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पॉलिटिक्स:भाटिया की मीठी गोली और तीखा विरोध- चंदन बड़े भाई, पर हलका इंचार्ज लगाना गलत फैसला, पार्टी को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया

जालंधरएक वर्ष पहले
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  • ग्रेवाल को सेंट्रल सीट पर मिली ओहदेदारी से नाराजगी, जिला प्रधान मन्नन बोले- भाटिया पुराने साथी, अच्छी जगह एडजस्ट करेंगे

शिरोमणि अकाली दल ने एक दिन पहले चंदन ग्रेवाल को सेंट्रल विधानसभा सीट का हलका इंचार्ज नियुक्त किया तो पार्टी उपाध्यक्ष व पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया खुलकर विरोध में आए हैं। उनका कहना है कि चंदन उनके बड़े भाई सम्मान हैं और उनका विरोध नहीं कर रहे। सिर्फ पार्टी के इस गलत फैसले का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे लंबे समय से सेंट्रल विधानसभा सीट पर काम कर रहे हैं और 36 साल से पार्टी के साथ जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि बसपा से गठबंधन के बाद तीन रिजर्व सीटें बसपा के पास हैं। केंद्र की सीट जनरल है, जिस पर रिजर्व को हलका इंचार्ज लगाना गलत है और इससे पार्टी का नुकसान होगा। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारी अपने समर्थकों के साथ फैसला लिया है कि अगर पार्टी हाईकमान 10 दिन में अपने फैसले पर पुनर्विचार कर फैसला नहीं बदलती तो वे जनता की कचहरी में जाएंगे।

वे सेंट्रल हलके से ही चुनाव लड़ने के इच्छुक है और यहीं पर काम करेंगे। इस मौके उनके साथ हिंदू संगठन, व्यापारिक संगठन, श्री गुरु रविदास मंदिर कमेटियों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बारे जिला शहरी प्रधान कुलवंत सिंह मन्नण ने कहा कि मामला पार्टी हाईकमान के ध्यान में है, जिसे जल्द सुलझा जाएगा। भाटिया अच्छी जगह एडजस्ट होंगे, क्योंकि वे पार्टी के पुराने साथी हैं।

एससी वोटर लुभाने के लिए सेंट्रल में चंदन
चंदन ग्रेवाल पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन के पंजाब प्रधान व अकाली दल के उप-प्रधान भी हैं। जालंधर सेंट्रल सीट पर हमेशा ही हिंदू कैंडिडेट जीतता रहा है, लेकिन अकाली दल ने चंदन को हलका इंचार्ज लगाकर दलित और हिंदू चेहरे पर दांव खेला है, क्योंकि इस सीट पर एक बड़ा दलित वोट बैंक भी है और चंदन को टिकट देने के बाद सभी विधानसभा सीटों पर दलित वोट बैंक पार्टी के साथ जुड़ेगा।

हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव में चंदन आप से चुनाव लड़े और हार गए थे। दूसरी तरफ भाटिया लगातार 4 बार निगम चुनाव जीते और 2 बार सीनियर डिप्टी मेयर रहे। वर्तमान में उनकी पत्नी जसपाल कौर उसी वार्ड में पार्षद हैं यानी 25 साल से वार्ड में भाटिया दंपति ही जीत रहे हैं।

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