अब 60 से 70 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। इसी तरह अश्वगंधा जो पहले 250 से 300 रुपए प्रति किलो बिकता था और अब 400 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है।

वैद्य हरकेश दत्त के अनुसार तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और दालचीनी का सेवन बहुत फायदेमंद है। यह कई बीमारियों से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। च्यवनप्राश की ही बात करें तो पिछले साल तक इसकी 95 फीसदी मांग सिर्फ सर्दियों में होती थी, लेकिन आज इसकी मांग पिछले सर्दी के सीजन से भी 30 से 40 प्रतिशत अधिक है।

जिला आयुर्वेदिक अफसर डाक्टर अविनाश कुमार कहते हैं कि उनका विभाग कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी-बूटियों पर खास काम कर रहे हैं।

आयुष मंत्रालय की सलाह पर कोरोना काल में इम्युनिटी बढ़ाने वाली इन चीजों को प्रमोट किया जा रहा है। पांच तरह की दवाएं लोगों को दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से 300 से अधिक खांसी, बुखार और कोरोना के दूसरे लक्षणों वाले लोगों को ठीक कर चुके हैं। जड़ी-बुटियां शरीर की इम्युनिटी के लिए वरदान हैं।

तुलसी का काली मिर्च के साथ काढ़े के रूप में प्रयोग को बताया जा रहा लाभकारी

तुलसी- एंटी ऑक्सीडेंट्स की स्त्रोत तुलसी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। खांसी और जुकाम आदि होने पर तुलसी का काली मिर्च के साथ काढ़े के रूप में प्रयोग अत्यंत लाभकारी माना गया है।

गिलोय - गिलोय को अमृता भी कहते हैं। यह विशेषकर इम्यूनोमाड्यूलेटरी प्रभावों के लिए जाना जाता है। वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन में गिलोय का इस्तेमाल लाभकारी माना गया है।

अश्वगंधा- अश्वगंधा खाने से इम्युनिटी बढ़ती है। यह औषधि वायरल इंफेक्शन के साथ मानसिक तनाव और शारीरिक थकान से उबरने में मदद करती है। दिल और शरीर के लिए भी फायदेमंद है।

दालचीनी-  दालचीनी का प्रयोग कैंसर जैसे रोग पर नियंत्रण पाने से सक्षम है। हृदय के स्वस्थ बनाए रखने और हृदय रोगों पर नियंत्रण रखने में भी दालचीनी सहायक होती है, क्योंकि यह हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रोल को जमने से रोकती है। मोटापे के लिए दालचीनी का सेवन रामबाण उपाय है।

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