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टीकाकरण जरूरी:2.10 लाख लोगों ने लगवाई वैक्सीन; इनमें 0.9% ही संक्रमित हुए, कोई गंभीर नहीं, यानी शुगर-बीपी के मरीजों को भी राहत

जालंधरएक महीने पहले
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बस्ती बावा खेल के कबीर मंदिर में वैक्सीन लगवाती हुई महिला।-भास्कर - Dainik Bhaskar
बस्ती बावा खेल के कबीर मंदिर में वैक्सीन लगवाती हुई महिला।-भास्कर
  • 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की गिनती 90,000 से ज्यादा पर कोमोरबिड मरीज टीका लगवाने से कतरा रहे
  • 43 दिनों में शुगर-बीपी के 163 मरीजों की मौत, किसी को नहीं लगा था टीका
  • 366 नए संक्रमित, 5 की इलाज के दौरान मौत

कोरोना संक्रमितों की गिनती 366 इजाफे के साथ 34360 तक पहुंच गई है जबकि 5 मरीजों ने सोमवार को दम तोड़ दिया। सोमवार को 11549 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। अब तक 2.10 लाख लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें से सिर्फ 0.9% लोगों को ही संक्रमण की पुष्टि हुई है। ऐसा कोई केस सामने नहीं आया, जिसे वैक्सीन लगी हो और उसकी हालत गंभीर हो गई हो।

सेहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार वैक्सीनेशन ड्राइव में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की टीका लगवाने की संख्या 90 हजार से अधिक है। लेकिन 45 साल से अधिक शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या अभी भी काफी कम है। इन्हें वैक्सीनेशन ड्राइव से कैसे जोड़ा जाए, इस बारे न तो सेहत विभाग के पास कोई विजन है और न ही जिला प्रशासन के पास कोई प्लानिंग। रोज संक्रमित मरीजों की पुष्टि में 30% ऐसे मरीज हैं, जिन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर है।

करना ये पड़ेगा... सेहत विभाग ड्राइव में तेजी लाए, 45 से ऊपर उम्र वाले खुद आगे आकर टीका लगवाएं

डोज लगवाने वालों को काफी कम खतरा
केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार 1 मार्च से 45 साल से अधिक उम्र वाले उन मरीजों को वैक्सीनेशन लगानी शुरू कर दी गई, जिन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर था। विभाग की रिपोर्ट में भी सह बीमारियों से पीड़ित मरीजों के अलावा 60 साल से अधिक उम्र वाले मरीजों की कोरोनावायरस की वैक्सीनेशन लगाने की संख्या ज्यादा रही है। जबकि बीते 43 दिनों में कोरोनावायरस के कारण 283 मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से 163 मरीज शुगर और बीपी की बीमारी से पीड़ित थे। हालांकि विभाग की तरफ से रिव्यू मीटिंग में भी शुगर और बीपी के मरीजों को ज्यादा वैक्सीनेशन लगाने की मुहिम को कामयाब बनाने के लिए प्लान तैयार किया गया है लेकिन वह केवल कागजों में ही है।

जिम्मेदारों की 2 नाकामियां

सेहत विभाग : वैक्सीन ड्राइव सफल करने के लिए कोई मोटिवेटर नहीं

सेहत विभाग ने वैक्सीनेशन ड्राइव को सफल बनाने का लंबा चौड़ा खाका कागजों में ही तैयार कर रखा है। प्रशासन ने मोबाइल टीमें गठित कर दफ्तरों में वैक्सीनेशन को कहा है लेकिन सफलता नहीं मिल रही। कारण विभाग के पास मोटिवेटर नहीं हैं। इसके अलावा कैंप भी नहीं लगाए जा रहे और जागरूकता प्रोग्राम भी नहीं चल रहा। इस कारण लोगों को भ्रम है कि वैक्सीन रिएक्शन ही न कर दे।

जिला प्रशासन : मरीजों के लिए नहीं करवाया ब्लॉक स्तर पर कोई सर्वे

पिछले साल सितंबर में कोरोना के सबसे अधिक मामले रिपोर्ट हुए थे। तब सरकार ने जिले में कोमोरबिड मरीजों की संख्या पता करवाने के लिए ब्लॉक स्तर पर सर्वे किया था कि किस एरिया में कितने ऐसे मरीज है लेकिन वैक्सीनेशन ड्राइव में अभी तक ब्लॉक स्तर पर कोई सर्वे नहीं किया गया क्योंकि विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है। इस कारण ड्राइव में शुगर और ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों की संख्या कम है।

वैक्सीनेशन घटने के 2 कारण

कहीं तबीयत खराब ही न हो जाए इसलिए टीका लगवाने से कतरा रहे
वैक्सीनेशन के बाद तबीयत खराब होने, बुखार आदि के कारण लोगों में डर है। वहीं मेडिसन स्पेशलिस्ट डॉ. सुरजीत सिंह का कहना है कि किसी की शुगर और बीपी की दवा चलती है तो बी वैक्सीन से कोई नुकसान नहीं होगा। वायरस से कोरोना से लड़ने की एंटीबॉडी बनती है। वहीं एसएमओ डॉ. अशोक थापर का कहना है कि उनकी बाईपास सर्जरी हुई है। बावजूद इसके वे वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं।

ज्यादा वैक्सीनेशन दिखाने के लिए झूठे ही संक्रमित बता दिए जाते हैं
लोगों की धारणा है कि जिला प्रशासन और सेहत विभाग वैक्सीनेशन का टारगेट पूरा करने के लिए जानबूझ कर कोरोना के संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़ा रहा है। इसे वे कोरोना षड्यंत्र भी कह रहे हैं। यह भी एक बहुत बड़ा कारण है कि लोग वैक्सीनेशन के लिए आगे नहीं आ रहे और घरों में बैठे हैं। यहां तक ऐसे लोगों तक पहुंच भी नहीं की जा रही। दूसरी तरफ डॉक्टर मानते हैं कि वैक्सीनेशन से इम्युनिटी स्ट्रांग बनती है।

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