विवादों में पंजाब पुलिस एकेडमी फिल्लौर:दो पुलिसवालों के ड्रग सप्लाई में पकड़े जाने के बाद कई बड़े अधिकारी राडार पर

जालंधर5 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

नशे को लेकर विवादों में घिरी महाराजा रणजीत सिंह पुलिस एकेडमी में दो पुलिसवालों के ड्रग सप्लाई करते पकड़े जाने के बाद अब इस एकेडमी के कई अधिकारी और कर्मचारी राडार पर हैं। पुलिस एकेडमी के भीतर जवानों को नशे से बचने का संदेश देने की जगह उनकी नसों में ड्रग के इंजेक्शन लगाने के इस गंदे खेल में और भी कई बड़ी मछलियां शामिल बताई जा रही हैं।

फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस की महाराजा रणजीत सिंह एकेडमी में जवानों को ड्रग सप्लाई करने का कारोबार हैड कांस्टेबल शक्ति और उसका साथी वाटर कैरियर जयराम अकेले अपने दम पर नहीं चला सकते। इसके पीछे किंगपिन कोई और है। वैसे भी इस खेल का पटाक्षेप तब हुआ जब एकेडमी में एक सिपाही की हालत ड्रग ओवरडोज से बिगड़ गई। उसी ने बताया कि उसे 2017 में नशे की लत एकेडमी के उस्ताद (इंस्ट्रक्टर) शक्ति कुमार ने लगाई। इसका मतलब है कि 2017 से पहले भी एकेडमी में ड्रग की सप्लाई चलती रही है। फिलहाल पुलिस ने शक्ति और जयराम को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

सिपाही के अस्पताल पहुंचने पर खुला खेल

पुलिस एकेडमी का सिपाही ड्रग ओवरडोज के कारण लुधियाना के डीएमसी अस्पताल न पहुंचता तो यह मामला शायद ही खुलता। तरस के आधार पर नौकरी पाने वाले इस सिपाही का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने जब इंजेक्शन के लिए उसकी नसें ढूंढना शुरू की तो लगभग सारी नसों में इंजेक्शन लगे होने के निशान मिले। इसके बाद जांच में पता चला कि सिपाही नशे के टीके लगाता है। नशे के कारण वह कोमा तक में चला गया। उसके बाद ही उसने पुलिस एकेडमी में चल रहे इस खेल के राज खोले।

सवाल- अधिकारियों को क्यों नहीं चला इसका पता

इस मामले ने साबित कर दिया है कि नशे पर नकेल डालने का दंभ भरने वाली पंजाब पुलिस की ट्रेनिंग अकादमी, जहां सिपाही से लेकर अधिकारी तक ट्रेंड किए जाते हैं वहां ड्रग के कारोबारियों ने गहरी जड़े जमा रखी हैं। ऐसा कैसे संभव है कि पुलिस एकेडमी में निचले स्तर के दो मुलाजिम यानि हैड कांस्टेबल शक्ति और उसका साथी वाटर कैरियर जयराम सात-आठ साल से नशे की सप्लाई करते रहे और अधिकारियों की जानकारी तक न हो। यदि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी एकेडमी के भीतर लंबे समय से चल रहे नशे के धंधे के बारे में पता नहीं चला तो यह उनका बड़ा लैप्स है। हालांकि इस बात के चांस बहुत कम हैं कि एकेडमी के अधिकारियों को इसकी भनक न लगी हो।

सवाल यह भी है कि हैड कांस्टेबल शक्ति और उसका साथी वाटर कैरियर जयराम नशा कहां से लेकर आते थे? वह खुद ड्रग लाने जाते थे या नशे के सौदागर खुद एकेडमी के अंदर सप्लाई देकर जाते थे? पुलिस का दावा है कि एकेडमी के अंदर रहने वाले पांच-छह पुलिसवाले उनके राडार पर हैं और उनकी गुप्त तरीके से जांच चल रही है। वैसे भी यह संभव नहीं है कि इतना जोखिम वाला काम दो छोटे पुलिसवाले अपने दम पर कर लें। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एकेडमी के अंदर पूरा नेक्सस इस धंधे में लिप्त है।

पुलिस एकेडमी में सबके होंगे डोप टेस्ट

पुलिस एकेडमी में ड्रग सप्लाई का खुलासा होने के बाद अफसर सख्त मूड में दिख रहे हैं। इस मामले की जांच करने वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट में एकेडमी में तैनात सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को डोप टेस्ट करवाने की सिफारिश की है। इससे एकेडमी में खलबली मची है।

जांच जारी, किंगपिन को पकड़ेंगे : एसएसपी
फिल्लौर पुलिस एकेडमी से जुड़े इस मामले की जांच जालंधर देहाती पुलिस के पास है। जालंधर देहाती पुलिस के एसएसपी स्वप्न शर्मा ने बताया कि जांच चल रही है। अभी सिर्फ ड्रग सप्लायर पकड़े हैं। इनके पीछे किंगपिन कौन है? इसका पता लगाया जा रहा है। इसमें जो भी संलिप्त पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।