विश्व दृष्टि दिवस:मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों की आंखों पर पड़ रहा दुष्प्रभाव

नवांशहरएक महीने पहले
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विश्व दृष्टि दिवस मनाने के दौरान संबोधित करते सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदरवीर कौर व अन्य। - Dainik Bhaskar
विश्व दृष्टि दिवस मनाने के दौरान संबोधित करते सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदरवीर कौर व अन्य।
  • सेहत विभाग की टीम ने जिला अस्पताल में प्रोग्राम करवाया, इस वर्ष विश्व थीम "अपनी आंखों से प्यार करो’

मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बच्चों व नौजवानों की आंखों पर अधिक प्रभाव डाल रहा है। इसलिए इसका इस्तेमाल कम करना चाहिए। कम रौशनी में नहीं पढ़ना चाहिए, टेलीविजन देखते समय और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय उचित दूरी व रौशनी का खास ध्यान देना चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदरबीर कौर वीरवार को सिविल अस्पताल में मनाए गए विश्व दृष्टि दिवस के दौरान संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्व दृष्टि दिवस का थीम अपनी आंखों से प्यार करो है। डॉ. नवरीत कौर ने लोगों की आंखों की जांच करते हुए कहा कि आंखें कुदरत का अनमोल तोहफा हैं। आज के तनाव भरपूर दौर में आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए तनाव को कम करना चाहिए।

दुनिया में करीब 3 करोड़ 70 लाख से अधिक नेत्रहीन हैं, जिनमें से डेढ़ करोड़ से अधिक लोग सिर्फ भारत में हैं। इसलिए समय पर आंखों की संभाल करने पर 80 फीसदी नेत्रहीनता के केसों को बचाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 20 फीसदी समस्याओं को रोका जा सकता है तथा 60 फीसदी समस्याओं का इलाज भी किया जा सकता है।

सिगरेटनोशी व शराब पीने से बचा जाए, क्योंकि यह आदत मोतियाबिंद व आंखों की हर बीमारी का बढ़ा कारण है। इस मौके पर जिला टीकाकरण अफसर डा. बलविंदर कुमार, जगत राम, तरसेम लाल, विकास विरदी, प्रिं, बलविंदर कौर, राज रानी मौजूद रहे।

आंखों की रौशनी बरकरार रखने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं : डॉ. नवरीत

आंखों की माहिर डॉ. नवरीत कौर ने आंखों की संभाल के लिए लोगों को कुछ उपाय भी बताए और उन्हें संतुलित खुराक व आंखों की कसरत करने की महत्ता के साथ-साथ त्योहारी सीजन में पटाखों से होने वाले प्रदूषण से अपनी आंखों को बचाने की सलाह भी दी। आंखों की रौशनी के लिए हरियां पत्तेदार विटामिन-ई से भरपूर सब्जियों का इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने कहा कि ब्लाइंडनेस का मुख्य कारण कैटरेक्ट, गलूकोमा, डायबिडिक रैटीनोपैथी व कार्नियल ब्लाइंडनेस है। अधिकतर लोग मोतिया के इलाज व आपरेशन को लेकर जागरूक नहीं है। मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने से पहले लोग इसका पकने का इंतजार करते हैं। जिस कारण कई बार इसकी स्थिति बदतर हो जाती है तथा आंखों की रौशनी चली जाती है।

उन्होंने लोगों को संतुलित भोजन का सेवन करने, आंखों को सूरज की सीधी रौशनी से बचाने, खतरनाक काम वाले स्थानों पर आंखों को बचाने के लिए सुरक्षित चश्मा पहनने, समय पर डाक्टरी जांच करवाने के लिए प्रेरित किया। एसएमओ डॉ. मनदीप कमल ने बताया कि मोतिया और ग्लूकोमा के बाद कोर्निया संबंधी बीमारियां आंखों के नुकसान और अंधेपन के मुख्य कारण हैं।

इसलिए समय पर आंखों की जांच करवानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय पर पता लगाकर इलाज किया जा सके। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति शुगर से पीड़ित है तो उसे समय-समय पर अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए और शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए जरूरी इलाज करवाना चाहिए।

अगर किसी को भी 40 साल की उम्र के बाद धुंधला दिखाई देता है तो उसे मोतियाबिंद की शिकायत हो सकती है। इसलिए इलाज के लिए माहिर डाक्टर से ऑपरेशन करवाया जा सकता है, ताकि अपनी नजर को बरकरार रखा जा सके। उन्होंने कहा कि यदि आंख में कुछ चला जाए तो डाक्टरी सलाह के बिना कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए।

नजदीक या दूर की वस्तु सही से न दिखने पर डाक्टर से समय-समय पर आंखों की जांच जरूर करवाई जाए। काला मोतिया या मोतियाबिंद आंखों की रौशनी खत्म कर देता है। इसलिए आंखों की तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाकर जांच करवाने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

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