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हंगामेदार रही जालंधर MC की बैठक:अवारा कुत्तों और स्ट्रीट लाइट का मुद्दा गर्माया, पार्षदों ने मेयर को घेरा

जालंधर4 महीने पहले
जालंधर नगर निगम हाउस बैठक की अध्यक्षता करते मेयर जगदीश राज राजा व साथ में मौजूद निगम की कमिश्नर दीपशिखा।

पंजाब की नगर निगम जालंधर की बैठक बुधवार को रेड क्रॉस भवन में हुई। नगर निगम के अपने ऑफिस से बाहर हुई हाउस की बैठक हंगामेदार रही। बैठक की शुरुआत से पहले पंजाब के फेमस सिंगर सिद्धू मूसेवाला, अभिनेता दीप सिद्धू व कबड्डी खिलाड़ी संदीप नंगल अंबिया को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि देने के बाद शुरू हुई बैठक में वैसे को कई मुद्दे उठे, लेकिन आवारा कुत्तों और स्ट्रीट लाइट मुद्दों पर काफी बहस हुई। पार्षदों ने कहा कि आवारा पशुओं के कारण सड़कों पर हादसे हो रहे हैं और आवारा कुत्ते शहरवासियों को जीने नहीं दे रहे हैं।

बैठक शुरु करने से पहले दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देते व पार्षद
बैठक शुरु करने से पहले दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देते व पार्षद

बीच में कुछ पार्षदों ने कहा कि फीमेल डॉग छह महीने में एक बार आठ बच्चों को जन्म देती हैं। शहर में स्टरलाइजेशन न होने के कारण आवारा कुत्तों की तादाद बढ़ती जा रही है। नगर निगम ने कुत्तों की पकड़ने के लिए वाहन भी खरीदे थे, लेकिन वह भी निगम के यार्ड में खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। इस पर मेयर ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या बहुत विकराल है, लेकिन वह भी मजबूर हैं। यदि वह कुत्तों को पकड़ते हैं तो कुछ संस्थाएं आड़े आ जाती हैं। यदि वह इन्हें नहीं पकड़ते हैं तो लोगों को परेशानी हो रही है।

मेयर ने कहा कि कुछ राज्यों में आवारा कुत्तों को लेकर नीतियां बनाई है। इन्हें कानून के दायरे में रहते हुए कैसे पकड़ना और इनकी प्रभावी तरीके से स्टरलाइजेशन कैसे करनी है इसकी वह स्टडी करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अब वह पूरे तौर तरीके अपनाते हुए ही आवारा कुत्तों के आतंक को खत्म करेंगे।

मीटिंग में मौजूद पार्षद
मीटिंग में मौजूद पार्षद

पार्षद जसलीन कौर सेठी ने स्ट्रीट लाइट के प्रोजेक्टों पर सवाल उठाया। माडल टाउन की पार्षद अरुणा अरोड़ा ने सवाल उठाया आई लव माय जालंधर गायब हो गया है। रामामंडी के पार्षदों आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या का मुद्दा उठाया।

बारिश का मौसम सिर पर है और शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट को लेकर बैठक में खूब हंगामा हुआ। करीब सात महीने बाद हुई ही नगर निगम की बैठक में सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और सफाई के मुद्दों पर विरोधियों के साथ-साथ अपने भी मेयर की घेराबंदी में जुटे रहे।

पार्षदों ने कहा कि होर्टीकल्चर आफिस के पास लगा आई लव जालंधर की आई गायब है। इसी तरह से एक पार्षद ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पार्कों में ग्रिलें लगी थी वह चोरी हो गई। पार्क में लगा फब्बारा भी खराब पड़ा है। लोग फब्बारे का सामान चोरी करके ले जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी किसके अंडर है बताया जाए। उन्होंने कहा कि यदि वह कोई शिकायत करते हैं तो आगे से अधिकारियों का जवाब होता है कि यह प्रोजेक्ट को स्मार्ट सिटी के तहत आता है। पार्षदों ने हाउस से सवाल किया कि हाउस बताए कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट किसके अंडर आता है। नगर निगम में ही है या निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

जालंधर में एलईडी लाईटों को लेकर भी खूब सवाल हुए पार्षदों ने कहा कि गुरु अमरदास चौक में लगी हाई मास्ट लाइट बिना कनेक्शन के शोपीस बनी हुई है। लाइट लटकी हुई है लेकिन कनेक्शन ही नहीं। इसी दौरान अन्य पार्षदों ने कहा कि एलईडी लाइटों के लेकर चार साल निकल गए लेकिन उन्हें यह समझ में नहीं आया कि इनके न लगने या खराब होने की सूरत में किसे शिकायत करनी है। जिससे शिकायत करो वह अपना पल्ला झाड़ लेता है। पिछले हफ्ते निगम में एक जनरल मीटिंग हुई थी उसमें एलईडी लाइट का मुद्दा उठा था लेकिन जवाह वहां पर भी नहीं मिल पाया था। एक पार्षद ने कहा कि शहर में कंपनी ने सर्वे किया था लाइट कहां कहां पर लगनी है लेकिन वहां पर कोई लाइट नहीं लगी। इसकी सारी जांच होनी चाहिए।

निगम के कर्मचारियों को प्रोमोट करने का पारित

निगम की बैठक में दर्जा चार के कर्मचारियों को पदोन्नत करके क्लर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। बैठक में पदोन्नत होने वाले कर्मचारियों के लिए शर्तों बी रखी हैं कि वह कम से कम दसवीं पास होना चाहिए और उसने दसवीं के स्तर तक पंजाबी भी पड़ी हो।

इसके बाद निगम में ठेके पर जो जेई रखे गए हैं उनका मुद्दा भी उठा। मेयर ने स्वयं यह प्रस्ताव रखा कि क्या ठेके पर रखे जेई को आगे एक साल के लिए ठेका रिन्यू किया जाए। इस पर कुछ पार्षदों ने ऑब्जेक्शन किया कि जो भी जेई रखे गए हैं उन्हें कोई कामकाज नहीं आता है। उन्हें एस्टीमेट तक बनाने नहीं आते हैं। पार्षदों ने कहा कि यदि ठेके पर रखे जूनियर इंजीनियर को कुछ पूछा जाए तो उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है। अधिकारियों को कहा जाए तो वह जूनियर इंजीनियर के साथ किसी विशेषज्ञ के बिठा कर एस्टीमेट तैयार करवाते हैं। इसके पहले सहमति बनी कि तीन महीने के लिए प्रोग्रेस के अनुसार ठेका रिन्यू किया जाए लेकिन बीच में पार्षदों ने फिर से ऑब्जेक्शन किया कि एक-एक महीने की प्रोग्रेस देखी जाए। इसके बाद एक महीने पर ही सहमति बनी।

पिछले कल भी मेयर को पार्षदों ने घेरा था

मेयर ने पिछले कल नगर निगम हाउस की मीटिंग से पहले पार्षदों की एक बैठक कैंप ऑफिस मॉडल टाउन में बुलाई थी। इस बैठक में 65 में से सिर्फ तीस ही पार्षद शामिल हुए और इनमें भी अधिकतर मेयर की कांग्रेस पार्टी के ही थे। बैठक के दौरान कई कांग्रेसी पार्षदों ने ही शहर में टूटी-फूटी सड़कों, स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट, स्टॉर्म सीवरेज व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए और मेयर की कारगुजारी को भी कठघरे में खड़ा किया।

बता दें कि शहर में सड़कों का बुरा हाल है। स्टॉर्म सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कें अभी तक दोबारा बनकर तैयार नहीं हुई हैं। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट जब से चला है, तभी से विवादों में है। शहर की सफाई व्यवस्था सिर्फ 40 प्रतिशत कर्मचारियों के हाथ में है, जबकि 60 प्रतिशत स्टाफ के पद खाली पड़े हैं। हालत यह है कि शहर के बहुत सारे वार्डों में सफाई कर्मचारी पहुंच ही नहीं पाते।

शहर में बहुत सी जगहों पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नगर निगम के अपने ऑफिस का यह हाल है कि वहां पर प्रोमोशन के बाद या फिर सेवानिवृत्ति के बाद जो पद खाली हो रहे हैं, उन्हें भरा नहीं जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। बिल्डिंग ब्रांच में एक ही कम्प्यूटर पर सारे शहर के नक्शे बन भी रहे हैं और उसी पर पास भी हो रहे हैं। कर्मचारियों पर दबाब डाला जा रहा है कि वह अपना डाटा खर्च करके मोबाइल पर नक्शों को चेक करके पास करें। नगर निगम में बहुत सारी एसी समस्याएं हैं, जिनसे लोग परेशान हैं और लोगों की परेशानी के कारण पार्षदों को गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है।