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जालंधर में फर्जी GST अफसर बन ब्लैकमेलिंग:ट्रांसपोर्टर संग मिलकर मोबाइल असेसरीज कारोबारी से माल छोड़ने के बदले ऐंठी रकम, दिल्ली से मंगवाया था सामान

जालंधर10 दिन पहले
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रुपए लेकर भी पूरा माल न छोड़ा तो पीड़ित कारोबारी पुलिस के पास पहुंचा। - प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
रुपए लेकर भी पूरा माल न छोड़ा तो पीड़ित कारोबारी पुलिस के पास पहुंचा। - प्रतीकात्मक फोटो

जालंधर में ट्रांसपाेर्टर व उसके फर्जी GST अफसर साथी ने माेबाइल असेसरीज कारोबारी को माल छोड़ने के बदले ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठ लिए। यह माल दिल्ली से आरोपी ट्रांसपोर्टर की ट्रांसपोर्ट से ही मंगवाया था। जब रुपए लेने के बाद भी आरोपियों ने पूरा माल नहीं दिया तो पीड़ित कारोबारी पुलिस के पास पहुंच गया। जिसके बाद पुलिस ने फर्जी सरकारी अफसर बनने व ठगी के आरोप में दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

दिल्ली से बुक कराया था ट्रांसपोर्ट में, जालंधर नहीं पहुंचा

शहीद भगत सिंह कॉलोनी में आर्य समाज मंदिर के पास रहने वाले राकेश कुमार ने बताया कि वह मोबाइल असेसरी सप्लाई का काम करते हैं। वह हरिओम कार्गो ट्रांसपोर्ट के जरिए पक्के बिलों पर दिल्ली से माल मंगवाते रहते हैं। 12 जून को उन्होंने नई दिल्ली में शास्त्री नगर के शिशु अस्पताल के पास सूर्या एंटरप्राइजेज से मोबाइल असेसरीज मंगवाई थी। उसने हरिओम कार्गो की दिल्ली ब्रांच से जालंधर के लिए 5 बॉक्स बुक कराए थे। जिन्हें 2 दिन बाद यानी 14 जून को उन्हें मिल जाना चाहिए था।

ट्रांसपोर्टर ने पहले जम्मू जाने की बात कही, फिर बोले- GST ने जब्त कर लिया

तय दिन तक सामान नहीं मिला तो उन्होंने कार्गो के मालिक राकेश कुमार उर्फ टोनी निवासी चहार बाग, फगवाड़ा गेट को फोन किया। उसने पहले कहा कि उनका माल ट्रांसपोर्ट कर्मचारी की गलती से जम्मू चला गया है। बार-बार कॉल करने पर राकेश टोनी उन्हें गुमराह करने लगा। इसके बाद उन्हें कहीं से पता चला कि राकेश टोनी ने गांधी नगर के इंदरजीत की मदद से उनका माल GST विभाग को पकड़वा दिया है। वह उस पर दबाव डालकर मोटी रकम ऐंठने के चक्कर में हैं। उनका माल GST भवन में पड़ा हुआ है।

GST अफसरों ने कहा, हमने जब्त नहीं किया, फिर आई फर्जी अफसर की कॉल

इसके बाद वह 21 जून को जालंधर के GST भवन में गया। वहां अफसरों ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई माल नहीं पकड़ा है। उसी दिन उसे इंद्रजीत का फोन आया। उसने कहा कि मैं GST भवन से बोल रहा हूं और वहीं नौकरी करता हूं। उसने बड़े अफसरों व राजनीतिक नेताओं के नाम लेने शुरू कर दिए। उसने कहा कि वही उसका काम करा सकता है। उनका माल भी उसी ने पकड़ा है। अगर माल वापस लेना है तो मुझे आकर मिलो।

बाहर मिला फर्जी अफसर, माल छोड़ने के बदले मांगे 18 हजार

इसके बाद उन्हें राकेश टोनी का फोन आया कि उसे इंद्रजीत का फोन आया कि नहीं? अगर नहीं आया तो आ जाएगा क्योंकि उनका माल GST भवन से वही छुड़वा सकता है। उसने कहा कि अगर सैटिंग न की तो फिर दूसरे व्यापारियों की तरह उसका माल भी वहीं दफ्तर में बर्बाद हो जाएगा। 22 जून को इंद्रजीत उसे इंडो कनेडियन ऑफिस के बाहर मिला। उसने माल छुड़वाने के बदले 18 हजार रुपए मांगे। उन्होंने कहा कि मुझे माल की ज्यादा जरूरत थी लेकिन उसे समझाया कि मेरा इतना बड़ा काम नहीं है और न ही कोई गलत काम किया है।

10 हजार में हुई सेटलमेंट, 5 हजार देकर भी पूरा माल नहीं दिया

इसके बाद 10 हजार रुपए में उनकी सेटलमेंट हो गई। इंद्रजीत ने उसे गांधी नगर में अपने मोहल्ले में बुला लिया। वहां उसने इंद्रजीत को 5 हजार रुपए कैश दे दिए। इसके बाद उसे 2 बॉक्स मिल गए लेकिन 3 बॉक्स अभी भी नहीं मिल पाए। जिसके बाद उसने पुलिस को शिकायत कर दी।

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