जालंधर के फाइनेंसर बाप-बेटे का जाल:7 लाख कर्ज के बदले प्रीत कार केयर के पार्टनर का प्लाट अपने नाम कराया, किश्त पूरी होने से पहले बेच डाला

जालंधर9 महीने पहले
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पुलिस ने शुरूआती जांच के बाद बाप-बेटे पर केस दर्ज कर लिया है। - Dainik Bhaskar
पुलिस ने शुरूआती जांच के बाद बाप-बेटे पर केस दर्ज कर लिया है।

मुंबई से जालंधर आई, व प्रीत कार केयर में पार्टनर फैमिली के भोलेपन का फायदा उठा एक फाइनेंसर बाप-बेटे ने पहले उनके प्लाट की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। 7 लाख कर्जा दिया और उसकी किश्त चुकाने का समय पूरा होने से पहले ही प्लाट किसी और को बेच दिया। मामले खुलने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस को शिकायत कर दी। जिसके बाद फाइनेंसर बाप-बेटे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

प्रीत कार केयर में की थी पार्टनरशिप

शिपटावर एनक्लेव फेज 3 में रहने वाली कुलविंदर कौर ने बताया कि घरेलू कारणों की वजह से वह पति हरबीर सिंह गिल के साथ मुंबई से जालंधर शिफ्ट हो गई। यहां वो पति के साथ हेल्थ व जनरल इंश्योरेंस का काम करने लगी। उनके ऑफिस के सामने इंद्रजीत सिंह प्रीत कार केयर चला रहे हैं। आपसी बातचीत के बाद उन्होंने इंद्रजीत सिंह से 7 लाख रुपए में पार्टनरशिप कर ली। उनके पास 7 लाख नकद नहीं दिए थे। इंद्रजीत ने उन्हें प्रकाश एनक्लेव खुरला किंगरा के रहने वाले प्राइवेट फाइनेंसर तरलोचन सिंह से मिलवाया।

मुंबई के थे तो लेन-देन का तरीका नहीं पता था, गिरवी की जगह रजिस्ट्री करा ली

कुलविंदर ने कहा कि वह मुंबई के रहने वाले थे और वहां लेन-देन का तरीका अलग था। इसी का फायदा उठा फाइनेंसर तरलोचन सिंह ने कहा कि वो अपने खुरला किंगरा की गिल कॉलोनी स्थित 4 मरले 112 फुट के प्लाट की रजिस्ट्री उसके नाम पर करवा दें। फिर वह लोन दे देगा। जब कर्जा उतर जाएगा तो प्लाट वापस उनके नाम पर ट्रांसफर कर देगा। उन्हें पता नहीं था जबकि प्लाट गिरवी रख या पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए ही कर्जा मिल सकता था।

रोज 1000 रुपए की 1,095 किश्तों में लौटा रहे थे पैसे

उन्होंने 5.45 लाख का चेक व 1.55 लाख नकद कर्जा ले लिया। इसे 3 साल में रोज 1000 रुपए के हिसाब से 1095 किश्तों में वापस लौटाना था। 1 मार्च 2019 से 18 मार्च 2020 तक वह रेगुलर किश्त देते रहे। उसके बाद कोरोना के चलते लॉकडाउन लग या। कारोबार बंद हो गया, लेकिन वो फाेन पर फाइनेंसर से बात करते रहे। तब उसने भरोसा दिया कि कोई बात नहीं, किश्त बाद में दे देना। इसके बाद तरलोचन का बेटा नरिंदरजीत सिंह उर्फ हैप्पी गैरेज में आया और उसके पति के सामने कहा कि कोई चिंता वाली बात नहीं है। वह बैठकर हिसाब कर लेंगे।

हिसाब के लिए बुलाया तो फाइनेंसर बोला- मैंने प्लाट बेच दिया

इसके बाद जब उन्होंने 5 अक्टूबर को फाइनेंसर को हिसाब-किताब के लिए बुलाया तो उसने कहा कि प्लाट बेच दिया है। पुलिस जांच में पता चला कि फाइनेंसर व उसके बेटे ने 3 लाख प्रति मरले के हिसाब से यह प्लाट बेच दिया। खास बात यह थी कि तब तक 3 साल का वक्त पूरा नहीं हुआ था और फाइनेंसर ने प्लाट के असल मालिक को कोई नोटिस भी नहीं दिया था। इसके अलावा पुलिस जांच में तरलोचन लोगों को ब्याज पर पैसे देने का कोई लाइसेंस भी पेश नहीं कर सका।