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टीका जरूरी है:प्राइवेट अस्पताल में कोवैक्सीन बंद, प्रशासन और सरकारी सेंटर्स पर दोनों लगती रहेंगी

जालंधर3 महीने पहले
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शहर में एक ही वैक्सीन के दो रेट होने के चलते कोई नहीं आ रहा था।​​​​​​​ - Dainik Bhaskar
शहर में एक ही वैक्सीन के दो रेट होने के चलते कोई नहीं आ रहा था।​​​​​​​

जिले में शनिवार को करीब 6400 लोगों को वैक्सीन लगी है। सेहत विभाग की तरफ से रविवार को भी वैक्सीनेशन के कैंप सिविल अस्पताल समेत अन्य जगहों पर लगाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ शनिवार को सेहत विभाग का तरफ से जारी किए गए वैक्सीन वापस करने के निर्देशों के तहत 1100 के करीब डोज विभाग को प्राइवेट अस्पतालों ने वापस भेज दी है।

हालांकि सेहत विभाग की इस नोटिफिकेशन का कई प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर्स ने विरोध भी किया गया है। बता दें कि जिले के 10 प्राइवेट अस्पतालों ने करीब 10 लाख रुपए की वैक्सीन की डोज ली थी। हालांकि पंजाब सरकार की तरफ से प्रति डोज 1060 रुपए में अस्पतालों को दी, जिसे आगे किसी भी रेट पर लगाने के लिए अस्पतालों को कहा गया था। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों के डाॅक्टर्स का कहना है कि अगर सरकार ने प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन 1060 रुपए में देकर खुद जिला स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट का नाम देकर प्रति डोज 543 रुपए में ही देनी थी तो उन्हें पहले ही वैक्सीन की कोई डोज न देते।

प्राइवेट अस्पतालों की इमेज खराब होती है

ग्लोबल अस्पताल के एमडी डॉक्टर नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि अगर सरकार ने वैक्सीन वापस लेनी थी तो उन्हें पहले ही बता देना चाहिए था। सरकार के इन फैसले से राज्य के सभी प्राइवेट अस्पतालों की छवि खराब होती है, क्योंकि कोरोनावायरस काल में पहले ही लोग प्राइवेट अस्पतालों के लिए बहुत गलत बोल रहे है, जोकि हकीकत से कहीं परे है।

पहले प्रति वायल 600, फिर 1060 में खरीदने को मजबूर किया : डॉ. ग्रोवर

न्यू रूबी अस्पताल के डॉ. एसपीएस ग्रोवर का कहना है कि सेहत विभाग ने पहले प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीनेशन ड्राइव चलाने के लिए दबाव बनाया, फिर फोन पर ही रेट भी बताए गए। पहले वैक्सीन की पहली एक वायल 600 रुपए में और फिर 1060 में देने की बात कही। इसे प्राइवेट अस्पतालों ने माना, लेकिन शहर में एक ही वैक्सीन के दो रेट होने के चलते कोई नहीं आ रहा था।​​​​​​​

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