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वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे पर विशेष:केवल बेहोश नहीं करते, बल्कि वेंटिलेटर पर दाखिल मरीज की ऑक्सीजन को कंट्रोल और देखभाल भी करते हैं एनेस्थीसियोलॉजिस्ट

जालंधर9 दिन पहले
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डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. गुरजीत कौर, डॉ. अर्चना, डॉ. कमलेश, डॉ. अनूप, डॉ. नीलकांत भगत, डॉ. पीयूष, डॉ. नगीना और डॉ. सचिन।
  • एनेस्थीसियोलॉजिस्ट ने लेवल-3 के गंभीर मरीजों की जान बचाकर बनाई अलग पहचान

कोरोनावायरस के गंभीर मरीजों की बात करें तो उनके स्वस्थ होने के पीछे एनेस्थीसिया के डॉक्टरों का विशेष योगदान रहा है। सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनदीप सिंह मांगट भी एमडी एनेस्थीसियोलॉजिस्ट हैं, जो खुद मरीजों की देखरेख कर रहीं थीं। आम को तो कोरोनावायरस से पहले एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के बारे में ज्यादा पता ही नहीं था। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट को केवल बेहोशी के डॉक्टरों के तौर पर ही जाना जाता था, लेकिन कोरोनावायरस के गंभीर मरीजों और वेंटिलेटर पर दाखिल मरीजों की जान बचाने के बाद इनकी अलग पहचान बनी।

सिविल अस्पताल के कोरोनावायरस के गंभीर 200 से अधिक मरीजों को आईसीयू में रखा गया था, जिनमें से 70 फीसदी से अधिक मरीजों की जान बचाई गई है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स की संख्या कम होने के कारण सेहत विभाग ने सीएचसी और अन्य सेंटरों से सिविल अस्पताल में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट को तैनात किया, जिन्होंने कई गंभीर मरीजों की जान भी बचाई है।

आईसीयू में दाखिल मरीजों की करते हैं क्लीनिकल केयर, मॉनिटरिंग भी करते हैं माहिर डॉक्टर

सिविल अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. परमजीत सिंह का कहना है कि एनेस्थीसिया के डॉक्टर केवल मरीज को सर्जरी या किसी ऑप्रेशन से करने से पहले बेहोश करने वाले डॉक्टर ही नहीं होते। एनेस्थीसिया के 4 श्रेणियों के डॉक्टर होते हैं। पहले जनरल जिनमें सर्जरी और प्रोसीजर, दूसरा मोनिटर्ड जिन्हें सिडेशन और लोकल एनेस्थेटिक भी कहते हैं। तीसरा एनेस्थीसिया केयर डॉक्टर। इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर आईसीयू में दाखिल मरीजों की क्लीनिकल केयर का भी खासतौर पर ध्यान रखते हैं। वह मरीज के वेंटिलेटर पर दाखिल होने के बाद तय करते हैं मरीज की ऑक्सीजन और वेंटिलेशन किस प्रकार स्थिर रखनी है और उसे रिकवरी मोड पर कैसे लेकर आना है।

कोरोनाकाल के दौरान जिला प्रशासन की तरफ से सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर पर मरीज डालने से पहले एचएफएनओ मशीन को लगाया गया। इस मशीन के मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के खासतौर पर एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स को तैनात किया गया। वहीं सिविल अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक जब अन्य प्राइवेट अस्पतालों और घरों से लेट मरीज इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल में पहुंच रहे थे। उस समय में सिविल अस्पताल की एनेस्थीसिया विभाग की डॉक्टरों की टीम की तरफ से 50 में 40 मरीजों की जान एचएफएनओ मशीन के जरिए जान बचाई गई है।

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