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ट्रक यूनियन विवाद:बोले- सलाह देने की बजाय अपनी चिंता करें अकाली गांव में जाकर देखें तो सही कोई घुसने तक नहीं देगा

नवांशहरएक महीने पहले
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  • विधायक अंगद ने चंदूमाजरा और जरनैल वाहद पर साधा निशाना

ट्रक ऑपरेटर्स के झगड़े में नाम लिए जाने पर कांग्रेसी विधायक अंगद सिंह ने ट्रक यूनियन प्रधान सेठ जगजीत सिंह लाली, पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा और हलका इंचार्ज जरनैल सिंह वाहद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका ट्रक ऑपरेटरों के झगड़े से सीधे-सीधे कुछ भी लेना देना नहीं है, लेकिन अगर उनके हलके के ट्रक ऑपरेटर किसी मांग या बात को लेकर उनके पास आएंगे तो उन्हें उनकी बात सुननी तो पड़ेगी ही।

उन्होंने कहा कि जरनैल सिंह वाहद और प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा का नवांशहर से कुछ लेना देना नहीं है और न ही उन्हें नवांशहर के हालात के बारे में पता है। प्रो. चंदूमाजरा रविदास चौक का पत्थर रख कर भूल गए, केंद्रीय सड़क मंत्री नितीन गड़करी से बंगा-श्री आनंदपुर साहिब सड़क का नींव पत्थर रखवा दिया, जबकि ऐसी कोई योजना ही नहीं थी। जरनैल सिंह वाहद को भी उनकी चिंता छोड़ गन्ना किसानों की चिंता करनी चाहिए। कम से कम उन्हें पेमेंट ही दे दें। उन्होंने कहा कि जो अकाली उन्हें सलाह दे रहे हैं कि घर से बाहर नहीं आने देंगे, वे अकाली नेता जरा गांवों में जाने कोशिश तो करें, लोग उन्हें घुसने नहीं देंगे। हलके की बात करें तो अकाली दल के समय में गढ़शंकर रोड, राहों रोड, मत्तेवाड़ा रोड आदि का क्या हाल था। अब उन्होंने ये सड़कें बनवाई हैं।

जाडला में कॉलेज, नवांशहर में स्कूल का ब्लॉक, स्पोटर्स कांप्लेक्स आदि वे लाए हैं। अकालियों ने जो डीएसी व ज्यूडिशियल कांप्लेक्स बनवाए, वे भी एक दूसरे से इतनी दूर की अब शहरवासियों व वकीलों के लिए दिक्कतें होंगी। अगामी नगर कौंसिल चुनाव, शुगर मिल चुनाव में अकाली दल की पोल खुल जाएगी तथा पता चल जाएगा कि ये कितने पानी में हैं। मौके पर मार्केट कमेटी चेयरमैन चमन सिंह, डॉ. कमलजीत लाल, जोगिंदर सिंह, चौधरी हरबंस लाल उपस्थित थे।

लाली दुकानों का किराया व बाकी हिसाब क्यों नहीं देते : अंगद

विधायक अंगद सिंह ने भले ही खुद को इस विवाद से दूर बताया, लेकिन साथ ही ट्रक यूनियन की दुकानों के किराए व अन्य हिसाब न देने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ट्रक ऑपरेटरों से न सिर्फ 2500-2500 रुपए लिए जाते हैं, बल्कि ढुलाई में प्रति बोरी रॉयल्टी भी ली जाती है।

अगर कोई हिसाब मांग ले तो उसे धमकाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं वजहों को लेकर उनके पास कुछ ट्रक ऑपरेटर्स आए थे, जिन्होंने अब अपनी अलग सोसायटी बना ली है। सरकार तो यूनियनें खत्म कर चुकी है और कोई भी कहीं से भी समान ढोने के लिए ट्रक ले सकता है। ट्रक ऑपरेटर क्या चाहते हैं तो पुराने मेंबरों की वोटिंग करवा पता कर लें कि किसके साथ कितने ऑपरेटर हैं।

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