पंजाब भाजपा को ऑक्सीजन दे सकते हैं कैप्टन:52 साल के सियासी अनुभव और साढ़े 9 साल CM रहे चुके हैं अमरिंदर, शर्त रहेगी कि वे केंद्रीय कृषि कानून वापस करवाएं

जालंधर22 दिन पहले
गन्ने की कीमत बढ़ाने पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कैप्टन को लड्‌डू खिलाया था। -फाइल फोटो

अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह BJP में शामिल होते हैं तो भाजपा को बड़ा चुनावी चेहरा मिल जाएगा। कृषि कानूनों के विरोध की वजह से पंजाब में भाजपा हाशिए पर है। उसके पास ऐसा कोई बड़ा चेहरा भी नहीं, जो शहरों से लेकर गांव तक चर्चित हो। कैप्टन ने 52 साल की राजनीति पंजाब में की है। करीब साढ़े 9 साल मुख्यमंत्री रहे। कैप्टन पंजाब में भाजपा के लिए सियासी खेवनहार बन सकते हैं। हालांकि इसमें यह शर्त रहेगी कि वे केंद्रीय कृषि कानून वापस करवाएं। पिछले कुछ दिनों से पंजाब से लेकर हरियाणा और केंद्र तक में भाजपा नेता कैप्टन की तारीफ कर रहे हैं।

किसान आंदोलन में कैप्टन ने की पूरी मदद, किसान नेता लड्‌डू खिला चुके
सियासी तौर पर कुछ भी आरोप हों, लेकिन किसान आंदोलन में कैप्टन अमरिंदर सिंह की भूमिका से किसान नाराज नहीं हैं। कैप्टन ने कानून के विरोध में पंजाब में आंदोलन को बढ़ने दिया। कोई सख्ती नहीं की। जब किसानों ने दिल्ली बॉर्डर कूच किया तो कोई रोक-टोक नहीं की। केंद्र सरकार के कहने के बावजूद किसानों को नहीं रोका। हरियाणा में मनोहर लाल खट्‌टर सरकार ने रोका तो कैप्टन ने आक्रामक रुख दिखाया। किसानों के साथ कैप्टन की जुगलबंदी भी देखने को मिल चुकी है। गन्ने की कीमतें बढ़ाने के फैसले के बाद किसान नेता बलबीर राजेवाल और मनजीत राय ने खुद कैप्टन को लड्‌डू खिलाया।

कुछ भी हो फायदा BJP को ही
किसानों को खुश करना कैप्टन के लिए मुश्किल नहीं है। वो भाजपा में जाकर कृषि सुधार कानून वापस करवा सकते हैं। ऐसा नहीं तो फिर BJP में शामिल होने की यह शर्त रख सकते हैं। दोनों में से जो भी मानी जाए, सियासी दबदबा कैप्टन का ही बढ़ेगा। बड़ी बात यह है कि केंद्रीय कृषि कानून वापस लेकर BJP पंजाब में सियासी जमीन मजबूत नहीं कर सकती। मगर, अगर चेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह हों तो पंजाब में भाजपा बड़ी भूमिका में आनी तय है। भाजपा को सिर्फ अपने संगठन की ही बलि देनी पड़ेगी। जिसमें कहा जा सकता है कि सही ढंग से फीडबैक नहीं दिया गया।

अकाली दल के अलग होने के बाद कमजोर पड़ चुकी भाजपा
पंजाब में भाजपा अब तक अकाली दल के साथ गठजोड़ कर लड़ती रही। इस बार हालात अलग हैं। कृषि कानून के मुद्दे पर अकाली दल गठजोड़ तोड़ चुका है। भाजपा अब कमजोर पड़ चुकी है। भाजपा का बड़ा आधार शहरों में है, लेकिन वहां भी लोग कृषि कानूनों को लेकर किसानों के साथ हैं। वहीं, गांवों में भाजपा नेताओं को घुसने नहीं दिया जा रहा। शहर में उनकी बैठक पुलिस सुरक्षा में हो रही हैं। पंजाब भाजपा के पास ऐसा कोई बड़ा सिख चेहरा नहीं है, जो पंजाब में भाजपा राज की उम्मीद जगा सके। कैप्टन अमरिंदर सिंह आए तो भाजपा को बड़ा फायदा मिलेगा

अकेले नहीं आएंगे कैप्टन, संगठन को मिलेगी ताकत
कैप्टन को नवजोत सिद्धू ग्रुप ने जिस तरीके से सत्ता से हटाया, उससे अमरिंदर भी खामोश नहीं रहेंगे। कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ी तो एक बड़ा ग्रुप उनके साथ टूटकर आएगा। ऐसे में भाजपा संगठनात्मक तौर पर भी मजबूत होगी। भाजपा को पंजाब के प्रमुख जिलों या शहरों में बड़े चेहरे मिल सकते हैं। सिद्धू ग्रुप ने कैप्टन खेमे के एक बड़े तबके को किनारे लगा दिया है। कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ी तो एक बड़ा ग्रुप साथ लेकर आएंगे। कुछ दिन पहले कैप्टन के एक सलाहकार ने कैप्टन फॉर 2022 लिखकर नई चर्चा छेड़ दी थी।

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