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जालंधर में इंसानियत शर्मसार:1,800 रुपए का बिल न चुकाने पर चैरिटेबल अस्पताल ने मजदूर को नहीं दी 12 वर्षीय बेटी की लाश , बुखार से हुई थी मौत

जालंधर19 दिन पहले
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विरोध के बाद शनिवार रात को परिवार को लाश सौंपते अस्पताल के कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
विरोध के बाद शनिवार रात को परिवार को लाश सौंपते अस्पताल के कर्मचारी।

जालंधर में एक चैरिटेबल अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्रवासी मजदूर के पास 1800 रुपए नहीं थे तो अस्पताल ने उसकी 12 साल की बेटी की लाश नहीं दी। मजबूर पिता अस्पताल के बाहर भटकता रहा। बाद में वहां रिश्तेदार से मिलने पहुंचे लोक इंसाफ पार्टी के नेताओं ने विरोध किया तो फिर बिना रुपए के ही लाश दे दी गई। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मामला रात को ही सुलझा लिया गया था।

लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान जसबीर बग्गा के साथ मामले की जानकारी देता पिता।
लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान जसबीर बग्गा के साथ मामले की जानकारी देता पिता।

पिता का आरोप, मुझे कहा गया, दवाईयों के बकाया रुपए जमा कराने के बाद ही मिलेगी लाश

मोहल्ला करार खां के रहने वाले प्रवासी मजदूर विजय की बेटी दिशा की तबियत खराब हो गई थी। बुखार होने पर पहले वो बाहर इलाज करवाते रहे। जब तबियत बिगड़ी तो उन्होंने उसे इस चैरिटेबल अस्पताल में भर्ती कर दिया। शुक्रवार को भर्ती करवाने के बाद शनिवार शाम को बेटी दिशा की मौत हो गई। इसके बाद विजय का करीब साढ़े 7 हजार का बिल बना। जो उसने जमा करवा दिया। इसके बाद वो बेटी की मौत के बाद लाश लेने गया तो उसे कहा गया कि 1800 रुपए दवाईयों के बकाया रहते हैं। पहले वो जमा कराओ, फिर लाश मिलेगी।

लोक इंसाफ पार्टी की मदद से मिली लाश, मजबूरों को परेशान करने वालों पर हो एक्शन

लोक इंसाफ पार्टी के जिला प्रधान जसबीर बग्गा ने बताया कि वह रिश्तेदार से मिलने पहुंचे तो विजय उनसे मिला। जब उसने पूरी बात बताई तो वो अस्पताल वालों से मिले। पहले उन्होंने कोई बात नहीं सुनी। जब उन्होंने विरोध जताया तो फिर बिना रुपए लिए डेड बॉडी दे दी गई। बग्गा ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूर ने 1300 रुपए का भी इंतजाम कर लिया था लेकिन पूरे रुपए लाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल चैरिटेबल है और NRI व पंजाब सरकार से इन्हें इतनी मदद मिलती है तो इस तरह गरीब व मजबूर लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार व जिला प्रशासन को ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।