ऑनलाइन ठगी:एनएचएस अस्पताल के नाम पर बेचे जा रहे थे किडनी और जिगर, वेबसाइट बनाकर दे रहे अपॉइंटमेंट; पर्चा दर्ज

जालंधरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • अस्पताल के मैनेजर ने मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया पर हुई चैट पुलिस को सौंपी
  • मुंबई के दो लोगों से हुई ठगी, यूपी की निकली आरोपी की लोकेशन

कपूरथला रोड स्थित एनएचएस अस्पताल के नाम पर ऑनलाइन मानव अंग बेचने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। गैंग अस्पताल के नाम पर वेबसाइट बनाकर मुंबई के दो लोगों से ठगी कर चुका है। अस्पताल प्रबंधन के नोटिस में जब मामला आया तो उन्होंने शिकायत देकर पर्चा दर्ज करवाया है।

थाना-2 में डॉ. विक्टोरिया प्रसाद के खिलाफ आईपीसी की धारा 419 व 420 और आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) के तहत पर्चा दर्ज कर जांच शुरू की गई है। हालांकि मामले को लेकर पुलिस चुप है। गैंग मुंबई के रहने वाले दो लोगों से ठग चुका है। पुलिस ने ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर की लोकेशन ली तो वह यूपी की निकली। पुलिस गैंग को पकड़ने के लिए साइबर सेल की मदद ले रही है।

मरीज के परिजनों को दिया अकाउंट नंबर, रसीद भी भेजी

पुलिस को दी शिकायत में कपूरथला रोड स्थित एनएचएस अस्पताल के मैनेजर मनप्रीत सिंह ने कहा कि एनएचएस अस्पताल डॉ. विभा चितकारा, डॉ. रिंकू अग्रवाल और डॉ. शैली अग्रवाल पार्टनरशिप में चला रहे हैं। अस्पताल में डॉ. नवीन चितकारा, डॉ. सुभाग अग्रवाल और डॉ. संदीप गोयल काम करते हैं। मैनेजर ने कहा- खुद को डॉ. विक्टोरिया प्रसाद बताने वाला शख्स अस्पताल के नाम की वेबसाइट बनाकर किडनी, जिगर और अन्य मानव अंग बेचने का गैरकानूनी धंधा चला रहा है। उनके नोटिस में मामला तब आया, जब किडनी खरीदने के लिए डॉ. प्रसाद के खाते में एक मरीज के रिश्तेदार दीपक वाधवानी ने पेमेंट की। शिकायत वे पहले कर चुके थे, जिस की जांच एसीपी (सेंट्रल) कर रहे हैं। हाल ही में मुंबई निवासी रोहित कराजे के साथ भी ऐसी ही ठगी की गई।

ठग एडवांस लेने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का अकाउंट नंबर देता है, जिसमें मरीज के रिश्तेदार एडवांस में पेमेंट डाल कर बुकिंग करते हैं। एडवांस पेमेंट के तौर पर करीब 6 हजार रुपए ही लेता है। अंग खरीदने के इच्छुक मरीज के रिश्तेदार साइट पर जाकर जरूरत बताते हैं तो ठग उन्हें मोबाइल नंबर देता है, जिस पर मरीज और ठग के बीच में सोशल मीडिया के जरिये बातचीत होती है। ठग खुद भी डाॅक्टर की तरह ही बात करता है। मरीज के रिश्तेदार जब उसके जाल में फंस जाते हैं तो वह एडवांस पेमेंट के लिए बैंक अकाउंट देता है, जिसमें मरीज के रिश्तेदार ऑनलाइन पेमेंट कर देते हैं। पेमेंट की रसीद भी ऑनलाइन दी जाती है। अस्पताल के मैनेजर ने मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया पर हुई चैट पुलिस को सौंपी है।

खबरें और भी हैं...