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किसान आंदोलन:प्रदर्शनकारियों से महिलाओं को बचाने के लिए बीच में आया था रंजीत, मामले को रफा-दफा करे पुलिस

नवांशहर3 महीने पहले
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  • सिंघु बॉर्डर पर पुलिस पर हमला करने वाला रंजीत नवांशहर के काजमपुर का

सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को लोगों व किसान आंदोलनकारियों के बीच झड़प के दौरान पुलिस पर हमला करने वाले युवक रंजीत सिंह (22) के घर गांव काजमपुर (नवांशहर) में शनिवार को लोगों का आना जाना लगा रहा। गांव व परिवार को इस घटना के संबंध में टीवी चैनलों पर प्रसारित की गईं तस्वीरों व वीडियो देख कर पता चला।

बता दें कि रंजीत वही युवक है जिसे दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प में एक पुलिस मुलाजिम पर तलवार से हमला करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गांव काजमपुर में परिवार में सहम का माहौल है। परिवार बेटे की रिहाई व मामला खारिज करने की गुहार लगा रहा है।

जबकि परिवार के नजदीकी व गांववासी गांव में रणजीत के घर आकर परिवार के साथ घटना संबंधी बात कर रहे हैं। यही हाल रणजीत के ताया के घर का भी है। जहां रणजीत के अपने घर में महिलाएं उसकी मां बीबी सरबजीत कौर के साथ बैठी बातचीत कर रही हैं वहीं पर उसके ताया हरभजन सिंह के साथ बात कर रहे हैं और घटना संबंधी बातों व जानकारियों को साझा कर रहे हैं।

रंजीत के ताया बोले- किसान संगठन मामले की पैरवी करें, बेटे को रिहा किया जाए
रंजीत के ताया हरभजन सिंह ने कहा कि उन्हें टीवी चैनलों के माध्यम से पता चला है कि रणजीत पर पुलिस अधिकारी पर हमला करने के आरोप हैं। जिसके बाद उन्होंने दिल्ली गए गांव के अन्य लोगों के साथ बात की तो पता चला कि खुद को सिंघु के बताने वाले उपद्रवियों ने महिलाओं के टैंटों पर हमला कर दिया था, वहां पथराव किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं रोका।

जिसके चलते बचाव करते हुए रणजीत महिलाओं और उपद्रवियों के दरम्यान आ गया। जिसके चलते इस दौरान दोनों पक्षों में हाथापाई हुई। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को उनके बेटे पर डाले गए केस की पैरवई करनी चाहिए, जबकि सरकार से मांग है कि सरकार इस मामले को खारिज करे और बेटे को रिहा किया जाए।

रणजीत के ताया हरभजन सिंह ने बताया कि रणजीत पहले भी दो बार दिल्ली किसान संघर्ष में शामिल होने के लिए गया था और कई दिन वह रह कर आया था। जबकि अब भी वह कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा की गई ट्रैक्टर मार्च की कॉल के तहत गांव से गए किसानों के जत्थे में शामिल होकर दिल्ली गया था।

वह 21 जनवरी को दिल्ली गया था व 30 जनवरी को गांव के जत्थे ने वहां से वापस आना था। इसी दौरान यह घटना हो गई। रणजीत 12वीं पास है और इलेक्ट्रीशियन आईटीआई पास है। वह कृषि कानूनों के संबंध में चल रहे संघर्ष में शामिल होेने के लिए गया था। जबकि यहां वह खेतीबाड़ी में परिवार का हाथ बंटाता है।

परिवार का किसी गर्म ख्याली दल के साथ कोई संबंध नहीं
आम आदमी पार्टी नेता सतनाम जलवाहा ने कहा कि जब कुछ उपद्रवी लोग महिलाओं के टैंटों को नुकसान पहुंचा रहे थे और पुलिस कुछ कर नहीं रही थी। इस दौरान महिलाओं पर हो रहे हमले से उन्हें बचाने के लिए वह आगे आया था। उन्होंने कहा कि न तो परिवार का किसी गर्म ख्याली दल के साथ कोई संबंध है और न ही युवक का कोई क्रिमिनल रिकार्ड है।

परिवार कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के संघर्ष के समर्थन में है और इसी संघर्ष के तहत युवक तीसरी बार दिल्ली गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसा कोई अधिकार नहीं कि पुलिस पहले किसी उपद्रवियों को किसानों पर हमला करने दे और किसानों द्वारा विरोध करने पर पुलिस खुद बीच में आ जाती है और हाथापाई के दौरान यह घटना घट जाती है। जिसके बाद पुलिस व भीड़ युवक पर टूट पड़ती है। यह घटना अमानवीय है। पुलिस प्रशासन को मामले को जल्द से जल्द खारिज करना चाहिए।

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