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ब्लैक फ्राइडे !:बिना अफसरों के हुई जालंधर निगम हाउस की विज्ञापन घोटाला स्पेशल बैठक, मेयर बोले- गैरहाजिर रहने वालों पर कार्रवाई होगी

जालंधर4 महीने पहले
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निगम हाउस की बैठक में उपस्थित मेयर जगदीश राजा व निगम कमिश्नर करनेश शर्मा। - Dainik Bhaskar
निगम हाउस की बैठक में उपस्थित मेयर जगदीश राजा व निगम कमिश्नर करनेश शर्मा।
  • अफसरों व मेयर के बीच बढ़ा विवाद, सिर्फ निगम कमिश्नर व ज्वाइंट कमिश्नर ही रहे हाजिर, पार्षदों ने जताया विरोध

चुने हुए जनप्रतिनिधियों व सरकार के नियुक्त कर्मचारियों के बीच खींचतान के बीच नगर निगम के इतिहास में शुक्रवार का दिन 'ब्लैक डे' की तरह रहा। मामला कोर्ट में होने के बावजूद मेयर ने विज्ञापन घोटाले को लेकर निगम हाउस की स्पेशल बैठक बुला ली लेकिन उसमें कोई भी अफसर हाजिर नहीं हुआ। निचले स्तर के सभी अफसरों ने इसका बहिष्कार कर दिया। जिसकी कर्मचारियों की यूनियन पहले ही घोषणा कर चुके थे। हाउस की बैठक में सिर्फ निगम कमिश्नर करनेश शर्मा व जॉइंट कमिश्नर हरचरण सिंह ही हाउस की बैठक में आए। इस दौरान मेयर जगदीश राज राजा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गैरहाजिर रहने वाले अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेयर जगदीश राजा ने कहा कि विज्ञापन ब्रांच देख रहे अफसर से भी कुछ विभाग वापस लिए जाएंगे।

निगम हाउस में उपस्थित पार्षद
निगम हाउस में उपस्थित पार्षद

मेयर ने चर्चा से किया इन्कार तो पार्षदों ने जताया विरोध

माडल टाउन में विज्ञापन घोटाले को लेकर रेडक्रास भवन में निगम हाउस की स्पेशल बैठक बुलाई गई थी। मेयर राजा ने कहा कि यह मामला कोर्ट में चल रहा है। इसलिए उसके ऊपर चर्चा नहीं हो सकती। इसको लेकर पार्षद भड़क उठे। उन्होंने कहा कि पहले ही इसका एजेंडा भेजा गया था। अगर चर्चा नहीं हो सकती थी तो पहले लीगल राय लेनी चाहिए थी। पार्षदों के गुस्से को देखते हुए सभी पार्षद एकजुट होकर मेयर के सामने आ गए। जिसके बाद मेयर ने विज्ञापन टेंडर को रद्द करने के आदेश दे दिए।

विज्ञापन कमेटी का आरोप : 4 करोड़ का घोटाला हुआ

विज्ञापन एडहॉक कमेटी की चेयरपर्सन नीरजा जैन ने मॉडल टाउन में विज्ञापन साइटों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अनियमितता पकड़ी कि तय संख्या से ज्यादा यूनीपोल लगे हैं और उनका साइज भी बड़ा है। उन्होंने इसमें करीब 4 करोड़ के घोटाले की आशंका जताई थी।

अफसरों का तर्क : जवाब दे चुके, हाउस अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रहा

इस मामले में निगम अफसरों का तर्क है कि विज्ञापन कांट्रैक्ट को लेकर जो भी सवाल थे, उनके जवाब पहले ही लिखित में मेयर को दिए जा चुके हैं। ऐसे में इस तरह विज्ञापन के सिंगल एजेंडा पर निगम हाउस की बैठक बुलाना अवैध है।

पहले भी आमने-सामने हो चुके पार्षद व अफसर

निगम के अफसर व पार्षद पहले भी आमने-सामने हो चुके हैं। कुछ दिन पहले निगम अफसरों ने यह कहकर हाउस में आने से इन्कार कर दिया था कि वहां व्यक्तिगत तौर पर उनको बेइज्जत किया जाता है। उन्होंने कमिश्नर से मांग की थी कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अगर पार्षद का कोई सवाल है तो वो पहले लिखित में दें न कि मौके पर ही जवाब मांगें। हालांकि इससे पहले भी बिल्डिंग इंस्पेक्टर के मुद्दे पर निगम के अफसर हाउस का बहिष्कार कर चुके हैं।