भास्कर पड़ताल:जिन विधायकों के बेटों को ‘तरस’ पर नौकरी, उनके परिवार करोड़पति

जालंधर5 महीने पहले
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विधायक फतेहजंग का बेटा - Dainik Bhaskar
विधायक फतेहजंग का बेटा
  • 34 साल बाद विधायकों के बेटों को अफसर बनाने के फैसले से कांग्रेस दोफाड़, कैबिनेट भी बंटी

कैप्टन सरकार द्वारा हाल ही में कादियां के विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा और लुधियाना के हलका नार्थ के विधायक राकेश पांडेय के बेटों को नौकरी के एलान के बाद सूबे में जहां कांग्रेस दोफाड़ हो गई है, वहीं इस मुद्दे पर कैबिनेट भी बंट गई है। फैसले को लेकर कांग्रेस के कई मंत्री, विधायक अपनी ही सरकार का विरोध कर रहे हैं।

इनका कहना है कि करोड़पति विधायकों के बेटों को नौकरी देना उचित नहीं, इससे पार्टी की साख गिरेगी। गौरतलब है कि फतेहजंग सिंह बाजवा 2007 में श्रीहरगोबिंदपुर से और 2017 में कादियां से विधायक रहे और 2012 में यहीं से इनकी पत्नी विधायक बनीं।

वहीं, विधायक राकेश पांडेय 6 बार विधायक बन चुके हैं। दोनों ही विधायक करोड़पति हैं। कांग्रेस विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा के बेटे अर्जुन प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर बनाया गया है और विधायक राकेश पांडेय के पुत्र भीष्म पांडेय को नायब तहसीलदार बनाया गया। आइए जानते हैं दोनों बेटों और उनके परिवार के बारे में...

इंस्पेक्टर की नौकरी पाने वाले अर्जुन बाजवा करते हैं मॉडलिंग, लग्जरी गाड़ियों का शौक

विधायक फतेहजंग का बेटा
अर्जुन ‘बैंड ऑफ महाराजा’ फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू भी करेंगे....हिमाचल के प्रतिष्ठित लॉरेंस स्कूल से पढ़ाई करने वाले अर्जुन बाजवा को मॉडलिंग का शौक है। शुरू में उन्होंने मॉडलिंग की। कई फैशन मैगजीन के कवर मॉडल भी बने। पर उनकी दिलचस्पी सिल्वर स्क्रीन पर डेब्यू करने की थी। बॉलीवुड फिल्म में उन्हें अभिनय का एक मौका मिला। उन्होंने फिल्म ‘सिंह इज ब्लिंग’ में प्रभुदेवा के सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। वे ऑस्कर नाॅमिनेटेड निर्देशक गिरीश मलिक द्वारा निर्देशित ‘बैंड ऑफ महाराजा’ से बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं। फिल्म 2020 में रिलीज होनी थी लेकिन इसकी डेट बढ़ गई। कई औरों के बेटों को भी मिली है नौकरी : फतेहजंग
फतेहजंग ने स्पष्ट किया कि सरकारी नियमों के मुताबिक यह नौकरी कैबिनेट की स्वीकृति के पश्चात दी गई है। उन्होंने कहा कि तरस के आधार पर कई परिवारों को भी नौकरी दी गई थी।

विधायक राकेश पांडेय का बेटा
नायब तहसीलदार बनने वाले भीष्म पांडेय ग्रेजुएट हैं, सामाजिक कार्यों में लगे हैं

तरस के आधार पर नायब तहसीलदार बनाए गए लुधियाना के हलका नार्थ के विधायक राकेश पांडेय के पुत्र भीष्म पांडेय ने ग्रेजुएशन की हुई है और पिता के साथ ही सामाजिक कार्यों में लगे रहते हैं। विधायक राकेश पांडेय की ओर से 2012 में नामाकंन पत्र दाखिल किया गया था, तब उनके पास कैश, बैंक डिपॉजिट और अन्य मिलाकर 1.40 करोड़ की चल प्रॉपर्टी थी। वहीं, 2017 में संपत्ति 3.26 करोड़ हो गई है।
शोर मचाने वाले आतंक के दौर में भाग गए थे : राकेश
विधायक पांडेय बोले- उनके बेटे को ही नहीं, बल्कि कई परिवारों को नौकरियां मिली है। आज जो शोर मचा रहे हैं वो अपने ही लोगों की कुर्बानियों को भूल चुके हैं । शोर मचाने वाले आतंक के दौर में भाग खड़े हुए थे।

भास्कर इंटरव्यू में नौकरियों के सवाल पर बोले सिद्धू- क्या विधायकों के बेटों को नौकरी से पहले मेरिट बनी
-नवजोत सिद्धू- मैं पूछना चाहता हूं कि क्या विधायकों के बेटों को नौकरी देने से पहले मेरिट बनी? क्या ये जरूरतमंदों की कतार में पहले खड़े थे या आखिर में थे? क्या यह ऐसे परिवारों में से थे, जिनके घर में कमाने वाला बंदा सिर्फ एक ही है?

परगट बोले- ये हॉर्स ट्रेडिंग है
तरस का पैरामीटर सभी के लिए एक समान होना चाहिए। यह फैसला तुरंत वापस हो। विधायक परगट सिंह ने कहा- देश के लिए मेडल जीतने वाले स्पोर्ट्समैन को डीएसपी बनाने की घोषणा भी पूरी नहीं हुई। ये सीधे-सीधे यह हॉर्स ट्रेडिंग है, ताकि विधायकों को अपने साथ जोड़कर रख सकें। पंजाब के 450 किसान भी शहीद हो चुके हैं।

जिनके पास करोड़ों का घर उन्हें किस आधार पर नौकरियां : जीरा
जीरा हलके के कांग्रेसी विधायक कुलबीर सिंह जीरा ने मांग की कि सरकार फैसला वापस ले। करोड़पति विधायकों के बेटों को नौकरियां किस आधार पर दीं।
दोनों विधायक नौकरी लेने से पहले विचार करें : अंगद सिंह
नवांशहर से कांग्रेस विधायक अंगद सिंह ने दोनों विधायकों से भी अपील की कि वे फिर से एक बार विचार करें।

इधर, सरकार के समर्थन में कई मंत्री और सांसद
कैप्टन कैबिनेट दो हिस्सोे में बंट गई है। एक तरफ 5 मंत्री फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं, 9 कैबिनेट मंत्रियों व 4 सांसद व कई विधायक समर्थन में हैं। कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी, साधु सिंह धर्मसोत, विजय इंदर सिंगला, अरुणा चौधरी, सुंदर शाम अरोड़ा, गुरप्रीत सिंह कांगड़, बलबीर सिंह सिद्धू, ओपी सोनी, भारत भूषण आशु ने संयुक्त एलान में कहा, 1984 के दंगों के शिकार हुए पीड़ितों को भी ऐसे ही लाभ और वित्तीय सहायता भी मुहैया करवाई गई। प्रांतीय नीति की प्रशंसा नहीं करना निंदनीय है।

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