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वन्य जीव दिवस आज:सुबह-शाम पतारा में घरों की छतों पर दिखते हैं मोर, 70 से ज्यादा पक्षियों को गांववासियों ने दिया संरक्षण

जालंधर9 महीने पहले
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पतारा गांव में खेत में घूमता हुआ एक मोर (दाएं) गांव में उड़ान भरती हुईं मोरनियां।-भास्कर - Dainik Bhaskar
पतारा गांव में खेत में घूमता हुआ एक मोर (दाएं) गांव में उड़ान भरती हुईं मोरनियां।-भास्कर
  • घट रहे जंगलों के कारण जंगली जीव शहरों में आ रहे, 6 माह में 300 सांभर तो 15 नील गाय आईं
  • बाहरी लोगों को गांव में आने से रोकते हैं गांववासी ताकि पक्षी सुरक्षित रहें

जंगल का रकबा लगातार घट रहा है तो जंगली जीव भी शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं। ऐसे में उनकी जिंदगी का खतरा भी बढ़ गया है, लेकिन गांव पतारा के लोग वन्य जीवों को संरक्षण देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहां मोर सुबह-शाम मोर-मोरनियों की आवाजें सुनाई देती हैं। गांववासियों के संरक्षण के कारण अब यहां 70 से ज्यादा मोर-मोरनियां हैं, जो सुबह-शाम घरों की छतों पर नजर आते हैं।

जिक्रयोग है कि तीन मार्च को पूरे विश्व में ही वन्य जीव दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को पतारा के लोग सार्थक कर रहे हैं। पतारा के पंचायत मेंबर राम आसरे ने बताया कि उनकी ड्यूटी मोटर पर पानी की टंकी भरने की है। यहां सारा दिन मोर घूमते रहते हैं। सुबह-शाम इनकी आवाजें अलग ही आनंद देती हैं। इनका ध्यान रखने के लिए गांववासी भी यहां आते रहते हैं।

बाहरी लोगों को गांव में आने से रोकते हैं गांववासी ताकि पक्षी सुरक्षित रहें

मोरों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसलिए वे बाहरी लोगों को गांव में आने और मोरों के पास जाने नहीं देते। गेहूं की कटाई के समय खेत समतल हो जाते हैं तो मोर एक जगह इकट्‌ठे होकर बैठ जाते हैं। जब वे पंख फैलाते हैं तो संदेश मिल जाता है कि मौसम बढ़िया होने वाला है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ के डेटा के अनुसार 1970 से 2020 तक मनुष्य की जनसंख्या तीन गुना बढ़ी है, जबकि 70 फीसदी वन्य जीव खत्म हो चुके हैं। इनमें से सबसे ज्यादा छोटी चिड़िया हैं। दूसरी तरफ जंगलात विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक कई जंगली जानवर वे रहमोपुर तक्खनी के जंगलों में छोड़ चुके हैं। इसे 40 साल पहले आरक्षित किया गया था और 956 एकड़ में फैला हुआ है। यहां 6 तालाब हैं, जिनमें 2 में पानी है। ऊंचाई वाले तालाबों में ट्रैक्टरों से पानी पहुंचाया जाता है।

मानको घड़ियाल में मोरों की संख्या 150 से ज्यादा

जंगलात विभाग के रेंज अफसर जसवंत सिंह ने बताया कि मानको घड़ियाल गांव में 150 से ज्यादा मोर हैं। वहां के लोग इन्हें संभालते हैं। मोर खुद इनके पास आकर बैठ जाते हैं। उन्होंने बताया कि जंगलात रकबा कम होने के कारण जंगली जानवर शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं। छह महीने में 300 से अधिक सांभर और 15 नील गाय जालंधर के गांवों में आ गए। उन्हें रहमोपुर तक्खनी के जंगलों में छोड़ा गया। सांभर और हिरनों की संख्या लगातार घट रही है, क्योंकि जंगलों में इनके लिए चारा खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोग जंगली जानवरों के पीछे न भागें, उन्हें बचाने में सहयोग करें।

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