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बदलाव:पोलीहाउस में खीरे की खेती कर धान और गेहूं से 10 गुना ज्यादा कमाई

जालंधरएक महीने पहले
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  • गेहूं और धान पर ही निर्भर न रहकर पोलीहाउस में खीरे, सब्जियों की बिजाई को तरजीह दे रहे किसान, यूनिट लगाने में सरकार दे रही 50 % सब्सिडी

(विकास शर्मा) दशकों से गेहूं और धान की रिवायती खेती करने वाले किसानों का रुझान अब खीरे और सब्जियों की खेती की तरफ है। कारण साफ है। गेहूं और धान की खेती कर जितनी कमाई होती है, उससे 10 गुना ज्यादा खीरे और सब्जियों से हो सकती है। पोलीहाउस, नेटहाउस के जरिये अब साल में दो बार खीरे की खेती की जा रही है। तुपका प्रणाली यानी ड्रॉप वाटरिंग से पानी की खपत भी बहुत कम होती है।

पोलीहाउस में तैयार हाइब्रिड खीरे की पहचान छिलके पर हलके रेशे से होती है। बिजाई में कीटनाशकों का नाममात्र इस्तेमाल किया जाता है। महीने में चार बार वाटर सॉल्यूएबल खाद डाली जाती है। खाद और कीटनाशक कब और कैसे इस्तेमाल करना है, इसकी ट्रेनिंग विभाग निशुल्क दे रहा है।

करतारपुर स्थित बागवानी विभाग के इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सलेंस फॉर वेजिटेब्लस के प्रोजेक्ट अफसर डॉ. दलजीत सिंह गिल ने बताया कि बीज रहित खीरे की बिजाई प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन के तहत पोलीहाउस और नेटहाउस में होती है। अलग-अलग जिलों में करीब 1200 यूनिट्स में खीरे, सब्जियों की खेती होने लगी है।

एक कनाल जमीन पर पोलीहाउस बनाने में करीब 3 लाख खर्च आता है। किसानों को 50% खर्च करना पड़ता है। सरकार 50% सब्सिडी देती है। इसमें 60% हिस्सा केंद्र और 40% हिस्सा सूबा सरकार का होता है।

4 साल बाद दूसरे पोलीहाउस की तैयारी

मजीठा के किसान हरप्रीत सिंह दियालपुर ने बताया कि चार साल पहले एक एकड़ एरिया में पोलीहाउस लगाया था। अब दो महीने में दूसरा नेटहाउस तैयार हो जाएगा। सीड लैस खीरे की खेती बेहतर मुनाफा दे रही है। विभागीय अफसर मदद कर रहे हैं। सरकार अगर खुलकर मदद करे तो नेटहाउस फार्मिंग में भी पंजाब के किसान कमाल कर सकते हैं।

वहीं, अमृतसर में गांव हेर के रहने वाले किसान सरबजीत सिंह ने कहा कि पांच साल पहले एक एकड़ जमीन पर पोलीहाउस की शुरुआत की। सरकार की तरफ से सब्सिडी मिलने से आर्थिक दिक्कत नहीं आई। पहले के तीन साल खीरे की मार्केटिंग की ज्यादा जानकारी नहीं थी पर दो साल से सारे खर्च निकालने के बाद खीरे की खेती गेहूं और धान से कई गुना ज्यादा मुनाफा दे रही है। जगह के हिसाब से पोलीहाउस दो-तीन महीने में पूरी तरह तैयार हो जाता है।

खीरे की खेती प्रति कनाल 50 से 70 हजार तक का दे सकती है मुनाफा
खीरे की खेती किसानों को प्रति कनाल 50 से 70 हजार तक का मुनाफा दे सकती है। इसके लिए किसानों को फसल की पूरी निगरानी कर तैयार फसल के मंडीकरण पर भी ध्यान देना चाहिए। गेहूं और धान की तुलना में पोलीहाउस में बिजाई मुश्किल जरूर है पर फायदा भी 10 गुना ज्यादा है। दूसरा पंजाब में पानी के गिरते स्तर के कारण पोलीहाउस फार्मिंग समय की जरूरत है।
डॉ. दलजीत सिंह गिल, प्रोजेक्ट अफसर, सेंटर ऑफ एक्सलेंस फॉर वेजिटेब्लस 

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