इनसे सीखें:आंध्रा, कोलकाता और गोवा तक मालेरकोटला के अख्तर के सजावटी पौधों की मांग, कीमत 50 रुपए से 7 लाख तक

जालंधर18 दिन पहले
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जालंधर में जेपीजीए के किसान मेले में पौधे बेचता मालेरकोटला का अख्तर। - Dainik Bhaskar
जालंधर में जेपीजीए के किसान मेले में पौधे बेचता मालेरकोटला का अख्तर।

बदलते दौर के साथ सजावटी पौधों की मांग भी बढ़ रही है। घरों, मैरिज पैलेसों व शॉपिंग मॉल्स में इनकी खूब मांग रहती है। किसान भी अब जागरूक हो रहे हैं और खेती में विविधता लाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। मालेरकोटला के अख्तर सजावटी पौधों की खेती कर रहे हैं।

उनका कहना है कि यह अच्छे मुनाफे वाली खेती है। उनके पास 50 रुपए से 7 लाख रुपए तक के पौधे उपलब्ध हैं। वह प्रतापपुरा दाना मंडी में जालंधर पोटेटो ग्रोवर एसोसिएशन (जेपीजीए) की ओर से पिछले दिनों लगाए गए किसान मेले में पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने सजावटी पौधों का स्टाल लगाया था।

अख्तर ने कहा कि सजावटी पौधों की आज मार्केट में अच्छी मांग है। घरों की सजावट के अलावा, पैलेसों और मॉल्स में अच्छी मांग रहती है। ऐसे में किसानों को बाजार की मांग को समझना चाहिए कि किस तरह से कमाई की जा सकती है। उनके सजावटी पौधे आंध्रा, कोलकाता और गोवा तक सप्लाई होते हैं। अच्छी कमाई हो रही है। मेले में उनके पौधे खूब बिके हैं।

जालंधर शहर के लोगों और दूसरे जिले से आए किसानों ने सजावटी पौधों के अॉर्डर भी आए हैं। वहीं, छोटे किसानों ने उनसे इन पौधों के बारे में जानकारी हासिल की है। उन्होंने कहा कि किसानों को रिवायती खेती को छोड़ खेती विविधता को अपनाना चाहिए ताकि खेती को फायदेमंद बनाया जा सके।

किसानों को सलाह...खेती में विविधता लाएं और खुद करें अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग

डडविंडी के दलजीत 6 एकड़ में कर रहे आर्गेनिक खेती हल्दी और शहद भी तैयार कर रहे, मिलता है अच्छा रेट

कपूरथला के गांव डडविंडी के किसान दलजीत सिंह 6 एकड़ में आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। वह किसान मेले में शहद और हलदी की बिक्री कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब शहरों में आर्गेनिक चीजों को लेकर लोगों में जागरूकता आई है। किसान अगर अपने प्रोडक्ट की सीधी बिक्री करें तो वह बाकियों से ज्यादा लाभ में रहेगा।

दुकानों वाले आज उनके साथ खुद संपर्क करते हैं, आर्गेनिक चीजें चाहते हैं। वह पढ़ाई से ग्रेजूएट हैं। उन्होंने अपनी चीजों की बढ़िया बिक्री के लिए प्रभावशाली पैकिंग की है। विजीटिंग कार्ड प्रकाशित कराए हैं। लोगों को आर्गेनिक के फायदे भी बताते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम पारंपरिक तरीके से मंडी में जाते हैं तो व्यापारी की मर्जी वाला रेट मिलता है।

फिजी वायरस का इलाज नहीं, की जा रही स्टडी : डॉ. गुरदेव

किसान मेले में 3 चीजों पर दिलचस्पी दिखी। पहला अर्गेनिक खेती व नए तरीके अपनाने वाले किसान। दूसरा नई मशीनरी, जिससे लागत खर्च कम हो और तीसरा धान में फैले फिजी वायरस को लेकर जानकारी लेने वालों के सवालों के जवाब।

किसानों ने मेले में फिजी वायरस की रोकथाम के तरीके पूछे। दैनिक भास्कर ने पंजाब के खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर डॉ. गुरदेव सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि इस वायरस का असर अलग-अलग तरह से है। जिन फसलों पर पहले से कोई कीड़ा लगा था, उस पर अधिक अटैक किया।

अगेती वैरायटीज पर ज्यादा असर दिखा। किस इलाके में कैसे हालातों पर इसका कैसे विस्तार हुआ, इसकी स्टडी की जा रही है। फिलहाल, इसका इलाज नहीं। स्टडी में जो जानकारी मिलेगी, उसी आधार पर धान के आगामी सीजन में फसलों को सुरक्षित करने को लेकर प्रबंधन होगा।

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