निगम चुनाव से पहले भाजपा में रार:नहीं मान रहे भाजयुमो नेता और कार्यकर्ता, मांग- हेनरी का माफीनामा सार्वजनिक हो

जालंधर5 महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब में नगर निगम चुनाव को देखते हुए बेशक भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए उनको मनाने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन हेनरी के साथ शहरी प्रधान और चुनाव नतीजों के दिन पीटने वाले नेता का समझौता आड़े आ रहा है।

पार्टी नेताओं ने पूर्व विधायकों से लेकर सभी कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए उनके साथ बैठकें कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि पार्टी के शहरी प्रधान और नतीजों वाले दिन पीटने वाले किशन लाल ने पूर्व मंत्री अवतार हेनरी के साथ उन्हीं के घर में समझौता करके पार्टी की साख को खराब किया है।

समझौता ही करना था तो बवाल क्यों

पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समझौता ही करना था तो फिर इतना ज्यादा बवाल करने की क्या जरूरत थी। क्यों पार्टी के कार्यकर्ताओं को सीपी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठाया था। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमला किशन लाल पर नहीं, बल्कि पार्टी की शान पर किया था। एक तरह से यह सीधा-सीधा पार्टी पर हमला था, लेकिन शहरी प्रधान सुशील शर्मा औऱ किशन लाल शर्मा चुपचाप हमला करवाने वालों के घर में जाकर सरेंडर कर आए। इससे उन्हें धक्का पहुंचा है। पार्टी की साख को भी धक्का लगा है। अब किस मुंह के साथ लोगों के बीच में जाएंगे।

फाइल वीडियो
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कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई थी

भाजपा के पूर्व विधायक केडी भंडारी ने भी पिछले दिनों भारतीय युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए बैठक बुलाई थी। उसमें उन्हें सभी बातों को छोड़कर पार्टी के लिए काम करने के लिए कहा गया, लेकिन कार्यकर्ता मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि पहले दोनों यह साफ करें कि उन्होंने किस के दबाव में आकर समझौता किया। यदि समझौता ही करना था तो उसका भी एक तरीका होता। जिस तरह से दोनों ने समझौता किय़ा है, इसे समझौता नहीं, आत्मसमर्पण कहते हैं। हमला करने वालों के घर में जाकर समझौता करना आत्मसमर्पण की श्रेणी में आता है।

भाजपा के युवा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि समझौता ही करना था तो वह पूर्व मंत्री को भाजपा कार्यालय में बुलाते और बैठक करते तो यह मैसेज जाता कि कांग्रेसियों को अपनी गलती का अहसास हुआ है। यदि शहरी प्रधान सुशील शर्मा और पीटने वाले नेता किशन लाल शर्मा ने गुपचुप समझौता कर ही लिया था तो उसे गुप्त रखने की बजाय कांग्रेसियों के माफीनामे को सार्वजनिक करते। अब यह कैसे पता चलेगा कि माफी पूर्व मंत्री हेनरी और उनके कार्यकर्ताओं ने मांगी है या फिर यह दोनों माफी मांग कर आए हैं।

बहरहाल, विधानसभा चुनाव में सभी सीटें हारकर गहरी चोट खाने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी के जालंधर में हालात ठीक नहीं हैं। नगर निगम चुनाव सिर पर हैं और भाजपा में बिखराव इस मिथक को भी क्षति पहुंचा सकता है कि पार्टी की शहरी क्षेत्रों में पैठ है। एक तो वैसे ही भाजपा पंजाब में हाशिये पर चल रही है, ऊपर से जो लोग जुड़े हुए हैं, उनके टूटने से पार्टी काे खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है।