भास्कर एक्सक्लूसिव:सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के सी-ब्लाक के 500 गज के 8 प्लॉट बिना ड्रॉ निकाले बेच दिए

जालंधर2 दिन पहलेलेखक: प्रवीण पर्व
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सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के सी ब्लाक में 500 वर्ग गज साइज के करीब 12 करोड़ कीमत के 8 प्लाॅटों की फाइलें भी जांच के घेरे में हैं। - Dainik Bhaskar
सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के सी ब्लाक में 500 वर्ग गज साइज के करीब 12 करोड़ कीमत के 8 प्लाॅटों की फाइलें भी जांच के घेरे में हैं।

सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के सी ब्लाक में 500 वर्ग गज साइज के करीब 12 करोड़ कीमत के 8 प्लाॅटों की फाइलें भी जांच के घेरे में हैं। सभी प्लाॅटों की लोकेशन सूर्या एनक्लेव से सटी हुई है। जो प्लाॅट 2011 में 85 लाख के करीब कीमत में बिके थे, उन्हें 25-30 लाख में सेल किया गया है। एक तो प्लाॅट एलडीपी कोटे को आधार बनाकर बेचे थे, उसके अलावा वे प्लाॅट भी जांच में शामिल हैं, जिन्हें चंडीगढ़ से मंजूरी लिए बगैर डायरेक्ट सेल किया गया है। वहीं, नए हफ्ते में बुधवार तक दो दर्जन के करीब फाइलों की जांच फाइनल हो जाएगी।

इसके बाद ट्रस्ट के अलग-अलग ब्रांचों के मुलाजिमों, अफसरों की संलिप्तता की जांच होगी। सस्पेंड हुए ईओ परमिंदर सिंह, सी. सहायक अजय मल्होत्रा, जूनि. सहायक अनुज राय तथा लेखाकार आशीष कुमार की चार्जशीट भी एक हफ्ते में फाइनल होगी। इसके बाद वह रकम भी कंपाइल हो सामने आएगी, जिसका लाभ प्लाॅटों के खरीदारों को दिया गया है। इस संबंध में लोकल बॉडीज विभाग के चीफ विजिलेंस अफसर एवं जेआईटी में प्लॉट घोेटालों के इनवेस्टिगेशन अफसर राजीव सेखड़ी ने कहा कि फाइलों की इंस्पेक्शन जारी है। अभी कोई स्टेटमेंट नहीं दे सकते।

8 प्लाॅटों में 5 करोड़ से ज्यादा का चूना
उधर, जांच के दौरान जो फाइलें विजिलेंस ने अपने कब्जे में ले ली थीं, उनमें नई प्रकार की गड़बड़ियों की जानकारी सामने आ रही है। सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के उक्त 8 प्लाॅटों में 5 करोड़ से ज्यादा का चूना लगा है। वहीं, जांच के घेरे में वे 120 फाइलें भी आ सकती हैं, जिन्हें ईओ परमिंदर सिंह ने लापता बताया था, लेकिन फिर अचानक ट्रस्ट की अलमीरा से निकलने लगी हैं। इन फाइलों में लगे दस्तावेज पूरे हैं या फिर कोई छेड़छाड़ हुई थी, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

इन तीन प्लाॅटों से समझें, घोटाले किस तरह किया

प्लॉट दोबारा बेचने का प्रपंच
सूर्या एनक्लेव में 24 लाख में खरीदे प्लॉट का मालिक को कब्जा नहीं दिया। उपभोक्ता फोरम में उसने कीमत वापस मांगी। ट्रस्ट के अफसरों ने कब्जा देने की बजाय पैसे लौटा दिए और प्लॉट दूसरे शख्स को मनमर्जी के रेट पर बेच दिया। ट्रस्ट को दोहरा नुकसान हुआ। पहला- 24 लाख लौटाने पड़े। दूसरा- प्लाॅट की दोबारा सेल सस्ते में की गई है।

प्लाॅट ही बदल दिया
सिटी रेलवे स्टेशन का दूसरा एंट्री गेट सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन में निकालने की योजना फाइनल हुई तो प्लाॅट व्यापारिक तौर पर महत्वपूर्ण हो गया। ऐसे में नई सड़क की खातिर कुछ प्लाॅटों की लोकेशन बदलनी थी, यहां भी गड़बड़ी हुई। प्राइम लोकेशन की जगह लोगों को अन्य साइट ऑफर की गई। प्राइम लोकेशन वाली साइट रीसेल कर दीं।

बगैर लैंड इनहांसमेंट रीसेल
ट्रस्ट की कई काॅलोनियों की लैंड इनहांसमेंट की रकम प्लाॅट मालिकों से ली जाती है। इनकी जमीन देने वाले किसानों अदालत में गए कि उन्हें कम कीमत दी गई है। किसान केस जीत गए थे। अब प्लाॅट की रीसेल तभी हो सकती है, जब लैंड इनहांसमेंट की रकम जमा हो। कई प्लाॅटों में यह रकम वसूली ही नहीं गई है। ऐसे प्लाॅट जांच में घिरेंगे।

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