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गूंजीं किलकारियां:पिम्स से 630 ग्राम, 680 और 890 ग्राम के बच्चे स्वस्थ हो घर लौटे, अगस्त में जालंधर की अंजू ने दो और होशियारपुर की रश्पाल कौर ने दिया था एक प्री-मेच्योर बेबी को जन्म

जालंधरएक महीने पहले
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  • थैंक्यू डाॅक्टर आपकी बदौलत बच्चे हमारी गोद में हैं

पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (पिम्स) में तीन ऐसे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हुए हैं, जिनका जन्म के समय वजन 1 किलो से भी कम था। पिम्स में पैदा हुए तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। वहीं, पिम्स के बच्चों के विभाग के प्रोफेसर डॉ. जतिंदर सिंह ने बताया कि तीनों बच्चों का जन्म अगस्त में हुआ था। स्वस्थ होने पर सोमवार को चेकअप के बाद बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

दो बच्चों को जन्म देने वाली अंजू ने 28 हफ्तों के दो बच्चों को जन्म दिया, जिनका जन्म के वक्त वजन 680 और 890 ग्राम था। जबकि होशियारपुर की रहने वाली रशपाल कौर ने 18 साल बाद 26 हफ्तों की एक बच्ची को जन्म दिया, जिसका जन्म के समय वजन 630 ग्राम था। बता दें तीनों बच्चो की प्री-मेच्योर डिलीवरी हुई है। हालांकि जन्म के वक्त बच्चे का जन्म 2.5 से 4 किलो होता है लेकिन उक्त तीनों बच्चे एक किलो से भी कम थे।

फेफड़े पूरी तरह नहीं थे विकसित, आंखों के पर्दे का भी किया लेजर ऑपरेशन

पिम्स के रेजिडेंट डायरेक्टर अमित सिंह और डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. कुलबीर कौर का कहना है कोरोना काल के दौरान पिम्स अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा की गई मेहनत का नतीजा है कि बच्चे स्वस्थ्य होकर अपने परिवारों के पास हैं। पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रो. डॉ. जतिंदर सिंह ने बताया कि तीनों बच्चों की डिलीवरी प्राइवेट अस्पतालों में हुई थी। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत थी। फेफड़ों के साथ बच्चों की आंतड़ियां भी नहीं बन पाई थीं, जिस कारण बच्चे दूध भी नहीं पचा पा रहे थे।

बता दें बच्चों की आंखों के पीछे वाले पर्दे का लेजर तकनीक के साथ पिम्स में ऑपरेशन किया गया है क्योंकि जन्म के दौरान वो भी पूरी तरह नहीं बन पाया था। निक्कू वार्ड में दाखिल करने के दौरान बच्चों को कई बार खून भी चढ़ाया गया है। प्रो. डॉ. जतिंदर सिंह का कहना है कि बच्चे की प्री-मेच्योर डिलीवरी से बचाव के लिए मां प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर डाइट ले। माॅडर्न लाइफ स्टाइल और जंक फूड त्यागें। गर्भवती को अपना एंटी नेटल चेकअप समय पर करवाना चाहिए।

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