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जालंधर में 56 लाख का घोटाला:शिक्षा विभाग के जूनियर सहायक ने महिला सरपंच और पंच के साथ मिलकर बनाई अवैध कमेटी, सरकारी फंड का किया निजी इस्तेमाल

जालंधर4 महीने पहले
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मामले की भनक उच्च अफसरों को लगी तो पूरा घोटाला उजागर हुआ। - प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
मामले की भनक उच्च अफसरों को लगी तो पूरा घोटाला उजागर हुआ। - प्रतीकात्मक फोटो
  • मामला अफसरों तक पहुंचा तो तीनों के खिलाफ दर्ज कराया गया केस

शिक्षा विभाग में 56 लाख से ज्यादा का घोटाला उजागर हुआ है। जिसे विभाग के जूनियर सहायक आइजक मसीह ने ही गांव की तत्कालीन सरपंच पवनदीप कौर और पंच जसपाल सिंह के साथ मिलकर अंजाम दिया। इन आरोपियों ने जमीन एक्वायर करने के बदले मिली रकम को निजी तरीके से इस्तेमाल कर डाला। यही नहीं, बिना किसी मंजूरी के कमेटी बनाकर यह घोटाला किया गया। पोल खुलने के बाद मामला अफसरों तक पहुंचा तो जांच के बाद तीनों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया गया है।

इस तरह किया घोटाला

  • सरकारी प्राइमरी स्कूल आलोवाल की जमीन नेशनल हाइवे के लिए एक्वायर कर ली गई थी। इसके बदले SDM आफिस से मुआवजे की रकम स्कूल मेंटीनेंस कमेटी(SMC) को दी जानी थी। इसके बावजूद यह रकम तत्कालीन सरपंच पवनदीप कौर की बनाई नई कमेटी को दे दी गई। इस कमेटी की मंजूरी न तो ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग से ली गई और न ही शिक्षा विभाग से। इसमें तत्कालीन पंच जसपाल सिंह भी शामिल था।
  • स्कूल के लिए पंचायती जमीन पर बनाई बिल्डिंग का नक्शा शिक्षा विभाग की हिदायतों पर अलग-अलग अथॉरिटीज से पास करवाना चाहिए था। सरपंच व उसकी टीम ने अपने स्तर पर ही बिल्डिंग का निर्माण कर उसकी अदायगी भी कर दी। जिसमें काफी गड़बड़ियां पाई गई।
  • शिक्षा विभाग का जूनियर सहायक आइजक मसीह भी इस गड़बड़ी करने वाली कमेटी का मेंबर था। हालांकि कमेटी में शामिल होने से पहले उसने शिक्षा विभाग या दूसरी किसी अथॉरिटी से कोई मंजूरी नहीं ली। इस अवैध कमेटी ने सरकारी फंड को निजी धन समझकर मनमर्जी से खर्च किया। जूनियर सहायक आइजक मसीह ने अफसरों की मंजूरी के बगैर चैक जारी किए, जबकि वह ऐसा नहीं कर सकता था।

जूनियर सहायक को निलंबित करने की सिफारिश

घोटाला उजागर होने के बाद अब पर केस दर्ज करने के साथ शिक्षा विभाग का कर्मचारी होने के नाते उस पर नियमों के उल्लंघन का आरोप साबित हुआ। जिसके लिए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गई।

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