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  • Keep In Mind That The Measles Number Is Not Wrong In The Registry, If The Correction Has To Be Done Then 1% Of The Cost Of The Registry Will Have To Be Paid.

रजिस्ट्री में रखें ध्यान:खसरा नंबर गलत न हो, करेक्शन करवानी पड़ी तो रजिस्ट्री की कीमत का 1% अदा करना होगा

जालंधर2 महीने पहलेलेखक: प्रवीण पर्व
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  • 500 रुपए का स्टांप, ई-फर्द केंद्र में फर्द की फीस, तहसीलदार की अपाॅइंटमेंट फीस 1000 रुपए, नंबरदार, डीडराइटर की फीस अलग से देनी होगी

जमीन-जायदाद की रजिस्ट्रियां करवाते हुए लोग अमूमन क्या गलती कर जाते हैं? आमतौर पर लोग खसरा नंबर गलत लिखे जाने पर उसे पकड़ नहीं पाते। अपने नाम के स्पैलिंग मिस्टेक, एड्रेस आदि तो सभी पढ़ लेते हैं लेकिन खसरा नंबरों की गलती बाद में बहुत महंगी पड़ती है। तहसील में हर हफ्ते ऐसा कोई न कोई केस आ ही जाता है, जिसमें रजिस्ट्री में स्पैलिंग मिस्टेक छोड़ दिए गए हैं। इसे बाद में ठीक करने का प्रोसीजर सरकारी फीसों के लिहाज से बहुत महंगा है। फिर कागजों के सारे प्रोसीजर वही करने पड़ते हैं, जो पहले रजिस्ट्री पर किए जाते हैं।

एक्सपर्ट व्यू : डीड से करना चाहिए फर्द पर लिखे खसरा नंबरों का मिलान
रेवेन्यू मामलों के जानकार बताते हैं कि रजिस्ट्रियों में गलतियों को बाद में ठीक करने के प्रोसीजर की जानकारी 10 में से 8 लोग नहीं रखते हैं। एडवोकेट अमृता पाल कौर बताती हैं कि जब प्राॅपर्टी की सेल डीड करा रहे होते हैं तो उसमें सभी तथ्य ध्यान से पढ़ने चाहिएं।

डीड राइटर जब डीड लिखते हैं तो इसकी फाइनल काॅपी बनाने से पहले इसे बेचने व खरीदने वाले को पढ़ने के लिए दे देते हैं। इसी दौरान फर्द पर लिखे खसरा नंबरों का मिलान सेल डीड से कर लेना चाहिए। इसके बाद गलती ठीक करनी है तो तहसील में ततिमा नामा तैयार किया जाता है, जिसे आम भाषा में सप्लीमेंट्री रजिस्ट्री कहा जा सकता है। जितनी रकम में प्रापर्टी में सौदा हुआ था, उसका 1 फीसदी सरकार फीस लेती है। मान लीजीए, आपका मकान 17 लाख का है तो 17000 रुपए फीस बनेगी।

आइए जानें... क्या है ततिमा नामा करवाने का प्रोसेस

  • सबसे पहले ततिमा नामा का ड्राफ्ट तैयार किया जाता है। प्रशासकीय कांप्लेक्स में डीडराइटर से ये सेवा मिल जाती है। फोटो चस्पा की जाती हैं।
  • समें सबसे पहले देखा जाता है कि फर्द में प्राॅपर्टी को लेकर सही तथ्य क्या हैं। फिर ततिमा नामा में क्लियर किया जाता है कि कहां गलती से जानकारी दर्ज हुई थी।
  • ततिमा नामा में साफ साफ लिखा जाता है कि कौन-सा खसरा नंबर गलत टाइप हुआ व रिकाॅर्ड के अनुसार क्या सही है। फिर सही खसरा नंबर या फिर गलत हुई अन्य जानकारी की जगह सही जानकारी क्या है, वो दर्ज किया जाता है।
  • ततिमा नामा 500 रुपए से स्टांप पर तैयार किया जा रहा है। इसके साथ सरकार को जमा कराई फीस की रसीद चस्पा की जाती है।
  • फिर सेल डीड में विक्रेता व खरीददार के सिग्नेचर होते हैं, जिसमें आधार नंबर आदि दर्ज किए जाते हैं। गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं।
  • इसके बाद सब रजिस्ट्रार दफ्तर में इसे दर्ज कराना होता है, जिसके लिए वहां का स्टाफ रिकाॅर्ड चेक करता है। उनकी तस्दीक के बाद ततिमा नामा दर्ज हो जाता है।
  • जिसका रिकाॅर्ड व प्रतिकाॅपी सब रजिस्ट्रार के दफ्तर में दर्ज रहती है, वहां का डॉक्यूमेंट नंबर ततिमा नामा पर लिखा जाता है। सब रजिस्ट्रार के पास आवेदक की हाजिरी होती है, काउंटर सिग्नेचर करते हुए सब रजिस्ट्रार के कैमरा में हाजिरी की तस्वीर दर्ज होती है।

बैंक के पास केस पहुंचा तो एक्सपर्ट ने पकड़ी गड़बड़ी
केस-1 : 17 हजार रुपए भुगते
अशोक विहार में रहने वाली बलजीत कौर बताती हैं कि चार साल पहले उन्होंने रजिस्ट्री करवाई थी। उसमें एक खसरा नंबर गलत दर्ज हो गया था, जोकि इंतकाल में सही था। उन्हें अब पता चला क्योंकि वे अपने घर की दूसरी मंजिल बनवाने के लिए हाउसिंग लोन लेना चाहते थे। बैंक ने जब लीगल ओपीनियन के लिए दस्तावेज चेक करवाए तो खसरा नंबर गलत होने की जानकारी मिली। बैंक के वकील ने ही बता दिया था कि इंतकाल में खसरा नंबर सही है, लेकिन रजिस्ट्री में गलत दर्ज है।
आखिर उन्हें रजिस्ट्री की एक फीसदी कीमत अदा करके खसरा नंबर ठीक करवाना पड़ा।

केस-2 : प्रॉपर्टी बेची तो खुलासा
वीनस वैली में रहने वाले एस कुमार ने बताया कि उन्होंने 2005 में प्लाॅट खरीदा था। उस पर काफी कंस्ट्रक्शन भी करवा दी। अब वे प्राॅपर्टी बेचना चाहते थे तो पता लगा कि रजिस्ट्री तो पूरी जमीन के मुताबिक हुई है, लेकिन फर्द में कुछ खसरा नंबर कम चढ़े थे। इस हिसाब से उनकी जमीन इंतकाल में कम हो गई थी जबकि रजिस्ट्री में पूरी थी। जिस पार्टी ने उनसे प्राॅपर्टी लेनी थी, उन्होंने बैंक से लोन लेना था। बैंक ने दस्तावेज चेक करवाए तो उन्हें गड़बड़ी का पता लगा। अब वे ततिमा नामा करवाकर रिकाॅर्ड ठीक करवाएंगे। इसके लिए उन्हें दोबारा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

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