कोरोना अपडेट:26 साल की 2 गर्भवतियों समेत 7 की मौत

जालंधर6 महीने पहलेलेखक: प्रभमीत सिंह
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ये आंसू जिगर के टुकड़े के लिए निकले हैं... सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर ऑटो में लेटा 22 वर्षीय नीरज और उसे अस्पताल में दाखिल न करने पर रोती हुई उसकी मां नीलम। - Dainik Bhaskar
ये आंसू जिगर के टुकड़े के लिए निकले हैं... सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर ऑटो में लेटा 22 वर्षीय नीरज और उसे अस्पताल में दाखिल न करने पर रोती हुई उसकी मां नीलम।
  • कल से 18+ को भी प्राइवेट अस्पतालों में लगेगी वैक्सीन, पैसे देने होंगे

जिले में कोरोना के 536 मामले आए हैं, जिनमें से 479 जिले के आंकड़े में दर्ज किए गए हैं जबकि बाहरी जिलों में रहने वाले हैं। वहीं 7 मरीजों की मौत हो गई। वहीं, वीरवार को दम तोड़ने वालों में 26 साल की 2 गर्भवतियां भी थीं, जिनके पेट में 6 माह के बच्चे पल रहे थे। हालात यह हो गए हैं कि सिविल अस्पताल में मरीज दाखिल करने में काफी दिक्कतें सामने आने लगी हैं।

इमरजेंसी में दोपहर 1:24 पर पहुंचे हरदयाल नगर के रहने वाले 22 साल के नीरज को अस्पताल स्टाफ ने दाखिल करने से मना कर दिया। कारण- सभी वार्ड फुल हैं और अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी बताई गई। स्टाफ ने परिजनों से साफ कह दिया कि मरीज को कहीं और ले जाएं। युवक की मां नीलम ने बताया कि बेटे को वे पहले दो अस्पतालों में लेकर गए लेकिन वहां से सिविल ले जाने के लिए कह दिया गया। परिवार के गुजारिश करने के बाद मरीज को अस्पताल में दाखिल किया गया।

उधर, एक मई से 18+ उम्र के लोगों को वैक्सीनेशन लगनी शुरू होगी। इसके चलते सेहत विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों को 30 अप्रैल को जिला सेंटर स्टोर में बची हुई वैक्सीन जमा करवाने के िलए कहा है। सेहत विभाग एक पोर्टल बनाएगा, जिस पर प्राइवेट अस्पताल लाभपात्री की एंट्री कर सकेंगे और पैसे भी लेंगे।

अॉटो में लेटे नीरज की ऑक्सीजन 80, दर्जा-4 कर्मी ने देखा और कहा मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत है

जिला प्रशासन ने सिविल अस्पताल को टेकओवर कर रखा है। ऑक्सीजन, बेडों की संख्या की रिपोर्ट दिन में तीन समय जा रही है पर हकीकत यह है कि सिविल में कोविड इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर्स मरीज को देख ही नहीं रहे। वीरवार को 22 साल के नीरज को अस्पताल लाया गया तो परिवार इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर के पास गया। बताया कि मरीज का ऑक्सीजन लेवल 80 और कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने इमरजेंसी में मरीज को दाखिल नहीं किया कि बेड और ऑक्सीजन नहीं है। ऑटो में मरीज को डॉक्टर की बजाय दर्जा-4 कर्मचारी ने देखा और कहा- वेंटिलेटर की जरूरत है, कहीं और ले जाएं। दर्जा-4 कर्मचारी डॉक्टर की ड्यूटी तो निभा रहे हैं पर इमरजेंसी में मरीज को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट करने के लिए कोई दर्जा-4 कर्मचारी नहीं था।

सांस लेने में दिक्कत और छाती में इंफेक्शन बढ़ने से हुआ हार्ट अटैक

वीरवार को जिन दो गर्भवतियों की मौत हुई है, उनमें से एक न्यू ग्रीन मॉडल टाउन और दूसरी बस्ती गुजां की रहने वाली थी। न्यू ग्रीन मॉडल टाउन की महिला के पेट और छाती में ज्यादा इंफेक्शन होने के बाद शरीर में खून के थक्के बन गए थे। इसके बाद महिला की हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। बस्ती गुजां की गर्भवती के शरीर में इंफेक्शन बढ़ने के कारण सांस लेने में दिक्कत हुई और अस्पताल में दाखिल होने के एक दिन बाद ही मौत हो गई। इसके अलावा वीरवार को 67-67 साल के दो, 66, 70 और 83 साल के मरीजों ने दम तोड़ दिया।

5 मिनट बंद रहा ऑक्सीजन प्लांट

सिविल में वीरवार को बड़ा हादसा होने से टल गया। दोपहर करीब एक बजे अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट अचानक बंद हो गया लेकिन ऑक्सीजन बैकअप होने के कारण किसी की मरीज की जान पर नहीं बनी। हालांकि प्लांट बंद होने के 5 मिनट में ही डॉक्टर और प्लांट के लिए लगाया गया तकनीकी स्टाफ पहुंच गया। इसके बाद प्लांट चलाया गया। नोडल अफसर एडीसी विशेष सारंगल ने अस्पताल के एसएमओ इंचार्ज डॉ. गुरमीत लाल से 24 घंटे में जवाब तलब किया है कि प्लांट बंद होने का कारण और जिस समय प्लांट बंद हुआ, तब अस्पताल मौके पर मौजूद स्टाफ कहां था।

प्राइवेट अस्पताल दिल्ली के मरीजों को दाखिल कर रहे, पर टॉसिलिजुमैब और रेमडेसिविर नहीं मिल रहे

शहर के प्राइवेट अस्पतालों में 25% मरीज दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल के दाखिल हैं लेकिन वे जिले के दूसरे अस्पतालों से आने वाले मरीजों को लेने से इनकार कर रहे हैं। डॉक्टर परिजनों को रेमडेसिविर और टॉसिलिजुमैब इंजेक्शन लाने के लिए कभी सिविल अस्पताल तो कभी ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी के दफ्तर भेज रहे हैं। मरीज के परिजनों ने जेडएलए लखवंत सिंह को फोन किया तो उन्होंने कहा स्टॉक नहीं है। प्राइवेट अस्पताल में दाखिल 29 साल के युवक को डॉक्टर ने जेडएलए से रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने के लिए कहा तो जेडएलए ने फोन ही नहीं उठाया। जेडएलए का कहना है कि मार्केट में जितना स्टाक आ रहा है, सारा अस्पताल को दिया जा रहा है।

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