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समय का पार्क:सूर्य घड़ी देखने दिल्ली जाने की जरूरत नहीं, सूर्या एनक्लेव घूम आएं, रखरखाव न होने के कारण खराब हो गई थी सूर्य घड़ी

जालंधर8 दिन पहले
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  • वेलफेयर सोसायटी ने दोबारा करवाई दुरुस्त

समय की गणना के लिए प्राचीन काल में धूप घड़ियों का निर्माण किया जाता था। दिन को प्रहरों में बांट ऐसे यंत्र तैयार किए जाते थे जिनसे समय की सटीक गणना संभव थी। विदेश में एरिजोना और भारत में जयपुर, दिल्ली का जंतर-मंतर सूर्य घड़ी के लिए ख्यात है। अपने शहर में भी सूर्य घड़ी है पर जागरूकता की कमी के कारण बहुत कम लोगों को इस बारे में पता है। सूर्या एनक्लेव का मुख्य द्वार धूप घड़ी है। 14 साल तक मेनटेनेंस न होने के कारण समय दर्शाने वाले हिस्से खराब हो गए थे। अब सूर्या एनक्लेव वेलफेयर सोसायटी ने फिर से इसे दुरुस्त करवाया है।

इस तरह की जाती है समय की गणना

जैसे-जैसे सूर्य पश्चिम की तरफ जाता है, उसी तरह वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की तरफ चलती है। सूर्य लाइनों वाली सतह पर छाया डालता है जिससे समय का पता चलता है। सूर्या एनक्लेव में धूप घड़ी का कांसेप्ट जंतर मंतर से लिया गया है। यहां बीच में दीवार है। दोनों तरफ अर्ध गोलाकार स्ट्रक्चर लोहे के हैं। दीवार से सूर्य की किरणों का फोकस अर्ध गोलाकार पर पड़ता है, जिससे परछाई बन जाती है। समय के निशान पर परछाई पड़ने से समय का पता चलता है।

14 साल पहले उद्‌घाटन
सूर्य एनक्लेव वेलफेयर सोसायटी के प्रेसिडेंट ओम दत्त शर्मा व महासचिव राजीव धमीजा ने कहा कि मेन गेट का असली नाम राजीव गांधी द्वार है। प्रोजेक्ट का उद्‌घाटन 2006 में चौधरी जगजीत सिंह ने किया था। इसके बाद देखरेख नहीं हो पाई। झाड़ियां, लोहे के स्ट्रक्चर को जंग लग गया था। लोगों को इसके बारे में बताने के लिए बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके आसपास के क्षेत्र को साफ रखा जाएगा।

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