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गंदगी के चालान पर न निगम गंभीर न लोग:निगम ने गंदगी को लेकर 12 माह में काटे 204 चालान सिर्फ 44 यानी 22% ने ही किया जुर्माने का भुगतान

जालंधर8 महीने पहले
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कूड़े को आग लगाने की मनमानी - Dainik Bhaskar
कूड़े को आग लगाने की मनमानी
  • सरकार ने सिटी में यूजर चार्जेज और जुर्माने के नए रेट लागू किए हैं, सख्ती न होने से लोगों में चालान का डर नहीं
  • 100 से 500 और 1000 रुपए के चालान का 78% लोग नहीं करते भुगतान

सरकार ने सिटी में सॉलिड वेस्ट की समस्या खत्म करने से लेकर गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती के लिए यूजर चार्जेज और जुर्माना लगाने के नए रेट जारी कर दिए हैं। इससे सिटी में सफाई के साथ निगम का खजाना भी भरेगा लेकिन नियमों की अवहेलना करने वालों पर सख्ती के लिए निगम प्रशासन चालान के हथियार का पूरे ईमान के साथ इस्तेमाल नहीं कर रहा है।

हालात ऐसे हैं कि बीते एक साल में 12 लाख की आबादी और 80 वार्डों वाले सिटी में निगम प्रशासन सिर्फ 204 चालान काट सका है। जबकि इसमें से सिर्फ 44 लोगों ने जुर्माना राशि का निगम को भुगतान किया। मतलब चालान भुगतने वालों का आंकड़ा महज 22 फीसदी ही है और इससे निगम को एक साल में सिर्फ 44300 रुपए की कमाई हुई।

निगम द्वारा गंदगी फैलाने, गली और सूखा कूड़ा अलग नहीं करने, पब्लिक प्लेस गंदा करने या कूड़ा फेंकने से लेकर कूड़े को आग लगाने के मामले में किए गए 204 चालान का आंकड़ा सितंबर, 2019 से लेकर 31 अगस्त तक की अवधि का है। हालात यह हैं कि 100 से 500 और 1000 रुपए का 78% लोग भुगतान नहीं करते।

कूड़े को आग लगाने की मनमानी

बुधवार दोपहर को लाडोवाली रोड पर सुविधा सेंटर के सामने एक खाली प्लाॅट में रखे ग्रीन बेल्ट को आग लगा दी गई। आग की ऊंची लपटें उठने से आसपास धुआं फैल गया। निगम की टीम को तो पता नहीं, लेकिन प्लाॅट में काम करे रहे श्रमिकों ने भी इसे बुझाने का प्रयास नहीं किया।

9 लोगों की टीम पर रोजाना का एक चालान भी नहीं

निगम ने एक चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर के साथ 8 सेनेटरी इंस्पेक्टरों को चालान करने का अधिकार दे रखा है। इनमें से सभी को जिम्मेवारी चारों विधानसभा हलका को जोन स्तर पर बनाकर बांटी गई है। इस हिसाब से एक सेनेटरी इंस्पेक्टर दिन में औसतन एक चालान भी नहीं कर रहा है। कारण साल भर में शनिवार और रविवार के साथ ही सरकारी अवकाश के अलावा 240 से 250 दिन तक निगम का कार्यदिवस रहता है।

पॉलिथीन के 34 चालान से वसूले 88,500 रुपए

निगम के तहबाजारी ब्रांच ने रुटीन की बजाय छापेमारी कर सालभर में 34 चालान करके 88500 रुपए जुर्माना वसूला है। इसमें पॉलिथीन से भरा ट्रक जब्त करने को लेकर सर्वाधिक 25000 रुपए का जुर्माना भी शामिल है। लेकिन इससे ज्यादा की संख्या में लोग अब जक जुर्माना भरने निगम नहीं आए हैं। हालांकि पॉलिथीन का चालान निगम की तहबाजारी ब्रांच करता है।

तर्क दिया- कोरोना के कारण घटे चालान

निगम के हेल्थ ब्रांच के एएचओ डाॅ. वरिंदर रतन ने बताया कि इस साल कोरोना के कारण करीब 4 माह अर्थात अप्रैल से जुलाई तक चालान का काम लगभग ठप ही रहा। लोग भी परेशान थे और निगम ने भी सख्ती नहीं की। इस कारण बीते एक साल में चालान का आंकड़ा कम हुआ है।

मजिस्ट्रेट की तैनाती के लिए सरकार से बात करेंगे

मेयर जगदीश राजा का कहना है कि पहले भी उनके कहने पर कमिश्नर ने सरकार को लिखित रूप से डिमांड भेजी थी लेकिन कोरोना के कारण मामला दब गया। दोबारा इस संबंध में प्रमुख सचिव से लेकर निकाय मंत्री से बात की जाएगी ताकि चालान की पेंडेंसी न रह सके।

एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मांगी थी मंजूरी, सरकार ने ठुकराई

जनवरी में तत्कालीन निगम कमिश्नर दीपर्व लाकड़ा ने चालान के भुगतान न होने पर कोर्ट भेजने की प्रक्रिया की बजाय निगम में ही एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तैनाती की मांग सरकार से की थी ताकि चालान के मामलों का निगम में ही निपटारा हो जाए लेकिन अब तक सरकार ने इसकी कोई मंजूरी नहीं दी है। वैसे निगम प्रशासन गंदगी को लेकर काटे गए चालान कोर्ट में नहीं भेजता है, सिर्फ तहबाजारी और बिल्डिंग ब्रांच के चालान कोर्ट भेजे जाते हैं।

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