डेंगू का डंक:सिविल में डेंगू के 15, प्राइवेट अस्पतालों में 87 मरीज डॉक्टर बोले- बुखार दिमाग पर हावी हो रहा, ध्यान रखें

जालंधरएक महीने पहले
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मेडिकल वार्ड में अन्य मरीजों के साथ डेंगू संक्रमितों के लगाए गए बेड। - Dainik Bhaskar
मेडिकल वार्ड में अन्य मरीजों के साथ डेंगू संक्रमितों के लगाए गए बेड।
  • देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण लीवर में सूजन आ रही और आकार बढ़ रहा
  • सिविल में मरीजों की गिनती घट नहीं रही, बेड खाली होते ही आ जाता है नया मरीज

जिले में डेंगू के मरीजों की गिनती 338 हो चुकी है। सिविल अस्पताल की बात करें तो डेंगू के अलावा तैयार किया नया वार्ड फुल है और मेडिकल वार्ड समेत कुल 15 मरीज उपाचाराधीन हैं। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में 87 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसके साथ ही सिविल में डेंगू संक्रमण आगे फैलने का संकट खड़ा है, क्योंकि मरीजों के परिजन उनके साथ नेट (बेड पर लगी जालियां) में ही बैठ रहे हैं।

स्टाफ का कहना है कि हम मरीजों के परिजनों को वार्ड से बाहर जाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन लोग मानते नहीं। दूसरी तरफ शहर के प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल मरीजों का इलाज कर रहे डाॅक्टर्स का कहना है कि डेंगू का सीजन लंबा हो गया है, जिस कारण बुखार के मरीज आ रहे हैं।

सिविल में प्लेट्लेट्स कम वाले सात मरीज दाखिल

सिविल में मरीज को छुट्‌टी मिलते ही 10 मिनट में बेड फिर बुक हो जाता है। सात ऐसे मरीज दाखिल हैं, जिनके प्लेटलेट्स 12 हजार से 32 हजार तक हैं। उधर, चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अरुण वालिया का कहना है कि डेंगू का बुखार लीवर के साथ दिमाग पर हावी हो रहा है। लीवर पर सूजन से उसका आकार बड़ा हो रहा है। कई मरीजों में इंटरनल ब्लीडिंग होने के चलते दिमाग पर भी डेंगू का असर हो रहा है। इसका कारण देरी से अस्पताल पहुंचना है।

दो दिन में सिर्फ सिविल से ही आए 5 मरीजों के सैंपल

सरकारी लैब बंद होेने के कारण 48 घंटे में डेंगू के संदिग्ध मरीजों की टेस्टिंग नहीं हुई और संक्रमित की पुष्टि नहीं हुई। आईडीएसपी लैब के स्टाफ का कहना है कि लैब में सिर्फ सिविल से 5 सैंपल आए हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल से कोई सैंपल नहीं आया। सिविल के रिकॉर्ड के मुताबिक अस्पताल में इस सीजन में किसी भी मरीज की अस्पताल में डेंगू के इलाज के दौरान मौत नहीं हुई।

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