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कोविड-19:कोरोना काल : विदेशों में बासमती की पैदावार में गिरावट से बढ़ेंगे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम

जालंधर6 दिन पहले
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कोरोना काल में आर्थिक संकट झेल रही पंजाब की एग्रो इकॉनामी के लिए उम्मीद की किरण जगी है। इंटरनेशनल स्तर पर इस साल पैदा होने वाली फसलों की मांग की स्टडी में सामने आया है कि बासमती के लिए ये साल मूफीद है। इसकी दो वजह हैं- पहली वजह भारतीय बासमती के दूसरे देशों के मुकाबले कम रेट और दूसरी वजह ओवरऑल घटने वाली विभिन्न फसलों की पैदावार है। इसके बाद पंजाब के खेतीबाड़ी माहिरों ने सरकार को सुझाव दिया है कि पंजाब की बासमती में केमिकल के अधिक इस्तेमाल के आरोप लगते हैं, इस समस्या से पार पाना होगा। इसके लिए अभी जब खेतों में फसल शुरुआती दौर में है और केमिकल का इस्तेमाल शुरू होना ही है।

केमिकल के अंश मिलने से भारतीय बासमती को यूरोप में नहीं मिलती तरजीह

9 तरह के केमिकल का इस्तेमाल बंद कराने की योजना फाइनल की गई है। किसानों को 9 तरह के केमिकल का बासमती पर प्रयोग करने से रोका जाएगा। इसके साथ ही केमिकल विक्रेताओं को हिदायत दी है कि खेतीबाड़ी विभाग की लिस्ट में शामिल 9 केमिकल की बिक्री या खरीदारी न करने के लिए किसानों को जागरूक करें। दरअसल, बासमती की फसल पर फंगस और कीड़े मारने के लिए विभिन्न प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल होता है। जो केमिकल इंटरनेशनल लेवल पर बासमती की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं, उनकी जगह खेती माहिर किसानों को वैकल्पिक केमिकल व तरीके बताएंगे।

भारतीय बासमती की डिमांड अरब, अफ्रीकी, लेटिन, अमेरिकी और यूरोपीय देशों में है। किसानों को कानूनी तौर पर ताकत देने के लिए हमेशा खरीदारी करके बिल लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। बिल लेने से अगर कोई डीलर धोखे से भी 9 केमिकल में से किसी की बिक्री करता है तो कार्रवाई करना आसान होगा।

उधर, पंजाब के खेतीबाड़ी, किसान भलाई विभाग एवं तंदुरूस्त पंजाब विभाग ने कोरोना में बासमती का एक्सपोर्ट बढ़ाने के मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है। विभाग के डायरेक्टर डाॅ. स्वतंत्र कुमार ऐरी के आदेश पर जिला खेतीबाड़ी अधिकारी बासमती उत्पादकों को जागरूक करने के काम में जुट गए हैं। वीडियो कांफ्रेस, वीडियो मीटिंग व सोशल मीडिया ग्रुप के जरिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

जो आदेश नहीं मानेंगे उन पर कार्रवाई होगी...जालंधर के दौरे पर आए डायरेक्टर डॉ. स्वतंत्र कुमार एरी ने कहा कि बासमती के सीजन में अर्जी तौर पर 9 केमिकल पर रोक लगाई गई है। जो विक्रेता आदेश के उल्टा जाकर प्रतिबंधित केमिकल की बिक्री करेंगे, वह विभागीय करवाई के दायरे में आते हैं। खेतीबाड़ी विभाग के माहिर किसानों को वैकल्पिक केमिकल की जानकारी देंगे। विभाग का मकसद बासमती की एक्सपोर्ट में प्रॉब्लम का अंदेशा दूर करना है।
इसलिए एक्टिव है विभाग...
जो बासमती पंजाब पैदा करता है, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा एक्सपोर्ट होता है। पैदावार के बाद चावल की फसल में लैब टेस्ट में केमिकल के अंश मिले थे। इस अंश के कारण फसल रिजेक्ट हो गई थी। अब उन केमिकल पर अर्जी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

इन केमिकल का इस्तेमाल रोकने की तैयारी

  • एसीफेट
  • ट्राइजोफास।
  • थायामिथोकसम।
  • कारबैडाजिम।
  • ट्राइसाईकोलाजल।
  • बुपरोफेजिन।
  • कारबोफीरेयोन।
  • प्रोपीकोनाजोल।
  • थायाफोनेट मिथाइल।

फैक्टशीट

  • पंजाब में बासमती का रकबा : 6 लाख हेक्टेयर।
  • उत्पादन : 40 लाख टन के लगभग।
  • एक्सपोर्ट : उत्पादन का 90%।
  • प्रति क्विंटल औसतन एक्सपोर्ट रेट : 5959 रुपए प्रति क्विटंल।
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