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मास्क लगाते रहो:फिल्टर बना मास्क, पंजाब में एलर्जी, अस्थमा और टीबी के मरीज 40% तक घटे, सिगरेट के धुएं का भी असर नहीं हुआ

जालंधरएक वर्ष पहले
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  • रेस्पीरेटरी सिस्टम सुधरा, जालंधर, पटियाला, अमृतसर, लुधियाना जैसे शहरों में सांसों के मरीजों की ओपीडी कम हुई

कोरोना काल में सबसे जरूरी मास्क ने पंजाब में ‘जादुई असर’ दिखाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों से मिले आंकड़ों से पता चला है कि मास्क लगाए रखने से एलर्जी, अस्थमा, जुकाम-खांसी और टीबी के मरीजों की संख्या में 40% तक कमी आई है। डॉक्टरों ने माना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल अस्पतालों या क्लीनिकों में ऐसे मरीजों की 30% तक ओपीडी भी कम हुई है।

जबकि साल 2020 में लैंसेट में प्रकाशित आईसीएमआर की रिपोर्ट बताती थी कि देश में सिर्फ वायु प्रदूषण के कारण ही 17 लाख लोगों ने जान गंवाई थी। अकेले पंजाब में हर 100 में 19 मौतों का कारण भी यही था। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि क्रॉनिक ऑस्ट्रक्टिव पल्मोनरी बीमारी से 32.5% मरीजों की मौत होती थी लेकिन लोगों ने मास्क पहना जिससे इसमें काफी कमी आई है। यही हार्ट और

स्ट्रोक के मरीजों के साथ भी हुआ है। उन्हें भी दवा के साथ मास्क पहनने का फायदा मिला है। प्रदूषण के चलते होने वाली बीमारियां और उनसे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी घटा है।जालंधर के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अरुण वालिया का कहना है कि मास्क लगाने के कई फायदे हुए हैं। सर्दियों में सबसे अधिक क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) के मरीज कम हुए हैं। इस अवस्था में मरीज सांस नहीं ले पाता और छाती में कफ पैदा होता है। इसकी वजह भी प्रदूषण है। वहीं ब्रोंकल अस्थमा यानी जिन्हें पुरानी अस्थमा की बीमारी है, उनमें भी इन्फेक्शन कम हुआ है।

इन मरीजों में 20 से 30% की गिरावट आई है। डस्ट पार्टिकल शरीर में न जाने के कारण इन बीमारियों से राहत मिली है वहीं, ऐसी अवस्था में लोगों को एक्यूट लंग्स अटैक भी कम हुए हैं। जालंधर सिविल अस्पताल की ओपीडी की बात करें तो टीबी के 54% मरीज ही अस्पताल पहुंचे हैं।

मास्क पहनने से इंफेक्शन के साथ फ्लू के मामलों में भी गिरावट

ड्रॉपलेट इन्फेक्शन रुका: सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजीव शर्मा ने कहा, मास्क से सबसे अधिक फायदा टीबी के मरीजों को हुआ है। मास्क ने 100% ड्रॉपलेट इन्फेक्शन को फैलने से रोका है।

रेस्परेट्री इन्फेक्शन घटा : डॉ. तरसेम लाल का कहना है कि एलर्जी के मामले 20% तक घटे हैं। स्वाइन फ्लू के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। बदलते मौसम में भी मास्क लगाना जरूरी है।

छाती में एलर्जी और दमा के मरीज भी कम: कोरोनावायरस की रिपोर्टिंग के नोडल अफसर डॉ. राजेश भास्कर के मुताबिक मास्क के इस्तेमाल से ही अब कोरोना के मामले कम आ रहे है, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने से रुका है। वहीं पटियाला में टीबी अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. विशाल चोपड़ा ने कहा- लोगों ने मास्क पहना इसलिए छाती में एलर्जी व दमा के मरीज कम आए हंै। लोग मास्क लगाए रखें।

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