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पेमेंट बकाया:इस साल बेची गई चीनी की कीमत 11 करोड़, कोरोना की वजह से किसानों को पेमेंट मिलने की उम्मीदें कम

नवांशहर8 दिन पहले
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चीनी मिल की बाहरी तस्वीर।
  • चीनी मिलों को बीते पिराई सीजन का किसानों को देना है 15 करोड़ रुपया

चीनी मिल इस बार करीब 15 करोड़ रुपए की किसानों की देनदारी के साथ शुरू हो रही है। मिल द्वारा इस साल बेची गई चीनी की पेमेंट जो करीब 11 करोड़ रुपए बनती है अगर मिल जाए तो किसानों को इस राशि से पेमेंट हो सकती है। जिससे मिल की देनदारी कम हो सकती है। हालांकि कहा जा रहा है कि बेची गई चीनी की पेमेंट कोरोना की वजह से पैदा हुई स्थितियों की वजह से अभी आने में देरी हो सकती है।

जिसके चलते फिलहाल किसानों को पेमेंट होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है और चीनी मिल को ऐसे हालातों में ही पिराई सीजन शुरू करना पड़ेगा। बीते सीजन की शुरुआत की बात करें तो मिल करीब 17 करोड़ रुपए की देनदारी से शुरू हुई थी, हालांकि बीते पिराई सीजन के दौरान की पेमेंट कर दी गई थी।

सीजन में पौने 3 लाख क्विंटल चीनी की पैदावार

जानकारी के अनुसार चीनी मिल द्वारा बीते पिराई सीजन में 28 लाख 55 हजार क्विंटल गन्ना क्रश किया गया था, जिसके तहत 2 लाख 74 हजार 796 क्विंटल चीनी की पैदावार की गई थी। जबकि मिल के पास बीते सीजन की चीनी भी स्टॉक में पड़ी थी। जबकि अभी तक मिल द्वारा 3 लाख 19 हजार 991 क्विंटल चीनी की बिक्री की गई है।

मिल के पास अभी 1 लाख 96 हजार क्विंटल चीनी की स्टॉक बचा है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा बेची गई व देश से बाहर निर्यात की गई चीनी की पेमेंट जो करीब 11 करोड़ रुपए बनती है वह अभी तक मिल को नहीं मिल पाई है।

प्रति किलो चीनी बनाने पर आता है 42 रुपए का खर्च, कीमत 32 रुपए ही मिल पाती है

केंद्र सरकार ने गन्ने की कीमत 275 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है, जबकि राज्य सरकार ने गन्ने की कीमत पर 35 रुपए बोनस की घोषणा की हुई है। जिसके चलते चीनी मिल को प्रति क्विंटल 310 रुपए किसानों को अदा करने पड़ रहे हैं। यहीं से असली घाटा पड़ रहा है। यही नहीं मिल द्वारा 1 क्विंटल गन्ने से 9 किलो चीनी की पैदावार की जाती है। जिसके चलते मिल के खर्च सहित गन्ने की कीमत के अनुसार चीनी करीब 42 रुपए के लगभग प्रति क्विंटल मिल को पड़ती है।

मगर बाजारी कीमत की बात करें तो चीनी की बाजारी कीमत 32 से 35 रुपए प्रति किलो तक ही मिल पाती है। वहीं 9 किलो की पैदावार व गन्ने की प्रति क्विंटल की कीमत को देखा जाए तो करीब साढे 34 रुपए प्रति किलो चीनी सिर्फ बनती ही है, जबकि इस पर अन्य खर्चे और पड़ जाते हैं।

इसी वजह से मिल पर हर साल किसानों की देनदारी बढ़ जाती है। मिली जानकारी के अनुसार इस सीजन के दौरान करीब 30 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का अनुमान है। मिल ने गन्ना बाउंड कर लिया है और आने वाले हफ्ते में मिल में पिराई शुरू होने की उम्मीद है।

चीनी मिल के जीएम सुरिंदर पाल का कहना है कि मिल द्वारा बेची गई चीनी का करीब 11 करोड़ रुपए की अदायगी चीनी मिल को होनी बाकी है। जबकि किसानों का करीब 15 करोड़ रुपए मिल पर बकाया है। कोरोना काल की वजह से पेमेंट में देरी हो रही है। हालांकि मिल अगले हफ्ते चलाई जानी है, जिसके तहत सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

सुरिंदर पाल, जीएम, चीनी मिल

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