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राहत की बात:पैरेंट्स मास्क पहनेंगे तो बच्चे खुद पहन लेंगे, इससे 80 फीसदी बचाव हाेगा, घरेलू नुस्खाें के प्रयाेग से बचें

जालंधर6 दिन पहले
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सार्वजनिक स्थलों पर बच्चों को लेकर आने वालों को अभी सजग रहना होगा। पार्कों में जब बच्चे खेल रहे हैं तो झूलों को जगह-जगह से आए लोगों के हाथ लगे होते हैं। वहां सैनिटाइजेशन का प्रबंध नहीं होता है। - Dainik Bhaskar
सार्वजनिक स्थलों पर बच्चों को लेकर आने वालों को अभी सजग रहना होगा। पार्कों में जब बच्चे खेल रहे हैं तो झूलों को जगह-जगह से आए लोगों के हाथ लगे होते हैं। वहां सैनिटाइजेशन का प्रबंध नहीं होता है।
  • बच्चों में शुगर-बीपी की बीमारी नहीं होती, ऐसे में ज्यादा बच्चे संक्रमित होते भी हैं तो वे एसिंप्टोमेटिक की श्रेणी में ही होंगे
  • डॉक्टरों ने सबसे ज्यादा जोर खान-पान दुरुस्त कर बच्चाें की इम्युनिटी बढ़ाने पर दिया, घर में कोई संक्रमित हो तो बच्चों की पहले जांच कराएं

केंद्रीय सेहत मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि काेराेना की तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में सतर्क रहकर कुछ गाइडलाइंस का पालन कर बच्चों को बचाया जा सकता है। डॉक्टरों ने सबसे ज्यादा जोर खान-पान पर जाेर देकर बच्चाें की इम्युनिटी बढ़ाने पर दिया है।

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। राहत की बात यह है कि बच्चों में शुगर और बीपी की बीमारी नहीं होती। इसके चलते अगर ज्यादा बच्चे संक्रमित होते भी हैं तो वह एसिंप्टोमेटिक की श्रेणी में ही होंगे।

लेकिन पैरेंट्स को बच्चों के खान-पान, उनकी दिनचर्या और उनके शरीर में हो रहे बदलाव पर ध्यान देना होगा। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि अगर घर पर कोई व्यक्ति संक्रमित होता है तो पहले दिन से ही बच्चों से दूरी बनाकर रखें और उनका भी कोरोना टेस्ट करवाएं।

इन बातों का रखें खास ध्यान, उम्र के हिसाब से बच्चे के वेट-हाइट का ध्यान रखें

बच्चों के माहिर डॉक्टर जितेंद्र का कहना है कि तीन से पांच साल तक के बच्चों को बुखार होना स्वाभाविक है। इससे शरीर में एंटीबॉडी बनती है। इसके अलावा अगर बच्चे को तीन से चार दिन तक या इससे ज्यादा बुखार रहता है तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर से इलाज करवाएं।

इसके अलावा बच्चों का घर में किसी प्रकार भी सेल्फ मेडिकेशन नहीं करनी है। इसके अलावा बच्चों की दिनचर्या में भी बदलाव रखें। कोशिश करें बच्चे एक जगह इकट्ठे होकर न खेलें ताकि अगर किसी को संक्रमण है तो आगे उसकी चेन डबल न हो सके।

कोई मल्टीविटामिन न दें, केवल मौसमी फ्रूट और सब्जियों पर जोर दें

डायटीशियन वैशाली बरारा का कहना है कि कई बार उनके पास माता-पिता आकर कहते हैं कि हम बच्चे को कौन सा मल्टीविटामिन दे सकते हैं। लोगों को यह समझना होगा कि मौसमी फ्रूट और वेजिटेबल में ही कुदरती मिनरल्स और फाइबर होते हैं जो बच्चों को देने चाहिए। इसके अलावा आने वाले दिनों में माता-पिता को बच्चों को पूरी तरह हाइड्रेट रखना है।

1. बच्चे को सादा पानी दें। इसके अलावा पानी में नींबू का रस भी दे सकते हैं।

2. शरीर में सोडियम और पोटेशियम की कमी पूरी करने के लिए नारियल का पानी भी दे सकते हैं।

3. मिल्क शेक या मैंगो शेक भी बच्चों को दे सकते हैं।

4. हफ्ते में 1 दिन घर में बना फास्ट फूड दे सकते हैं लेकिन उसमें वेजिटेबल ज्यादा हों।

5. बच्चों पर काढ़ा पिलाने या अन्य देसी नुस्खाें के प्रयाेग से बचें। जब तक डॉक्टर इसकी जरूरत न समझें।

काेराेना के गंभीर लक्षणाें की पुष्टि हाेने पर ही करवाएं सीटी स्कैन

रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर राहुल चोपड़ा का कहना है कि बच्चों की सीटी स्कैन तभी करवाएं, जब उनमें कम ऑक्सीजन या काेराेना के अन्य लक्षण दिखें। सिविल अस्पताल के डॉ. अमन सूद का कहना है कि छाेटी आयु में जब आप बच्चे को किसी चीज के बारे में बताते हैं ताे वे ताउम्र याद रखते हैं। बच्चों की दिनचर्या में बदलाव करें। मोबाइल स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से राेकें।

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