अधर में लटका काम:जमीन नहीं मिलने से 35000 करोड़ के 3 बड़े प्रोजेक्ट लटके, 1485 एकड़ से अधिक की जमीन का अधिग्रहण करना है

जालंधर9 महीने पहले
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  • अब 10 किमी तक रेट 2.5 लाख, 20 किमी से अधिक दूरी की जमीन पर 4 लाख, पहले इनकी कीमत 2 लाख और 2.5 लाख मरला थी

जिला प्रशासन को जिले के 3 बड़े प्रोजेक्टों के लिए 1485 एकड़ से अधिक की जमीन का अधिग्रहण करना है। सरकार के द्वारा जनवरी माह में नए रेट निर्धारित किए थे, जिसे प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी करके लागू कर दिया है। अब इन किसानों को यदि पहले निगम की सीमा 5 से 10 किमी में जिस जमीन के 2 लाख मिल रहे थे, अब उस जमीन के लिए किसानों को 2.5 लाख मिलेंगे।

वहीं निगम सीमा के 20 किमी से अधिक की दूरी पर जिस जमीन पर किसानों को 2.5 लाख रुपए मिल रहे थे, अब उस जमीन के लिए किसानों को 4 लाख रुपए तक मिलेंगे।

रिवाज्ड रेट होने से किसानों को फायदा प्रशासन ने जारी किया नोटिफिकेशन

सरकार के नए फैक्टर के मुताबिक निगम एरिया से जितनी ज्यादा दूरी पर जमीन है, उन्हें अधिक फायदा होने वाला है। बीते 3 साल से जमीनों का अधिग्रहण नहीं हो पाने के चलते जिले के 3 बड़े 35000 करोड़ के प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं। इनमें दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे, जालंधर रिंग रोड प्रोजेक्ट और बठिंडा ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी प्रोजेक्टों को केंद्र सरकार ने साल 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, मगर 1274 किसानों ने यह कहकर जमीन देने से इनकार कर दिया है, कि उन्हें जमीन के बदले में मिलने वाला मुआवजा काफी कम है। इस वजह से सरकार ने इस साल दूसरी बार मुआवजा रिवाइज्ड कर नया रेट फैक्टर लागू किया है।

इन प्राेजेक्टाें के काम में आएगी तेजी
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट संबंधी जिला प्रशासन ने 1485 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए सेक्शन 3डी के तहत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। प्रोजेक्ट के लिए फिल्लौर, नकोदर और जालंधर-2 सब डिवीजनों में जमीन अधिगृहित की जाएगी। जालंधर में यह एक्सप्रेस-वे 68 किमी लंबा होगा। फिल्लौर और जालंधर-2 सब-डिवीजन के अंतर्गत 29 किमी व नकोदर में 10.09 किमी एक्सप्रेस-वे आएगा। अधिगृहित होने वाली 1485 एकड़ जमीन में से 435 एकड़ जमीन फिल्लौर, 237 एकड़ नकोदर व 813 एकड़ जमीन जालंधर-2 सब डिवीजन के अंतर्गत आती है।

रेट निर्धारित करने के ये मानक
किसी भी मेट्रो शहर से 5 किलोमीटर के क्षेत्र के अंदर तक जमीन की कीमत 1.5 मल्टीप्लिकेशन फैक्टर लागू किया गया है, जबकि मेट्रो शहर से 5 किलोमीटर से ऊपर के लिए फैक्टर 2 का प्रयोग किया जाएगा। इसी तरह किसी भी नान मेट्रो म्युनिसिपल समिति/नगर पंचायत के 2 किलोमीटर के क्षेत्र पड़ती ज़मीन के लिए 1.5 मल्टीप्लिकेशन फैक्टर और किसी भी नॉन मेट्रो म्युनिसिपल समिति/नगर पंचायत के दो किलोमीटर के घेरे से अधिक के लिए 2 मल्टीप्लिकेशन फैक्टर की जमीन का मूल्य निश्चित करने के लिए प्रयोग किया जाएगा।

एरिया के हिसाब से रेट निर्धारित होंगे
जिला रेवेन्यू अधिकारी जशनजीत सिंह का कहना है कि किसानाें की जमीनाें काे अधिक मुआवजा देने और जल्द भूमि अधिग्रहण के लिए प्रशासन ने नए मल्टीप्लिकेशन फैक्टर रेट राइट टू फेयर कम्पेनसेशन और ट्रांसपेरेंसी लैड् एकुजेशन एक्ट 2013 के अंतर्गत संशोधित किए गए है। अब जमीन अधिग्रहण करते समय नए संशोधन किए गए फैकटरों को ध्यान में रखकर जमीन की बाजारी कीमत निर्धारित की जाएगी।

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