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प्रदर्शन में 2 घंटे बंद रहीं बसें फिर से चलीं:सरकारी कर्मचारियों ने 'CM कैप्टन अमरिंदर सिंह लापता' के पोस्टर लेकर की नारेबाजी, अब रविवार को बनाएंगे अगली रणनीति

जालंधर3 महीने पहले
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जालंधर बस स्टैंड से बसें चलनी शुरू होने के बाद उसमें बैठती सवारियां। - Dainik Bhaskar
जालंधर बस स्टैंड से बसें चलनी शुरू होने के बाद उसमें बैठती सवारियां।

सरकारी कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के 2 घंटे के प्रदर्शन के बाद जालंधर बस स्टैंड खुल गया है। यहां से बसों की आवाजाही शुरू हो गई है। कर्मचारियों के सुबह 10 से 12 बजे के लिए संचालन बंद किए जाने की वजह से अब पंजाब रोडवेज दोबारा सभी बसों को रवाना करने लगा है। प्रदर्शन खत्म होने के बाद यहां परेशान हो रहीं सवारियों ने भी राहत की सांस ली। शुक्रवार सुबह कर्मचारियों ने यहां पे कमीशन को लेकर की जा रही मांग न मानने पर 2 घंटे के लिए बस स्टैंड बंद कर दिया था। कर्मचारियों ने बस स्टैंड के भीतर ही धरना लगा दिया था। इस दौरान उन्होंने CM कैप्टन अमरिंदर सिंह के लापता होने के पोस्टर लहराते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।

धरने की जगह पर कर्मचारियों का लगाया कैप्टन लापता का पोस्टर।
धरने की जगह पर कर्मचारियों का लगाया कैप्टन लापता का पोस्टर।

रविवार को मीटिंग कर घोषित करेंगे अगला संघर्ष

कमेटी के तेजिंदर सिंह ने कहा कि पे-कमीशन को लेकर उनकी मांग को सरकार नजरअंदाज कर रही है। कर्मचारियों के संघर्ष के बाद इसके लिए मंत्रियों व अफसरों की कमेटी बना दी है। इस मामले में फैसला लेने का अधिकार न तो अफसरों को है और न ही मंत्रियों को। फिर यह सरकार की आंखों में धूल झोंकने की चाल है। उन्होंने कहा कि संगठन की बैठक सीधे CM कैप्टन अमरिंदर सिंह से कराई जाए ताकि इसका कोई हल निकल सके। इस धरने के बाद रविवार को फिर संगठन की बैठक होगी और उसमें आगे के संघर्ष की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

जालंधर बस स्टैंड पर प्रदर्शन करते कर्मचारी।
जालंधर बस स्टैंड पर प्रदर्शन करते कर्मचारी।

सवारियां हुई परेशान, वैकल्पिक इंतजाम न कर सकी रोडवेज

बस स्टैंड बंद किए जाने की वजह से सवारियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कर्मचारियों ने गुरुवार को ही दो घंटे बस स्टैंड बंद करने की घोषणा कर दी थी। इसके बावजूद बाहर से बसों की आवाजाही को सुचारू रखने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए गए। जिस वजह से सवारियाें को बस स्टैंड पर बैठकर धरना खत्म होने का इंतजार करना पड़ा।

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