लहलहाने लगी अन्नदाता की मेहनत:42 दिन के धान में खाद न डालें, बढ़ते हैं रोग, छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख रोगों से बचाएं फसल

जालंधर4 महीने पहले
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सूबे में करीब 30 लाख हेक्टेयर में धान की खेती है। अब तक अच्छी बारिश हुई है, जिससे फसल लहलहाने लगी है। लेकिन, इस समय फसल को झुलस रोग होने खतरा है। कीटों का भी हमला हो जाता है। इसलिए कृषि माहिरों ने किसानों को फसल पर पूरा ध्यान रखने की सलाह दी है। ब्लॉक पठानकोट के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि किसान धान के खेत का निरीक्षण करते रहें।

झुलस रोग या कीटों का हमला हो तो तुरंत कृषि अधिकारी की सलाह लेकर शिफारिश की गई दवा का छिड़काव करें। लापरवाही से आर्थिक नुकसान हो सकता है, पर जरूरत से ज्यादा कीटनाशकों का इस्तामल न करें। वहीं, उन्होंने सलाह दी कि धान की फसल 42 दिन की हो जाए तो यूरिया या अन्य खाद न डालेंं। इससे फसल पर बीमारियों और कीटों का हमला बढ़ जाता है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है।

18001801551 ਤੇडायल कर लें खेती संबंधी जानकारी

डॉ. अमरीक ने बताया कि किसान फसल के रोगों और कीटों के हमले व बचाव के लिए कृषि विभाग के टोल फ्री नंबर 1800180 1551 ਤੇपर संपर्क करें। ब्लॉक कृषि अधिकारी से भी जानकारी ले सकते हैं। पर दुकानदारों के कहने पर बिना वजह कीटनाशकों व खादों के उपयोग से बचें। कृषि अधिकारी की सलाह पर ही दवा की स्प्रे या खाद डालें। जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसान पहुंचाता है। वातावरण दूषित होता है। उन्होंने कहा कि कई बार पानी की कमी या देर से पानी लगाने पर धान में लोहे की कमी हो जाती है, जिससे फसल पीली दिखने लगती है। ऐसे में एक किलो फैरिस सल्फेट 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ हफ्ते-हफ्ते बाद 2 छिड़काव करें। पर कई बार किसान दुकानदार के कहने पर 10-10 किलो फेरस सल्फेट प्रति एकड़ डाल देते हैं, जिसका लाभ नहीं होता, क्योंकि फैरिस स्लफेट का स्प्रे करने से ही फायदा होता है। वहीं,यहां धान के पौधे छोटे रह जाएं तो वहां प्रति एकड़ ढाई किलो यूरिया व आधा किलो जिंक सल्फेट की गोल नोजल से स्प्रे करें। पर धान को काला करने के लिए जरूरत से ज्यादा खाद न डालें। इसका नुकसान ही होता है और रोगों व कीटों का हमला बढ़ता है। फसल गिरती है। कहा कि किसी के कहने पर किसी भी कीटनाशक या उल्लीनाशक का छिड़काव न करें।

बासमती पर इन कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचें किसान
डॉ. अमरीक सिंह का कहना है कि यूरोपियन देशों ने पंजाब की बासमती की खरीद करने से मना कर दिया है, क्योंकि दानों में कीटनाशक और उल्लीनाशक रसायनों की मात्रा जरूरी मापदंडों से ज्यादा पाई गई है। इसलिए शुद्ध बासमती की पैदावार के लिए किसानों को कारबेंडाजिम, ट्राईसाईकलाजोल, थाईमैथोकसम, एसीफेट, प्रोपीकोनाजोल और ट्राईजोफाश का छिड़काव नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़े तो कृषि माहिरों की सलाह लेकर ही दवाई का छिड़काव किया जाए।

इन बातों का रखें ध्यान

  • धान के खेत में लगातार पानी खड़ा न रहने दें। फसल की ग्रोथ के लिए वट्‌टें-किनारे साफ रखें।
  • झुलस रोग का हमला होने पर 150 एमएल पल्सर या 26.8 ग्राम एपिक या 80 ग्राम नटीवो या 200 एमएल एमी स्टार टॉप या टिलट या फौलीकर को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। स्प्रे साफ मौसम में करें।
  • बासमती की फसल में झंडा रोग हो तो प्रभावित पौधों को उखाड़ दें। इस पर दवा का स्प्रे न करें।

ऐसे करें चूहों की रोकथाम...

फसल में चूहों की रोकथाम के लिए शाम को चूहों की खुड्‌डों के मुंह बंद कर दें। अगले दिन ताजी खुली खुड्‌डों में 10-10 ग्राम जिंक फासफाइड वाले चोग को कागज की पुड़ियों में डालकर करीब 6 इंच खुड्ड के अंदर रख दें। इसके अच्छे नतीजे के लिए चूहेमार मुहिम को गांव स्तर पर चलाया जाना चाहिए।

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