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जिम्मेदारी तय नहीं:सिटी में मेंटेनेंस और नवनिर्माण के 123 काम अटके, 43 ठेकेदारों को नोटिस भेजा

जालंधरएक महीने पहले
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  • निगम हाउस की मीटिंग न होने से अटके कामों के लिए आवाज भी नहीं उठा पा रहे पार्षद
  • काम न होने के बावजूद अधिकारियों की जवाबदेही नहीं

मानसून सिर पर आ गया और अब जाकर नगर निगम सेनिटेशन के कामों पर जोर दे रहा है, जबकि सड़कों को बनाने का काम भी कहीं-कहीं चलाया जा रहा है। वहीं, स्ट्रीट लाइटों को लेकर पार्षदों की नाराजगी के बीच हाउस की मीटिंग नहीं हो रही। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी फिक्स नहीं हो रही तो पार्षद नाराज दिख रहे हैं। वहीं, शुक्रवार को मेयर जगदीश राज राजा के सामने ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के शहर के अलग-अलग वार्डों के 25 कामों की लिस्ट आई।

ठेकेदारों को यह काम अलॉट हो चुके हैं लेकिन पेंडिंग थे। जबकि बिल्डिंग एंड रोड्स शाखा के 93 ऐसे कामों की लिस्ट अलग से सामने आई, जिनका काम न के बराबर हुआ है। इस मामले के बाद मेयर जगदीश राज राजा ने कुल 43 ठेकेदारों को कामों में देरी के लिए पहला नोटिस भेज दिया है।

इस तरह कुल 123 काम अटकने के बाद पार्षद भी हाउस की मीटिंग बुलाने की डिमांड तेज कर रहे हैं। इस बारे में दैनिक भास्कर के सवाल पर मेयर ने कहा- हाउस की मीटिंग बुलाने को लेकर पार्षद संपर्क कर रहे हैं। पहले मीटिंग भी कोविड के दौरान हुई थी। सभी सदस्यों के विचार लेकर मीटिंग बुलाएंगे।

शहर में चल रहे 123 निर्माण के कामों को लेकर मेयर जगदीश राज राजा को 43 ठेकेदारों को नोटिस जारी करने के आदेश देने पड़े हैं। ठेकेदारों के नोटिस के सवाल पर वे बोले- अभी प्रथम नोटिस जारी होगा, फिर भी कोई असर नहीं होता तो अगली कार्रवाई भी करेंगे।

पार्षद जगदीश समराय इलाके की समस्याओं का पत्र देने दफ्तर पहुंचे, नहीं मिला एक भी अधिकारी
निगम हाउस की पिछली मीटिंग विज्ञापन का ठेका रद करने के लिए बुलाई गई थी। उसमें शहर से मुद्दों और अपने वादों में विकास के नए काम शुरू करवाने को लेकर पार्षद अपनी बात नहीं रख सके थे। अब 3 महीने बीतने पर पार्षदों में बेचैनी है कि उन्हें एक तो अपने वार्डों में विकास कार्यों को लेकर ने प्रस्ताव हाउस में रखने का मौका नहीं मिल रहा है और दूसरा नुकसान यह हो रहा है कि अलग-अलग इलाकों में बरसात के मद्देनजर सीवरेज साफ करवाने, फाॅगिंग करवाने, सिस्टम की रिपेयर करवाने के संबंध में अपने मुद्दे रखने का मौका नहीं मिल रहा है। पार्षद डॉक्टर जसलीन कौर सेठी ने यह मांग रखी थी कि हाउस की मीटिंग बुलाई जानी चाहिए। दूसरी तरफ शुक्रवार को पार्षद जगदीश समराय निगम में मांगपत्र देने लिए गए, पर वहां पर सीनियर अधिकारी नहीं मिले। उन्होंने कहा कि हाउस की मीटिंग होनी चाहिए। मुद्दों पर पार्षदों को बात रखने का मंच चाहिए। वहीं पार्षद देसराज जस्सल ने भी मीटिंग बुलाने का समर्थन किया है।

मीटिंग न बुलाने का असर बजट फंसा, फंड की कमी
1. मानसून का सीजन शुरू, निगम सीवरेज की सफाई और जलभराव रोकने का काम पूरा नहीं कर पाया।
2. निगम का बजट फंसा। पार्षद चाहते हैं विकास कार्यों को लेकर फैसले हों ताकि सरकार से फंड की मंजूरी आ सके।
3. पार्षदों को प्रस्ताव रखने का मौका नहीं मिल रहा। जो प्रस्ताव मीटिंग में रखे जाते हैं, उनकी मंजूरी के बाद ही विकास कार्यों पर मुहर लगती है।
4. विधायकों के पास विकास कार्यों की लिस्टें ले जाने को पार्षद हुए मजबूर। अलग कालोनियों में जो विकास के काम हो रहे हैं उनके लिए इलाका विधायक को के पास ही अपने वार्ड के कामों की लिस्ट लेकर पार्षद पहुंच रहे हैं।
5. अधिकारियों के संबंध में आने वाली समस्याएं रखने का मौका नहीं मिल रहा।

रुके हुए विकास कार्य
1. अलग-अलग सड़कों और गलियों का काम।
2. पार्कों की हालत सुधारने के लिए अलॉट किए गए काम।
3. वाटर सप्लाई-सेनिटेशन वर्क।
स्ट्रीट लाइटों के बुरे हाल
शहर में दादा कॉलोनी, प्रीत नगर, दोआबा चौक, थाना-1, रेलवे स्टेशन आदि सड़कों की बंद स्ट्रीट लाइटों को ठेकेदार ठीक नहीं कर रहे हैं। डीसी ऑफिस के सामने की स्ट्रीट लाइट की हालत खराब है।

कमेटियों का काम ठप
विज्ञापन ठेका रद करने के एजेंडे पर हुई हाउस की मीटिंग के दौरान निगम अधिकारियों पर ठेकेदारों का पक्ष रखने के आरोपों के बाद के विवाद का असर अभी भी है। पार्षदों की विभिन्न विभागों की एडहॉक कमेटियों की बैठकें नहीं हो रही। केवल हेल्थ एंड सेनिटेशन के मेंबर एक्टिव हैं।

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