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सिविल अस्पताल में गड़बड़ी के बाद टूटी नींद:कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे अस्पतालों का होगा ऑक्सीजन ऑडिट, डिमांड-सप्लाई दुरुस्त करने की कोशिश

जालंधर5 महीने पहले
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जालंधर के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की जांच करते ADC विशेष सारंगल। - Dainik Bhaskar
जालंधर के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की जांच करते ADC विशेष सारंगल।

सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में बर्बादी पकड़े जाने के बाद ऑक्सीजन की कमी को लेकर प्रशासन की नींद टूटी है। जिले में अब कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों का ऑक्सीजन ऑडिट होगा। इसके लिए DC घनश्याम थोरी ने दो टीमें गठित कर दी हैं। इस कवायद के जरिए गड़बड़ी रोक अस्पतालों में ऑक्सीजन की डिमांड व सप्लाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है।

यह बनाई टीमें

  • टीम 1- SMO बुंडाला डॉ. अशोक कौल, तलवंडी संघेड़ा के डॉ. गुरप्रीत सिंह व एक्साइज विभाग के ETO नीरज कुमार।
  • टीम 2- SMO करतारपुर डॉ. कुलदीप, उमरपुर के डॉ. परमिंदर व एक्साइज विभाग के ETO हरजोत सिंह बेदी।

यह काम करेंगी टीमें

यह ऑडिट टीमें अस्पताल में जाकर उनके यहां ऑक्सीजन की उपलब्धता की जांच करेगी। उनके यहां कितने मरीज भर्ती हैं और उनको रोजाना कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है। अभी ऑक्सीजन किस-किस सोर्स से आ रही है और उसका क्या व कहां इस्तेमाल हो रहा है। कोरोना मरीजों को छोड़ गैरजरूरी कामों के लिए इस्तेमाल की जा रही ऑक्सीजन पर रोक लगाई जाएगी।

इसलिए उठाया कदम

जालंधर में प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मामले सामने आ रहे हैं। पहले न्यू रूबी अस्पताल और फिर सर्वोदय अस्पताल में यह बात सामने आई थी कि अस्पताल प्रबंधकों ने ऑक्सीजन का स्टॉक कम होने की बात कही। अब प्रशासन पूरा रिकॉर्ड रखेगा कि किसके यहां कितनी ऑक्सीजन थी और उसे कितनी जरूरत थी। इससे प्राइवेट अस्पताल अफसरों या सरकार पर जिम्मेदारी डालकर बहानेबाजी नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा अगर कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो फिर उनकी जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

सिविल अस्पताल में मिली थी गड़बड़ी

ADC विशेष सारंगल की ऑडिट में सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में गड़बड़ी मिली थी। पता चला कि यहां रोजाना 410 सिलेंडर खपत हो रही थी। जांच की गई तो पता चला कि यहां ऑक्सीजन गैरजरूरी कामों के लिए इस्तेमाल हो रही थी। कुछ जगहों पर लीकेज भी मिली तो कहीं बेवजह ही ऑक्सीजन सिलेंडर बैड पर चलते मिले। इसके बाद इन्हें ठीक कराया गया तो डिमांड घटकर 214 सिलेंडर रह गई। कुल 190 सिलेंडर ऑक्सीजन बर्बाद हो रही थी। इसके बाद अब सभी अस्पतालों का ऑक्सीजन ऑडिट कराया जा रहा है।

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