रेमडेसिविर की शार्टेज:परिजन बोले- ऑक्सीजन की कमी और खर्च लाखों में, दाखिल भी नहीं किया

जालंधर6 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • अस्पतालों में भी उपलब्ध नहीं, ड्रग अथॉरिटी का जवाब- स्टॉक आने पर डिलीवरी की जा रही
  • एक दिन में 593 संक्रमित, 8 की मौत

सिटी में बुधवार को 547 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई जबकि 8 की मौत हो गई। संक्रमितों में 23 बाहरी जिलों में रहने वाले हैं, जिन्हें जिले के आंकड़े में जोड़ा नहीं गया है। अब तक संक्रमितों की कुल गिनती 41894 तक पहुंच गई है जबकि 1068 मरीज दम तोड़ चुके हैं। सेहत विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 8 में से एक मरीज की मौत पटियाला में जबकि बाकी 7 की शहर के अस्पतालों में हुई है। पांच मृतकों के परिजनों ने शहर के अस्पतालों पर आरोप लगाया कि उनके मरीजों को अस्पताल में दाखिल करने से इसलिए मना कर दिया गया कि उनके पास ऑक्सीजन की कमी है।

दूसरी तरफ जिला प्रशासन का दावा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बुधवार को किसी भी अस्पताल ने ऑक्सीजन को लेकर सेहत विभाग के अधिकारियों को कोई शिकायत नहीं की। जबकि प्रशासन का दावा है कि शहर के कोविड सेंटर्स में लेवल-2 में 606, आईसीयू में 104 बेड और 104 वेंटिलेटर खाली हैं, जहां कोविड मरीजों को दाखिल किया जा सकता है। दूसरी तरफ कोरोनावायरस के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मरीजों के परिजनों को इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि अस्पतालों में दाखिल गंभीर मरीजों की गिनती बताने के बावजूद उन्हें इंजेक्शन की सप्लाई नहीं मिल रही है। जबकि इस बारे ड्रग जोनल अथॉरिटी लखवंत सिंह का कहना है कि जिन अस्पतालों में मरीजों को रेमडेसिविर की जरूरत है, उनकी लिस्ट ली जा रही है। मार्केट में शार्टेज है। उनके पास स्टॉक आने पर डिलीवर भी किया जा रहा है।

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अस्पताल ने जवाब दिया- कहीं और ले जाओ, हमारे पास वेंटिलेटर नहीं

मकसदूां के 67 साल के बुजुर्ग का पहले पटेल चौक स्थित अस्पताल में इलाज चल रहा था। अस्पताल ने रात को जवाब दे दिया कि मरीज की हालत खराब है। उसे कहीं और ले जाओ। वे कैंट स्थित अस्पताल ले गए, वहां 4 दिन दाखिल रहने के बाद अस्पताल ने वेंटिलेटर न होने का हवाला देकर किसी और अस्पताल ले जाने की बात कही। आखिर मरीज ने दम तोड़ दिया। (जैसा परिजन अश्वनी कुमार ने बताया)

दो दिन मरीज से मिलने नहीं दिया, कॉल आई- डेडबॉडी ले जाएं

फिल्लौर के रहने वाले 70 साल के मरीज के भतीजे ने बताया कि पत्थरी की दवा लेने के लिए नवांशहर गए। डॉक्टर ने कहीं और ले जाने के लिए कहा तो जालंधर ले आए पर किसी अस्पताल ने दाखिल नहीं किया। सरकारी अस्पताल पटियाला गए तो न मरीज से मिलने दिया और न मरीज को फोन पहुंचाया। मंगलवार रात फोन आया कि मरीज की मौत हो चुकी है, डेडबॉडी ले जाएं। (जैसा परिजन परमजीत ने बताया)

दो अस्पतालों ने कहा- ऑक्सीजन और बेड नहीं और तीसरे ने डेढ़ लाख खर्च बताया

बस्ती शेख की रहने वाली 45 साल की मृतक के बारे उनके परिजन ने बताया कि मरीज को घर में सांस लेने की दिक्कत हुई थी। पहले दो प्राइवेट अस्पतालों में ले गए, वहां उन्होंने अॉक्सीजन की कमी और बेड खाली न होने का हवाला दिया। फिर गढ़ा रोड स्थित अस्पताल में गए, जहां बताया गया कि कोविड लग रहा है। इलाज 14 दिन चलेगा और खर्च 1.5 लाख के करीब खर्च आएगा। इसके बाद सिविल अस्पताल ले गए, जहां मुश्किल से दाखिल किया गया लेकिन वहां मरीज की सही देखभाल नहीं हुई और सिर्फ एक दिन बाद ही मौत हो गई। (जैसा मरीज के परिजन अंकित ने बताया)

सिर्फ वीडियो कॉल ही कर सके, 3.50 लाख रुपए बिल बना

शाहकोट की रहने वाली 70 साल की महिला का कपूरथला रोड स्थित प्राइवेट अस्पताल में आठ दिन इलाज चला। परिजन ने बताया कि डॉक्टर्स ने उन्हें मिलने तक नहीं दिया। कभी 30 हजार तो कभी 50 हजार रुपए जमा करवाने के लिए कहते रहे। बुधवार सुबह फोन आया कि मरीज की हालत गंभीर है, वेंटिलेटर पर डाल रहे हैं। कुछ देर बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। सिर्फ वीडियो कॉल ही कर सके। क्या इलाज हुआ, कुछ पता नहीं बताया गया। (परिजन ने नाम छापने से इनकार किया)

डॉक्टर्स ने 10 दिन क्या इलाज किया, कुछ नहीं बताया

न्यू अशोक नगर की 63 साल के बुजुर्ग की शहर के प्राइवेट अस्पताल में 10 दिन दाखिल रहने के बाद मौत हो गई। मरीज को ब्लड प्रेशर था। उनके बेटे ने बताया कि पिता को सांस की काफी तकलीफ थी। डॉक्टर्स ने 10 दिन उनका क्या इलाज किया, इस बारे कुछ नहीं बताया गया। इसी तरह आदमपुर की 62 वर्षीय महिला का प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिजनों ने कहा डॉक्टरों ने कोई दबाव नहीं बनाया। इलाज सही किया लेकन हालत नाजुक होने के कारण उनकी मौत हो गई। (परिजन ने नाम छापने से इनकार किया।)

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