पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Jalandhar
  • Even After Spending 10 Crores Annually, Street Lights Are A Bad Reason Responsibility Of Maintenance Contractors Is Not Fixed

पढ़ें आधे शहर में क्यों कायम है अंधेरा:सालाना 10 करोड़ खर्च करने के बाद भी स्ट्रीट लाइटें खराब कारण- मेंटेनेंस वाले कांट्रेक्टरों की जिम्मेदारी तय नहीं

जालंधरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • पंजाब का इकलौता नगर निगम, जहां हर साल बिजली बिल में डेढ़ करोड़ का घाटा
  • स्मार्ट सिटी योजना में 49 करोड़ की लागत से नई लगनी हैं एलईडी लाइटें
  • मेयर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से उम्मीदें, बोले- नई लाइटें लगने के बाद सारी शिकायतें दूर होंगी, बिजली खर्च भी बचेगा

(प्रवीण पर्व) सिटी में खराब सड़कों और खराब सफाई सिस्टम के बाद सबसे बड़ा घटिया सिस्टम स्ट्रीट लाइट का चल रहा है। हर साल ₹10 करोड़ खर्च करने के बावजूद भी शहर अंधेरे में है। दैनिक भास्कर ने रात को सिटी का दौरा किया जिसमें इंडस्ट्रियल एरिया, अर्बन एस्टेट, नेशनल हाईवे की सर्विस लेन, कनाल रोड, दादा कॉलोनी, दोमोरिया पुल के पास, अलास्का चौक इत्यादि इलाके अंधेरे में डूबे नजर आए।

इसके 3 प्रमुख कारण हैं। पहला सबसे बड़ा कारण स्ट्रीट लाइट मेंटेन करने वाले कांट्रेक्टरों की जिम्मेदारी फिक्स न करना। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं है जहां पर स्ट्रीट लाइट के ढक्कन गायब न हों। हर महीने ऐसा कोई हफ्ता नहीं है जब शहर में दिन में स्ट्रीट लाइट जगती न नजर आई। दूसरा कारण नए उपकरण खरीदने से बचने का खेल है। जब एक व्यक्ति बंद स्ट्रीट लाइट की कंप्लेंट करता है तो उसे सही करने के लिए बहुत बार दूसरे पोल से बल्ब निकालकर फिट कर दिया जाता है।

इसकी टोपी उसके सर वाला खेल खत्म करने के लिए बेल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर फार्मूला पर आधारित नई स्ट्रीट लाइट लाने का प्रोजेक्ट पूर्व हाउस में लाया गया, जिसे मौजूदा हाउस ने रद्द किया और इसके बाद खराब लाइटों को चलाने में विफल रहे। तीसरा कारण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 49 करोड़ रुपए से नई 70, 000 लाइटें लगाने के प्रोजेक्ट में हो रही देरी है। इस बारे में दैनिक भास्कर के सवाल पर मेयर जगदीश राज राजा ने कहा कि उक्त प्रोजेक्ट के तहत नई लाइट लगने के बाद आपकी सारी शिकायत हल हो जाएगी और बिजली के बिल का खर्च भी बचेगा।

स्ट्रीट लाइट सिस्टम में कमियां

1. स्ट्रीट लाइट की शिकायत के लिए असरदार प्रणाली नहीं है। जब एक व्यक्ति अपने घर के बाहर बल्ब खराब होने की कंप्लेंट करता है तो ठेकेदार का स्टाफ अक्सर किसी दूसरी जगह का बल्ब निकालकर शिकायतकर्ता के घर के बाहर लगा देता है। 2. नगर निगम के ठेकेदार उपकरणों का खर्च बचाने के लिए स्ट्रीट लाइट की सही मेंटेनेंस नहीं कर पा रहे। नगर निगम से पैसे की भरपाई देरी से करना इसकी मुख्य वजह। स्ट्रीट लाइटों के ढक्कन गायब किए गए हैं। इस कारण बरसात में खराब हो जाती हैं।

3. आज तक लापरवाही बरतने पर ठेकेदारों को चेतावनी देने के अलावा कुछ नहीं किया गया। पार्षदों का एक ग्रुप पेनल्टी की सिफारिश करता है और दूसरा ग्रुप कोई न कोई वजह बता कर माफी देने का पक्ष रखता है।

रोजाना डेढ़ घंटा ज्यादा चलाई जा रही है लाइटें... गर्मी के सीजन में सूरज 7:30 बजे डूबता है जबकि नगर निगम शाम 6 बजे स्ट्रीट लाइट ऑन कर देता है। इससे स्ट्रीट लाइट डेढ़ घंटा ज्यादा चलती हैं और इसी तरह कल सुबह 6 बजे रोशनी हो जाती है, लेकिन लाइटें इसके बाद में बंद की जाती हैं। नगर निगम ऑनलाइन ऑन ऑफ सिस्टम आज तक स्थापित नहीं कर पाया है।

फेल हुए सुधार के ये फार्मूले

1. नगर निगम का मानना था कि ठेकेदार पूल बनाकर ठेके लेते हैं। इसलिए शहर को जोन में बांटा। इसके बावजूद मेंटेनेंस में सफलता का नतीजा जीरो। 2. गठबंधन ने पार्षदों को निगरानी रखने को कहा। वहीं, कांग्रेस सरकार में एडहॉक कमेटी भी बनाई। फिर भी खराब लाइटें ठीक करने की निगरानी सफल नहीं हो पाई। 3. गठबंधन सरकार बेल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर योजना लाई थी। आधुनिक तरीके से लाइट चालू होनी थी, बिजली खर्च घटना था। घोटाला बताकर कांग्रेस ने इसे रद्द कर दिया। 4. बिल टू ऑपरेट एंड ट्रांसफर कंपनी ने सिटी में 5000 लाइटें लगाईं। निगम ने इनको चालू किया, लेकिन नुकसान जारी है। जबकि अलग मीटर लगा खर्च बच सकता था।

ऐसे सुधारा जा सकता है सिस्टम
1. राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए।
2. स्ट्रीट लाइट सिस्टम का सोशल ऑडिट करवाया जाए।
3. स्ट्रीट लाइट की शिकायत आने के बाद उसे निपटाने का समय का सिस्टम गंभीरता से लागू हो।
4. हर साल ठेकेदार मेंटेनेंस ना करके लाखों रुपए की बचत करते हैं। पेनल्टी सिस्टम ईमानदारी से लागू किया जाए।

हर साल दीपावली से पहले पार्षदों को गिफ्ट की जाती हैं लाइटें

सिटी की यह हालत तब है जब नगर निगम करीब 10 करोड़ रुपए सड़कों पर रोशनी के लिए हर साल खर्च करता है। डायरेक्ट कुंडी डालकर अवैध कॉलोनियों में भी स्ट्रीट लाइट लगाई जाती है। नगर निगम जालंधर में नई बनी करीब 600 कॉलोनी में सौ फीसदी स्ट्रीट लाइट का प्रबंध नहीं कर पाया और हर साल दीपावली से पहले हर वार्ड में सीमित संख्या में नई लाइट लगाकर सभी कालोनियों के प्रमुख इलाके रोशन कर लिए जाते हैं, जबकि बाकियों में अंधेरा बरकरार है।

गौर हो कि नगर निगम हर दिवाली पर हर वार्ड में नई स्ट्रीट लाइट बांटकर पार्षदों को तोहफा देता है। तोहफे में करीब 12000 लाइटें दी गई हैं। 3 साल पहले नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नई लाइटें लगाने की योजना बनाई थी, जिसमें धीमी गति से काम हो रहा है। अब अगले साल ही नई लाइटें फिट होने का काम होगा।

निगम हाउस ने खुद उलझाया स्ट्रीट लाइट का मुद्दा

पूर्व हाउस के समय जालंधर सिटी के अंदर बेल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर योजना के तहत नई लाइटें लगाई जा रही थी और 5000 पॉइंट फिट हो चुके थे। इसका ठेका बीच में ही रद्द कर दिया गया और उसकी जगह पुरानी स्ट्रीट लाइटें भी चालू नहीं कर पाए। अब जुगाड़ स्कीम से जहां-जहां लाइटें चलने की हालत में है उन्हें जगाया जा रहा है।

3 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करके लाइट मेंटेनेंस के ठेके दिए गए, लेकिन यहां भी गड़बड़ चल रही है। उपकरणों को खरीदने का खर्च बचाया जा रहा है और बड़ी संख्या में लाइटें बंद मिल रही हैं। नगर निगम के पास न तो बंद लाइटों की फाइनल रिपोर्ट है और न ही इनकी शिकायतें सुनने के लिए रिकॉर्डिंग वाला सिस्टम है ताकि ट्रांसपेरेंसी रहे।

पारंपरिक बल्बों से हर साल आ रहा 3 करोड़ का बिल, एलईडी लगाकर डेढ़ करोड़ बचाए जा सकते हैं... नगर निगम हर साल डेढ़ करोड़ रुपए का घाटा बिजली बिल में सह रहा है। इसकी वजह यह है कि पारंपरिक बिजली के पुराने बल्ब का साल में 3 करोड़ रुपए का बिजली बिल है। पारंपरिक बल्बों का बिजली लोड 6000 किलोवाट है। अगर एलईडी बल्ब लगाए जाएं तो बिजली के बिल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। नगर निगम के सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि जब भी नई लाइट रिलीज की जाती हैं उनमें पारंपरिक पीले बल्ब ही लगाए जाते हैं।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज समय बेहतरीन रहेगा। दूरदराज रह रहे लोगों से संपर्क बनेंगे। तथा मान प्रतिष्ठा में भी बढ़ोतरी होगी। अप्रत्याशित लाभ की संभावना है, इसलिए हाथ में आए मौके को नजरअंदाज ना करें। नजदीकी रिश्तेदारों...

और पढ़ें