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सीधी बिजाई के लिए प्रोत्साहित कर रहे किसान:1 किलो चावल के लिए 3700 लीटर पानी की होती है खपत, सीधी बिजाई से बचेगा ग्राउंड वाटर

जालंधरएक महीने पहले
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धान का सीजन भी शुरु होने वाला है जिसे लेकर कृषि विभाग ने अपनी तैयारियां शुरु कर दी है क्योंकि सीधी बिजाई के लिए किसान 1 जून से धान की रोपाई कर सकता है और आम बिजाई (पानी लगाकर ट्रांसप्लांटिंग) के लिए 20 जून का समय निर्धारित किया गया है। लेकिन इस बार जिले में सीधी बिजाई का रकबा पिछली बार के मुकाबले दो गुणा से ज्यादा बढ़ाने पर विचार किया गया है।

पिछले साल पहली बार कोरोना के दौर में जब सारी लेबर यूपी-बिहार चली गई थी तो किसानों ने आपदा को अवसर में बदलते हुए मौके का फायदा उठाया और सीधी बिजाई से ही काम चलाया था, जिसका परिणाम उन्हें अच्छा मिला है और अब वही किसान अपनी कामयाबी को दूसरों तक पहुंचा रहे है। पिछले साल पूरे जिले में 4.24 लाख एकड़जमीन पर धान की खेती की गई थी, जिसमें पहली बार 42 हजार एकड़ पर धान की सीधी बिजाई हुई थी।

कृषि विभाग की तरफ से इस बार जिले में 1 लाख एकड़ से ज्यादा की जमीन पर सीधी खेती का टार्गेट रखा गया है, जिसके लिए सैकड़ों किसान तैयार है।

एक्सपर्ट व्यू : कृषि अधिकारी व कृषि एक्सपर्ट डॉ. नरेश गुलाटी ने बताया कि पीआर 126, 1509 किस्म के बीज को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है जो कम समय में तैयार होता है। बीज को ज्यादा गहराई पर नहीं बीजना चाहिए और बिजाई से पहले एक बार पानी लगाना बेहद जरूरी है और बिजाई के बाद पहला पानी 21 दिन बाद लगाना चाहिए।

सक्सेस स्टोरी के पंफलेट बनाकर बांटे जा रहे...किसानों को मोटिवेट कर रहे किसान : पिछले साल जिन किसानों ने सीधी बिजाई से धान की पैदावार की थी उनकी सक्सेस स्टोरी और उनके जो विचार है उन्हें दूसरे किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग किसानों का सहारा ले रही है। जिसके लिए किसानों की किसानों से मुलाकात करवाई जा रही है और ऑनलाइन भी उनके विचार शेयर करवाए जा रहे है।

किसानों की सक्सेस स्टोरी को पंफलेट बनाकर बांटा जा रहा है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल भी 1 किले के पीछे 10-15 फीसदी पानी की बचत हुई थी। क्योंकि 1 किलो चावल के लिए 3700 लीटर पानी की खपत होती है। लेकिन सीधी बिजाई से पानी की बचत की जा सकती है जो अब समय की मुख्य जरूरत भी है।

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