भास्कर एक्सक्लूसिव:गर्मी बढ़ते ही बिजली मीटर भी गर्म, खराब होने के मामले 1.15 लाख तक पहुंचे

जालंधर3 महीने पहलेलेखक: सुरिंदर सिंह
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अत्यधिक गर्मी के कारण बिजली के मीटर भी हांफ रहे हैं। सीजन में गर्मी बढ़ते ही लोगों के घरों के बाहर लगे मीटर खराब होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। एक अप्रैल से 10 मई तक यानी 40 दिन में ही मीटर बदलने की अर्जियों की संख्या 1.15 लाख तक पहुंच गई हैं। इनमें बाॅर्डर जोन से करीब 35 हजार, दक्षिण से 30 हजार, उत्तरी जोन से 16 हजार आवेदन शामिल हैं। दिक्कत यह भी है कि पावरकाॅम बिजली फाल्टों के बढ़े वर्कलोड के बीच समय पर मीटर फिट नहीं कर पा रहा है।

वहीं, वे उपभोेक्ता भी परेशानी झेल रहे हैं जिनके एवरेज बिल आ रहे हैं, जिन्हें ठीक करवाने के लिए वे पावरकाॅम के दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं। मान लीजिए कि किसी का मीटर मई में खराब हुआ है तो उसके घर की बिजली खपत पिछले साल के मई महीने की नोट करके बिल बनेगा। अगर आपकी खपत उस समय ज्यादा थी तो इस बार कम बिजली खपत करके भी उसका बिल देना पड़ेगा। कइयों के बिल अगर उस महीने गलत बने थे तो इस बार अलग से अर्जी देकर नया बिल बनवाना पड़ेगा। इसका पावरकाॅम काे भी नुकसान है। जिन मामलों में उपभोक्ता की खपत पिछले साल कम थी, वे ज्यादा बिजली फूंकेंगे तो भी उनका बिल पुराने के हिसाब से कम ही आएगा।

मीटर खराब होने का पावरकाॅम को भी घाटा, सटीक बिजली बिलिंग न होने से हो रहा नुकसान

42 डिग्री में मीटर की माइक्रो चिप हो रही खराब
पावरकाॅम के जानकार बताते हैं कि पंजाब में बिजली के 72,29,184 कनेक्शन हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में पावरकाॅम ने 3,09,719 नए कनेक्शन दिए। इस तरह अलग-अलग कैटेगरी के कनेक्शनों के अलावा करीब 2 लाख मीटर खराबी इत्यादि पर बदले गए थे। इस बार वित्तीय वर्ष की शुरुआत के 40 दिन में एक लाख से ज्यादा नए मीटर की डिमांड आ गई है। बिजली मामलों के एक्सपर्ट इंजीनियर आरके चौधरी कहते हैं कि मीटर इलेक्ट्राॅनिक चिप से संचालित होते हैं। इनमें भी माइक्रो सर्किट हैं। घरों की दीवारों पर लगे मीटर जब कई घंटे 42 डिग्री की गर्मी में होते हैं तो इनमें खराबी आना संभव है। इसलिए आवेदन 1.15 लाख संख्या पहुंच गए।

वहीं, दिक्कत यह भी है कि पावरकाॅम का जो स्टाफ बिजली की खराबी दूर करता है, उसी की ड्यूटी नए मीटर लगाने की भी है। गर्मी में जब फाॅल्ट के मामले बढ़े हैं तो स्टाफ के पास मीटर इंस्टालेशन का समय नहीं बचता। इससे देरी होती है। मीटर लेबोरेटरी के जारी करवाने, टेस्ट कराने आदि में एक हफ्ता लग जाता है।

ओवरलोडिंग भी मीटर जलने का कारण:राय
पावरकाॅम से रिटायर्ड इंजीनियर जसवंत राय ने बताया कि गर्मी ज्यादा होने के कारण एसी-कूलर आदि का इस्तेमाल बढ़ गया है। ज्यादा लोड के कारण मीटर जल जाते हैं। ऐसे में अगर मीटर उपलब्ध नहीं है तो पावरकाॅम को करोड़ों का नुकसान केवल बिलों के कारण हो रहा है। पावरकाॅम को एक मीटर करीब 300 रुपए में पड़ता है। इस सीजन के दौरान जो खपत नोट करके एवरेज बिल उपभोक्ता को भेजे जा रहे हैं, वह पिछली खपत के हिसाब से ही भेजे जा रहे हैं।

दूसरी तरफ पावरकाम के जानकार बताते हैं कि मीटर फिट करने में पेंडेंसी इसलिए दूर नहीं हो रही, क्योंकि जितने मीटर फिट होते हैं, उससे ज्यादा खराब हो जाते हैं। नाॅर्थ जोन के स्टोर में 5000 नए मीटर की सप्लाई आई है। जबकि मीटर लेबोरेटरी में उन घरों के लिए मीटर उपलब्ध हैं, जो सोलर पैनल लगाना चाहते हैं।

चीफ इंजीनियर का दावा

नए मीटर्स की सप्लाई शुरू, जल्द दूर होगी पेंडेंसी:दानिया
चीफ इंजीनियर जैनिंदर दानिया ने कहा कि खराब हुए मीटरों को बदलने के काम में तेजी लाने के लिए आदेश दिए गए हैं। मीटरों की कमी दूर की जा रही है। नई सप्लाई शुरू कर दी गई है। पेंडेंसी प्राथमिकता के आधार पर दूर की जाएगी। इस बार गर्मी समय से पहले आई है, जिस कारण मीटर जलने तथा बिजली सिस्टम में खराबी के मामले हल करने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है।

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