कोरोना की मार:दो माह में हरनामदासपुरा के श्मशानघाट में 600 तो कोट किशन चंद में 531 लोगों का किया गया अंतिम संस्कार

जालंधर5 महीने पहलेलेखक: हेमंत कुमार
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शहर के एक श्मशानघाट में परिजनों का संस्कार करते हुए लोग। - Dainik Bhaskar
शहर के एक श्मशानघाट में परिजनों का संस्कार करते हुए लोग।
  • लकड़ी, मुलाजिमों और बाकी संसाधनों का खर्च बढ़ा, दानी सज्जनों की मदद से प्रबंध कर रही हैं कमेटियां

कोरोना काल में श्मशानघाटों में लकड़ी के खर्च में तीन गुना तक इजाफा हुआ है। बड़ी संख्या में कई परिवारों में एक तरफ आर्थिक तंगी आई, दूसरी तरफ अधिकतर मेंबर महामारी के दौर में बीमार पड़ गए व इसी दौरान किसी न किसी का निधन हो गया।

एकसाथ आए कई संकटों से अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी खरीदने तक का पैसा नहीं है। ऐसे में जितनी जिसकी ताकत हो, वो उतने की पर्ची कटवाकर संस्कार करता है। लकड़ी का बचा खर्च श्मशानघाट कमेटी उठाती है।

ये खर्च सिटी के दानी सज्जन दान देकर उठा रहे हैं। भावुक पलों में लोगों के काम आने वाले लोग लंबे समय से श्मशानघाट कमेटियों से जुड़े हैं। वे कोरोना काल में सेवा भी कर रहे हैं, लेकिन पीछे रहकर।

कोट किशन चंद : दानी गुप्त रूप से उठा रहे खर्च

मानव सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित अंतिम स्थान स्वर्ग आश्रम कोट किशन चंद के मैनेजिंग ट्रस्टी तरसेम कपूर ने बताया कि लकड़ियों की खपत बढ़ गई है। मई में 531 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।

एक समय ऐसा आया कि यहां लकड़ियों की कमी होने लगी। आखिर समाज सेवक मदद के लिए आगे आए। श्मशानघाट में अस्थियों की गिनती ज्यादा होने पर उन्हें हरिद्वार में विधि विधान से जल प्रवाह करवा दिया जाता है।

जिन कोरोना संक्रमितों का संस्कार एलपीजी सिस्टम से किया गया, उनके लिए समय की पाबंदी नहीं रखी लेकिन पारंपरिक संस्कार के लिए शाम 5 बजे के बाद का समय रखा। श्मशानघाट में 10 सेवादार हैं, जो कुंड में लकड़ी रखने, ड्राइवर के तौर पर काम करते हैं। यहां करीब 100 लाॅकर हैं।

हरनामदासपुरा : इतने संस्कार हुए कि सेवादार भी हड़बड़ा गए

शिवपुरी प्रबंधक कमेटी हरनामदासपुरा श्मशानघाट के मैनेजर संदीप मिश्रा ने बताया कि अप्रैल से मई तक मृतकों की संख्या 600 के करीब थी। दो महीने काफी भयानक निकले। एक ही दिन में 18 से 20 संस्कार हुए।

श्मशानघाट में दो सेवादार, दो ड्राइवर, 20 कुंड और अस्थियां रखने वाले 73 लाॅकर हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों ही एक ही दिन में लगभग 22 संस्कार हुए तो लकड़ी रखने वाले सेवादार ही हड़बड़ा गए।

सुबह से शाम 4 बजे तक नॉर्मल संस्कार और 4 से 5 बजे तक कोरोना पॉजिटिव लोगों के संस्कार के लिए समय निर्धारित कर दिया गया। इसके अलावा शिवपुरी में लोगों की कसरत के लिए अखाड़ा बनाया गया है, जिसमें मशीनी और देसी वेट शामिल किया गया है।

मॉडल टाउन श्मशानघाट : हर दिन दिल डर जाता था

पंडित विजय कुमार ने बताया कि यहां पर 11 कुंड, 2 एलपीजी क्रिमेशन मशीनें, 7 डी-फ्रीजर हैं। पिछले दिन काफी डराने वाले थे। श्मशानघाट में संस्कारों की गिनती ज्यादा होने लगी तो हमारे यहां 11 कुंड भी कम लगने लगे।

आखिर कुंडों के बाहर संस्कार करना पड़ा। जून में अंतिम संस्कारों की संख्या कम होने लगी। उन्होंने बताया कि किसी भी संस्कार के लिए एक या आधे घंटा पहले ही कुंड में लकड़ी रख दी जाती थी, जिससे संस्कार करने वाले लोगों का समय को बचाया जा सके।

कई बार तो लकड़ी रखने वाले सेवादार भी दुखी हो जाते थे। कई बार तो ऐसे शव आए, जिनके अपने ही उन्हें हाथ तक नहीं लगा सके। सेहत विभाग ने ही संस्कार किया और लोग अपने प्रियजनों के चेहरे तक नहीं देख पाए।

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