पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

एजुकेशन माफिया से आए तंग:प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ जालंधर में सड़क पर उतरे पेरेंट्स, बोले- अवैध फंड के लिए रिजल्ट रोक कर रहे ब्लैकमेल

जालंधर3 महीने पहले
जालंधर में प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन करते पेरेंट्स।
  • सरकार व प्रशासन पर आरोप-एजुकेशन माफिया पर नकेल नहीं कसी जा रही

प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ मंगलवार को पेरेंट्स जालंधर में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से फंड मांगकर बच्चों का रिजल्ट रोककर उन्हें मां-बाप को ब्लैकमेल किया जा रहा है। वह बार-बार अफसरों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन एजुकेशन माफिया पर कोई नकेल कसने को राजी नहीं है। उन्होंने शहर में रैली निकालते हुए DC दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया।

जबरदस्ती कर रहे वसूली, मां-बाप परेशान

पेरेंट्स ने कहा कि स्कूल लगातार मनमर्जी से फंड व अन्य खर्चे के नाम पर जबरदस्ती पैसे वसूल रहे हैं। अगर कोई इन्कार करता है या इनकी मांग पूरी नहीं कर सकता तो उनके बच्चे का रिजल्ट रोककर ब्लैकमेल किया जा रहा है। कभी उनसे एनुअल फीस व बिल्डिंग फंड तो कभी और नाजायज खर्चे के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान कामकाज ठप हो गया तो घर का गुजारा भी मुश्किल से चलाया गया। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल वाले उनसे जबरन अलग-अलग फंड मांग रहे हैं।

हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन

उन्होंने कहा प्राइवेट स्कूलों की फीस का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। उन्हें अंतरिम आदेश हैं कि केस का आखिरी फैसला होने तक वो सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं। इसके अलावा काेई दूसरा फंड या खर्चा नहीं ले सकते। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों के मामले में अंतरिम आदेश दिया है, वो भी पंजाब पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि स्कूल 2019-20 की नोटिफाइड फीस के बराबर साल 2020-21 की फीस 6 महीने की किश्तों में ले सकते हैं। उन्हें यह भी कहा गया है कि इसके अलावा किसी भी फीस या अन्य बकाया न देने पर बच्चों की आनलाइन या आफलाइन पढ़ाई नहीं रोक सकते और न ही बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है। उनके रिजल्ट पर भी रोक नहीं लगाई जा सकती।

राइट टू एजुकेशन व जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का भी उल्लंघन

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को प्राइवेट स्कूल तोड़-मरोड़कर लागू कर रहे हैं। वह बच्चों को अगली क्लास में प्रमोट न करने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राइट टू एजुकेशन एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत यह अपराध है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

खबरें और भी हैं...