कांग्रेस की तैयारी:सांसद चौधरी संतोख करवाएंगे मीटिंग, सरकार को उद्योगपति भेजेंगे फीडबैक, लंबित मुद्दे उठाएंगे

जालंधरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • मैनिफेस्टो में मुद्दे शामिल करने को इंडस्ट्री आमंत्रित, कारोबारियों में मंथन
  • कई कार्यों में इंडस्ट्री को सरकार ने राहत दी तो कई मसले पांच साल बाद भी उसी अवस्था में

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की पंजाब यूनिट तथा तमाम इंडस्ट्री-ट्रेड संगठनों को चुनावी मैनिफेस्टो में मुद्दे शामिल करने से पहले कांग्रेस ने आमंत्रित किया है। जालंधर के कारोबारी संगठन उन मुद्दों पर मंथन में जुट गए हैं, जिन्हें मैनिफेस्टो में जुड़वा सकें। पिछले 5 साल में कांग्रेस सरकार का कार्यकाल देखें तो 10 प्रमुख मुद्दे अभी लंबित हैं।

लेकिन वैट के केसों की ओटीएस, सी फार्म से निजात जैसे जो कदम सीएन चन्नी ने अब जाकर उठाए हैं, उनके सहित कुल 7 काम पूरे भी हुए हैं। मैनिफेस्टो के लिए इस बार फिर से जो फीडबैक दी जाएगी, उसमें पुराने लंबित मुद्दे शामिल रहेंगे। इनमें सबसे बड़ी मांग जालंधर में नए फोकल पाॅइंट का निर्माण है, जोकि 20 साल पुरानी है।

रिसर्च एंड डेवेलपमेंट सेंटर बने

जालंधर में खेल उद्योग संघ के कनवीनर रविंदर धीर कहते हैं कि जरूरत इस बात की है कि जालंधर में स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए रिसर्च एंड डेवेलपमेंट सेंटर बनाया जाए। दूसरा बड़ा मुद्दा जीएसटी का है। खेल इंडस्ट्री का सामान लोगों की सेहत से जुड़ा है, लेकिन इनमें भारी टैक्स लगाया है। जालंधर इंडस्ट्रियल फोकल पाॅइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नरिंदर सिंह सग्गू व उद्योग नगर मेन्युफेक्चर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट तेजिंदर सिंह भसीन, ट्रेडर्स फोरम के डेलीगेट अमित सहगल ने कहा कि मुद्दे स्टडी किए जा रहे हैं। सरकार को राय भेजेंगे।

जल्द कमेटी आएगी जालंधर

जालंधर इंडस्ट्रियल फोकल पाॅइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नरिंदर सिंह सग्गू ने बताया कि सांसद चौधरी संतोख सिंह जालंधर में मैनिफेस्टो कमेटी की मीटिंग इंडस्ट्री संचालकों के साथ कराने जा रहे हैं। कमेटी जल्द ही जालंधर आएगी, जिसकी तैयारी हमने शुरू कर दी है। इस दौरान हम फोकल पाॅइंट के अलॉटीज की लैंड इनहांसमेंट का मुद्दा प्रमुखता के साथ कमेटी के सामने रखे जाएंगे। साथ ही ग्रामीण सड़कों के चौड़ाकरण का मुद्दा भी उठाएंगे ताकि सिटी से बाहर जाकर सरकार की मंजूरी से नए कारखाने बनाए जा सकें।

इंडस्ट्री के पिछले काम, जो अभी पूरे नहीं हुए

  • जालंधर में नए फोकल पाॅइंट का निर्माण नहीं हो सका।
  • खेल इंडस्ट्री के लिए रिसर्च एंड डेवेलपमेंट सेंटर का निर्माण बाकी।
  • इंडस्ट्रियल जोन हैं, उनके 100 फीसदी विकास को लेकर इंडस्ट्रियल पाॅलिसी में किया प्रावधान लागू नहीं हुआ।
  • जालंधर सिटी में पंजाब के इनवेस्टमेंट सम्मेलनों के लिए जरिये एंकर यूनिट स्थापित नहीं हुआ।
  • फोकल पाॅइंटों के लैंड इनहांसमेंट का मामला हल नहीं हो सका।
  • इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए एफलुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का मसला कांग्रेस हल नहीं कर सकी।
  • छोटी इंडस्ट्री बार-बार मांग उठाती रही कि उनके बिजली की खपत कम होने से 5 रुपए यूनिट बिजली का लाभ नहीं मिल रहा है।
  • फूड प्रोसेसिंग, आईटी इंडस्ट्री के बड़े प्रोजेक्ट लुधियाना-मोहाली की तरफ विकसित किए गए, जालंधर का नंबर नहीं आया।
  • जालंधर की इंडस्ट्री की एग्जीबिशन सैंटर की पुरानी मांग पूरी नहीं हुई।
  • ट्रांसपोर्ट नगर का चेहरा सरकार नहीं बदल सकी। खस्ताहात सुविधाओं की परेशानी जारी है।
खबरें और भी हैं...