परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस इंचार्ज का जवाब:हरीश रावत बोले- मुझे पता है कब क्या बोलना चाहिए; मीडिया में जितनी कम बयानबाजी करेंगे, उतना ही चुनाव जीतना आसान होगा

जालंधर5 महीने पहले
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परगट सिंह व हरीश रावत का फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
परगट सिंह व हरीश रावत का फाइल फोटो

प्रदेश कांग्रेस के संगठन महासचिव परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस इंचार्ज हरीश रावत से करारा जवाब मिल गया है। परगट ने रावत के पंजाब विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में लड़ने के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। परगट ने यहां तक पूछा था कि हरीश रावत ऐसे फैसले लेने वाले कौन होते हैं। इस पर हरीश रावत ने कहा कि मुझे पता है कि मुझे कब क्या बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के नेताओं को धैर्य नहीं खोना चाहिए। रावत ने नसीहत भी दी कि पार्टी नेताओं से मीडिया के जरिए हम जितना कम बात करेंगे, उतना ही अगले साल पंजाब चुनाव जीतना आसान रहेगा।

हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस के पास सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी समेत कई राष्ट्रीय चेहरे हैं। वहीं, पंजाब में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा नवजोत सिद्धू व प्रगट सिंह समेत कई बड़े चेहरे हैं। इन सबके नाम का चुनाव में उपयोग किया जाएगा। हरीश रावत का यह बयान तब आया है, जब वह कुछ दिन बाद पंजाब दौरे पर आने वाले हैं। हालांकि इससे पहले ही वह पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू के ग्रुप के निशाने पर आ गए हैं। हरीश रावत पंजाब का कांटों भरा ताज छोड़ने के भी इच्छुक हैं लेकिन कांग्रेस हाईकमान इसके लिए राजी नहीं हो रहा।

परगट ने कहा था : खड़गे कमेटी में फैसला हो चुका, चुनाव सोनिया व राहुल की अगुवाई में
परगट सिंह ने हरीश रावत पर निशाना साधते हुए कहा था कि 2 महीने पहले खड़गे कमेटी के साथ मीटिंग में यह तय हो गया था कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 सोनिया गांधी व राहुल गांधी की अगुवाई में लड़े जाएंगे। फिर हरीश रावत ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई की बात क्यों कही? इसके बारे में रावत बताएं कि यह फैसला कब हुआ। परगट सिंह ने यहां तक कहा था कि नवजोत सिद्धू का अमृतसर में फैसले लेने की छूट न मिलने पर ईंट से ईंट खड़काने का बयान हरीश रावत के लिए ही था। हालांकि नवजोत सिद्धू ने पूरे मसले पर चुप्पी साध रखी है। फिर भी उनके करीबी सहयोगी लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

सिद्धू ग्रुप के निशाने पर इसलिए हरीश रावत
नवजोत सिद्धू जब कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाराज होकर घर बैठे थे तो हरीश रावत ही उन्हें मनाने गए। सिद्धू को पंजाब कांग्रेस प्रधान बनाने में भी रावत का अहम रोल रहा। हालांकि जब कैप्टन के खिलाफ बगावत हुई तो रावत ने उसे दिल्ली तक जाने देने के बजाय देहरादून में ठप कर दिया। वहीं पर रावत ने कैप्टन अमरिंदर की अगुवाई वाला बयान दिया था। जिसके बाद बागी मंत्री दिल्ली भी गए लेकिन कांग्रेस हाईकमान से नहीं मिल सके। उसके बाद सिद्धू ग्रुप का गुस्सा फूट पड़ा। फिर परगट सिंह खुलकर रावत के खिलाफ सामने आ गए।

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