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तीसरी लहर से बच्चों को डराना नहीं, बचाना है:सिविल में 4 पर तैनाती 9 पदों पर तैनात एमओ गंभीर बच्चे सिविल में रेफर कर रहे

जालंधर14 दिन पहलेलेखक: प्रभमीत सिंह
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सिविल के एसएनसीयू वार्ड में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण एक समय में 5 से 7 नर्सिंग स्टूडेंट्स बच्चों की देखरेख करती हैं। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
सिविल के एसएनसीयू वार्ड में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण एक समय में 5 से 7 नर्सिंग स्टूडेंट्स बच्चों की देखरेख करती हैं। (फाइल फोटो)
  • सरकारी अस्पताल में आईसीयू वार्ड बनाने की तैयारी शुरू, उपकरणों की समीक्षा के लिए पैनल भी तैनात, लेकिन
  • जिले में बच्चों के डॉक्टर्स के 17 पद

कोरोना में बच्चों के इलाज की तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिविल में तो बच्चों के 4 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि देहात के अस्पतालों और सीएचसी में 13 में से 9 पदों पर मेडिकल अफसर ही बच्चों का इलाज कर रहे हैं।

हालांकि सिविल अस्पताल में आईसीयू वार्ड बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, वेंटिलेटरों व अन्य उपकरणों की समीक्षा के लिए डॉक्टर्स का पैनल भी तैनात है, पर देहात के 9 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स समेत सब डिवीजन अस्पताल फिल्लौर, नकोदर, पीएपी समेत करतारपुर अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं।

बच्चों के लिए स्टाफ भी कम है। वहीं शहर के अधीन आने वाली 4 सीएचसी में से एक में ही डॉक्टर उपलब्ध है। वहीं, एसएनसीयू वार्ड में बच्चों के 10 बेडों के लिए एक ही नर्स तैनात है और वार्ड में दो नर्सें ही ड्यूटी दे रही हैं। बच्चों के इलाज के लिए नर्सिंग स्कूल की स्टूडेंट्स को तैनात किया गया है।

डॉक्टर्स, स्टाफ व बेडों की गिनती के तहत निजी अस्पतालों में केयर सेंट बनेंगे

कोविड केयर सेंटर्स की सूची में सरकारी समेत 71 प्राइवेट अस्पतालों में कोविड के मरीजों का इलाज चल रहा है। हालांकि सिविल अस्पताल में बच्चों के डॉक्टरों के चारों पदों पर डॉक्टर तैनात हैं, जबकि चार सब डिवीजनल अस्पतालों में से केवल पीएपी सीएचसी में एक पद बच्चों के डॉक्टर्स की खाली है।

उधर, सिविल अस्पताल में बच्चों के लिए कोविड बनाने की तैयारी शुरू की गई है। जबकि सेहत विभाग की तरफ से शहर के दो प्राइवेट अस्पतालों में कोविड की श्रेणी में रखा गया है।

अब प्राइवेट अस्पतालों में कितने डॉक्टर, बेड और स्टाफ उपलब्ध है, उसके तहत आने वाले दिनों को लेकर योजना तैयार की जा रही है, ताकि यदि बच्चों को संक्रमण के मामले सामने आते हैं तो उनका इलाज प्राइवेट अस्पतालों में भी किया जा सके।

डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पर कोई विचार नहीं, ओपीडी में कैसे होगा बच्चों का इलाज

सिविल में बच्चों के डॉक्टर्स की कमी दूर करने के लिए अभी कोई चर्चा नहीं की जा रही, क्योंकि अस्पताल में वर्तमान में 4 डॉक्टर उपलब्ध हैं और वही रोजाना की ओपीडी भी देख रहे हैं। इसके अलावा अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिस वार्ड का आईसीयू बनेगा, वहां नर्सिंग स्टाफ पहले से ही मौजूदा है।

जबकि इन्हीं ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टर्स का कोई विकल्प नहीं है। कोरोनावायरस के स्टेट स्पोक्स पर्सन डॉ. राजेश भास्कर का कहना है कि पंजाब सरकार ने पिछले दिनों 400 से अधिक डॉक्टर्स गांवों में तैनात किए हैं। इनमें से कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी हैं। ऐसा लोगों को समय पर इलाज देने के लिए ही किया है।

कहां कितने डॉक्टर्स

जिले के दो सब डिवीजनल अस्पतालों में बच्चों के लिए दो पदों पर दो डॉक्टर तैनात हैं। देहात के अधीन आने वाली अपरा, मेहतपुर, बड़ा पिंड, जंडियाला, नूरमहल, बिलगा, शाहकोट, लोहियां खास, आदमपुर की सीएचसी के अलावा करतारपुर, फिल्लौर, नकोदर अस्पतालों में डॉक्टर्स के 13 पद खाली हैं, जिनमें से 4 पर ही डॉक्टर तैनात हैं जबकि 9 पर एमओ तैनात हैं।

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