संस्मरण:अंग्रेजों की पुलिस की 2 पैसे रिश्वत के खिलाफ, जालंधरियों ने बनाई थी तुम-तुम एका एसोसिएशन

जालंधर4 महीने पहले
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एडवोकेट दीवान चंद महेंद्र - Dainik Bhaskar
एडवोकेट दीवान चंद महेंद्र
  • जालंधर के आजादी संग्राम के इतिहास को याद किया 92 साल के एडवोकेट दीवान चंद महेंद्रू ने
  • आजादी के संघर्ष का केंद्र था जालंधर अंग्रेजों ने सबसे पहले बिछाया था रेल ट्रैक

जालंधर की सबसे अच्छी बात क्या है? मैं कहूंगा- भाईचारा और गलत चीज का विरोध करने की पीढ़ी दर पीढ़ी ताकत। हमारा परिवार सिटी रेलवे स्टेशन के साथ रहता है। जहां लगभग 120 साल पुरानी मंडी फैंटनगंज है। मैंने बचपन से लेकर काॅलेज तक यहां व्यापारियों को अलग-अलग सामान की खरीद-फरोख्त करते देखा। अंग्रेज ट्रेन के जरिए लोकल मार्केट में सामान लाते और यहीं से ले भी जाते थे। केरोसीन ऑयल ट्रेनें ही यूरोप से जालंधर लाई थीं। आगे ये ट्रेनें जालंधर का माल लाहौर तक ले जाती थीं।

जालंधर की आबादी बामुश्किल 50 हजार रही होगी लेकिन आजादी संग्राम की एक्टिविटी का केंद्र होता था। अंग्रेजों ने जालंधर से ब्यास तक पहले रेल ट्रैक बिछाया था, फिर फिल्लौर को जोड़ा व 1870 में सतलुज के पार ट्रेनें दौड़ने लगीं। इसी कारण जालंधर कैंट बना व कैंट के कारण आजादी संग्राम की एक्टिविटी यहां मजबूत थी। अंग्रेज पुलिस के लोग 2 पैसे लोगों से रिश्वत लिया करते थे। फिर जालंधर के लोगों ने तुम-तुम एका एसोसिएशन बुलाई। यानी की दो लोगों की तरफ इशारा किया तुम... तुम और फिर सबको मिलाकर एकजुटता हुई। इस एसोसिएशन ने फैसला किया कि वह 2 पैसे क्यों दें? इस एसोसिएशन का गठन 1921 के लगभग हुआ था। मुझे परिजनों ने बताया कि ये सभा जालंधरियों की एकजुटता की बड़ी सफलता था।

एतिहासिक मंडी फैंटनगंज में हिंदू-मुसलमान कभी नहीं झगड़े

मंडी फैंटनगंज में हिंदू व मुसलमान मिलकर व्यापार करते थे। एक भी बार मैंने जिंदगी में किसी को झगड़ते नहीं देखा। जब विदेशों में बसे पंजाबियों ने गदर पार्टी की स्थापना की तो जिस कामागाटा मारू जहाज को रोका गया था उसे जुड़े इंकलाबी अरजन सिंह, इंदर सिंह प्रेरणा थे। इंकलाबियों में बरकत अली को भी मैं नमन करता हूं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह का गांव खटकड़कलां भी कभी जालंधर का ही हिस्सा था, बाद में नया जिला नवांशहर (शहीद भगद सिंह नगर) बन गया। इमाम नासिर मस्जिद में दोनों धर्मों के धार्मिक स्थान थे।

गांधी जी ने बनवाया था 25 लड़कियों का चरखा क्लब

अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चला रहे महात्मा गांधी जालंधर आए। ये बात 1921 की है। उन्होंने जालंधर की 25 लड़कियों का चरखा क्लब बनवाया था। लाला लाजपत राय भी जालंधर आए। उन्होंने बेटियों को पढ़ाने का संदेश दिया। युवाओं की जागृति के लिए अहम योगदान दिया। इस तरह जालंधर आजादी के संग्राम में अहम यादें अपनी गोद में समेटे है। जब आप बस्ती शेख की पुरानी गलियों, किला मोहल्ला की चढ़ाई चढ़ें, सिटी रेलवे स्टेशन के पुराने हिस्से देखें तो अपने शहर की बेमिसाल विरासत को याद कीजिए। गदर मूवमेंट की यादें आपको देश भगत यादगार हाल में मिल जाएंगे।

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